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    स्कूलों की नई पहल से सुधरेगी किशोरों के खान-पान की आदत, जंक फूड की लत पर काबू पाना होगा आसान

    Updated: Tue, 13 Jan 2026 09:02 AM (IST)

    आजकल भारतीय बच्चों में मोटापा, डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण नमक और चीनी से भरपूर 'अल्ट्र ...और पढ़ें

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    माता-पिता से ज्यादा 'स्कूल' बदल सकते हैं बच्चों की जंक फूड खाने की आदत (Image Source: Freepik) 

    आइएएनएस, नई दिल्ली। भारतीय बच्चों में मोटापे, डायबिटीज और हृदय रोग के तेजी से बढ़ रहे जोखिम के बीच एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि स्कूल आधारित व्यावहारिक हस्तक्षेप किशोरों में नमक और चीनी से भरपूर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स (यूपीएफ) के सेवन को कम करने में मदद कर सकते हैं। चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआइएमईआर) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया कि सरल स्कूल आधारित व्यवहार कार्यक्रम जंक फूड के सेवन को प्रतिदिन 1,000 कैलोरी से अधिक कम कर सकते हैं।

    यूपीएफ, जिसमें फास्ट फूड और शुगरी ड्रिंक्स शामिल हैं, का अधिक सेवन किशोरों और युवाओं में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और कैंसर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने का एक ज्ञात कारक है।

    Junk food addiction in students

    (Image Source: Freepik) 

    जंक फूड की लत छुड़ाने में 'स्कूल' निभा सकते हैं बड़ी भूमिका

    ब्रिटेन के इम्पीरियल कालेज लंदन और भारत की पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह अध्ययन भारतीय किशोरों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (यूपीएफ) के सेवन को कम करने के लिए स्कूल आधारित व्यावहारिक हस्तक्षेप की संभावनाओं को दर्शाता है । यह निम्न और मध्य आय वाले देशों में सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान और प्रथाओं में एक महत्वपूर्ण अंतर को रेखांकित करता है। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय जर्नल बीएमजे ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित हुआ है।

    अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर लगेगी लगाम

    अध्ययन में, टीम ने स्कूलों में एक विशेष रूप से डिजाइन किया हुआ पोषण और व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम का परीक्षण किया गया। चंडीगढ़ के 12 सार्वजनिक स्कूलों में एक क्लस्टर- रैंडमाइज्ड नियंत्रित परीक्षण किया गया, जिसका लक्ष्य कक्षा आठ के किशोर और उनके माता - पिता थे । किशोरों के लिए छह महीनों में लगभग 11 सत्र आयोजित किए गए।

    इसके अतिरिक्त, माता-पिता के लिए एक एकल शैक्षिक सत्र आयोजित किया गया ताकि यूपीएफ के सेवन को कम करने और स्वस्थ आहार व्यवहार को प्रोत्साहित करने के प्रति उनकी जागरूकता बढ़ाई जा सके। आहार सेवन डाटा को प्रारंभिक और अंतिम बिंदु पर एक दिन के गैप में 24 घंटे के आहार पुनः स्मरण के उपयोग से एकत्रित किया गया।

    junk food

    (Image Source: Freepik) 

    जंक फूड छोड़ना आसान, मगर हेल्दी खाना मुश्किल

    शोधकर्ताओं के मुताबिक, जो छात्र इन सत्रों में भाग लेते थे, उन्होंने अल्ट्रा- प्रोसेस्ड फूड्स, जैसे पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय और फास्ट फूड से प्रति दिन 1,000 कैलोरी से अधिक कम खाया। अन्य प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन लगभग 270 कैलोरी प्रतिदिन कम हुआ, जो अस्वास्थ्यकर आहार से लगातार दूर जाने को दर्शाता है । अध्ययन से यह भी पता चला कि जिन छात्रों ने जंक फूड का सेवन कम किया, उनमें तदनुरूप फलों या घर में बने भोजन का सेवन नहीं बढ़ा, जो यह संकेत देता है कि अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना, स्वस्थ आदतें बनाने से आसान है।

    'स्कूल' बन सकते हैं सबसे बड़ा हथियार

    परिवार की भागीदारी के बावजूद, माता-पिता के खाने के पैटर्न में बहुत कम बदलाव दिखाई दिया, जो किशोरों के व्यवहार पर स्कूलों के अद्वितीय प्रभाव को रेखांकित करता है।

    अध्ययन में यह सुझाव भी दिया गया है कि स्कूल भविष्य की जीवनशैली संबंधी बीमारियों को रोकने के लिए अग्रिम संस्थान बन सकते हैं, जो कम लागत वाली शिक्षा और व्यवहार रणनीतियों का उपयोग करते हैं । इसलिए रणनीति बनाने में इस बात का गंभीरता से ध्यान रखा जाना चाहिए।

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