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    संक्रांति स्पेशल: तिल-गुड़ और खिचड़ी के साथ सुधारें अपनी लाइफस्टाइल, साल भर दूर रहेंगी बीमारियां

    By Seema JhaEdited By: Swati Sharma
    Updated: Wed, 14 Jan 2026 02:28 PM (IST)

    मकर संक्रांति समस्याओं को भूल कर एक नई शुरुआत के लिए संकल्प लेने का अवसर है। उत्तरायण के प्रारंभ के साथ आप भी आहार और दिनचर्या में परिवर्तन की शुरुआत ...और पढ़ें

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    मकर संक्रांति पर लें अच्छी सेहत का संकल्प (Picture Courtesy: Freepik)

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    सीमा झा, नई दिल्ली। इन दिनों सर्द हवाओं और वातावरण में रुखेपन के कारण सामान्य दिनचर्या का पालन करने में कठिनाई स्वाभाविक है। पहले से ही सेहत से जुड़ी किसी परेशानी फा सामना कर रहे हैं, तो यह मौसम आपके नई लिए मुसीबतें पैदा कर सकता है।

    ऐसे में सामान्य जीवनचर्या है तो भी आहार-विहार में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने के लिए कहा जाता है। आइए जानें इस बारे में डॉ. प्रदीप प्रजापति (निदेशक, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, दिल्ली) से। वास्तव संक्रांति का पर्व सेहत को फिर से बेहतरी की ओर ले जाने का अवसर होता है। यदि आप नई शुरुआत करना चाहते हैं। तो वह समय बहुत ही उपयुक्त है।

    सूर्य की गति उत्तर की ओर होने के बाद वातावरण में ऊष्मा और प्रकाश दोनों में ही वृद्धि होने लगती है। इससे शरीर में वात दोष को संतुलित करने में मदद मिलती है। तापमान बढ़ने से तन-मन की सेहत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पतंगवानी और बाहर निकलकर अलग अलग कार्यों में सक्रिय होने से आपको फिट रहने की प्रेरणा मिलती है।

    शरीर को ऊर्जा से भरपूर भोजन की जरूरत होती है, इसलिए इस मौके पर तेल घी, तिल, गुड़ और खिचड़ी जैसे आहार का सदियों से प्रयोग होता रहा है। वे सभी वात शमन में सहायक आहार हैं। साथ ही अपनी स्वभाविक ऊर्जा से ठंड से हमारी रक्षा करते हैं। बता दें कि मौसम के अनुकूल अपनी आदतों व व्यवहार में बदलाव करना ही चेर्घायु और सेहतमंद बने रहने का राज है।

    Health Tips (5)

    (Picture Courtesy: Freepik)

    यह मौसम खेहत के लिए बेहतर क्यों 

    पारंपरिक रूप से यह समय शिशिर ऋतु का मध्य काल भी माना जाता है। जैसे- जैसे यह समय आगे बढ़ता है, अग्नि प्रबल होने लगती है। इससे भूख भी बढ़ जाती है। ऐसे में यदि सही और पोषक आहार का सेवन करें, तो हमारी शरीर बेहतर ढंग से पोषक तत्वों का अवशोषण करती है। इस समय अगर आप अनुचित अस्वस्थ्यकर आहार लेते हैं तो सेहत पर इसका गंभीर प्रभाव पडू सकता है।

    इस समय खानपान सही व संतुलित रखेंगे और इसमें नियमितता बनाकर रखेंगे तो वर्ष भर के लिए रोगप्रतिरोधक क्षमता अच्छी बनी रहेगी। इम्युनिटी बेहतर होने से आपका शरीर बीमरियों से लड़ने के लिए तैयार रहता है। मकर संक्राति पर्व पर मेरे गुड़- मूंगफली, दूध व इससे बने पदार्थ, सौंठ आदि डालकर बनी मिठाइयां आदि खाने की परंपरा रही है।

    वे सभी स्वादिष्ट होने के साथ सुपाच्य होते हैं और यह एक तरह से दवा का भी काम करते हैं। ठंड के चलते पानी पीना कम नहीं करना चाहिए प्रतिदिन पर्याप्त पानी जरूरी है। 

    ऋतुचर्या के लाभ

    मौसम के साथ जीवनशैली में सामजस्य बनाए रखने को ऋतुचर्या का जाता है। यह वैज्ञानिक रूप से भी तार्किक है। मौसम में बदलाव के अनुसार आपकी जैविक घड़ी सेट होने लगती है। आपके सोने-जागने का समय भी निया हो जाता है। यदि नियत समय पर सोएं जागे और सुबह-शाम आहार-विहार संतुलित रखेंगे, तो सेहत की चुनौतियों से बचे रहेंगे। सर्दी-खांसी, संधिवात आदि से आराम मिल सकत है और ऊर्जा, बल, ओज में वृद्धि हो सकती है।

    लाभदायक हैं ये आहार

    • अन्न- गेहूं, चावल, जौ, बाजरा 
    • स्निग्धद्रव- घृत ( देसी घी)  तिल तेल 
    • प्रोटीन एवं बल्य आहार- दूध एवं दुग्धजन्य पदार्थ, दालें

    आहार ग्रहण का सही तरीका

    • गर्म और ताजा भोजन करें। 
    • भूख महसूस होने पर ही ग्रहण करें। 
    • प्रतिदिन भोजन का समय तय करें। 
    • मसाले- अदरक, लहसुन, काली मिर्च, पीपली, हींग, अजवाइन

    बीपी, शुगर में आवश्यक सलाह

    • किसी भी दवा में परिवर्तन हमेशा चिकित्सक की सलाह से ही करे।
    • वात से बीपी बढ़ने की प्रवृत्ति होती है। 
    • अग्नि प्रबल होने के कारण अनुचित भोजन से शुगर असंतुलन का जोखिम रहता है। 
    • अधिक ठंड में सुबह-शाम बाहर निकलने से परहेज करें।
    • बीपी नियंत्रण में हो, तभी तिल के तेल से मालिश करें। 
    • अधिक तनाव व क्रोध से बचाव के लिए योग-ध्यान का अभ्यास डालें।
    • अनिद्रा का निवारण करें। नींद से समझौता न करें।
    • सीमित मात्रा में घी-तेल का सेवन करें। 
    • हल्का व सुपाच्य भोजन करें।
    • बासी, तले-भुने, गरिष्ठ आहार से बचें। 
    • तिल-गुड़ मिठाई ( शुगर में वर्जित ) 
    • नमक का नियंत्रित सेवन करना चाहिए 
    • लंबे समय तक उपवास से बचें।
    • स्वस्थ दिनचर्या की बनाएं आदत
    • सुबह जल्दी सोकर बेहतर होगा ब्रह्ममुहूर्त में उठने का प्रयास करें। 
    • गुनगुने जल का सेवन करें। सूर्य का दर्शन करे ।
    • तिल के तेल से नित्य मालिश कर
    • गुनगुने जल से स्नान करें।
    • सिर, कान, नासिका और पैरों का विशेष ध्यान रखें।
    • शक्ति अनुसार मध्यम से तीव्र स्तर का व्यायाम करें।
    • दिन में सोने से परहेज करें।
    • सूर्य नमस्कार, भस्त्रिका, कपालभाति जैसे योगासन बहुत ही लाभकारी है।
    • सूर्यास्त के बाद हल्का गरम भोजन करें। देर रात तक जागने से परहेज करना चाहिए।

    इस तरह के भोजन से करें परहेज 

    • ठंडा, रूखा, बासी आहार शीतल पेय पदार्थ अधिक उपवास से बचें। 
    • भूख दबाकर न रहें। 
    • वात वर्धक आहार सीमित रखें, जैसे, चना, मटर आदि। 

    स्वास्थ्यवर्धक मौसमी आहार

    सर्दी में कैसे हो सतर्कता

    • दंड में सुबह-शाम बाहर न निकलें।
    • अधिक ठंडे पानी से स्नान न करें।
    • बीपी की नियमित जांच करें।
    • हल्की पैदल चाल अत्यंत उपयोगी है।
    • ठंड में भी स्वच्छता की आदत बनाए रखें। कपड़ों को परत में पहनें, सिर, पैर और हाथों को ठंड से बचाएं।
    • बुखार, सिरदर्द होने पर चिकित्सक से अवश्य मिलें।