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    कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल है तो भी 'सेफ' नहीं है आपका दिल! सर्दियों में 4 कारण बन सकते हैं हार्ट अटैक की वजह

    Updated: Tue, 13 Jan 2026 05:17 PM (IST)

    हार्ट अटैक अब युवाओं में भी बढ़ रहा है, और यह सामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर वाले लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। धूम्रपान, मधुमेह, मोटापा और शारीरिक निष्क ...और पढ़ें

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    सामान्य कोलेस्ट्रॉल पर भी दिल सुरक्षित नहीं, जानें कैसे (Picture Credit- Freepik)

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हार्ट अटैक एक ऐसी कंडीशन है, जो दुनियाभर में कई लोगों की मौत का कारण बनती है। खासकर भारत में तेजी से हार्ट अटैक में मामले बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि पहले जहां बुजुर्ग इसका शिकार बनते थे, वहीं अब युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। 

    आमतौर पर शरीर में बढ़ती कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को हार्ट अटैक का कारण माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल सही होने पर भी आप हार्ट अटैक का शिकार हो सकते हैं। आज इस आर्टिकल में इसी के बारे में विस्तार से जानेंगे। ऐसे में मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत में  कार्डियक साइंसेज के प्रिंसिपल डायरेक्टर और यूनिट हेड डॉ. रिपेन गुप्ता से जानते हैं कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने पर भी कैसे बना रहता है हार्ट अटैक का खतरा और कैसे करें इससे अपना बचाव- 

    इन वजहों से होता है हार्ट अटैक

    अक्सर यह देखने को मिलता है कि कम एलडीएल लेवल यानी लो कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में हार्ट अटैक का खतरा कम देखने को मिलता है,लेकिन लगभग आधे दिल के दौरे उन लोगों में होते हैं, जिनका कोलेस्ट्रॉल लेवल "सामान्य" होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी व्यक्ति में कई अन्य स्थितियां भी हो सकती हैं, जो जोखिम को बढ़ा सकती हैं। 

    heart attack symptoms

    (Picture Credit- AI Generated)

    इनमें से कुछ सबसे आम स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और फिजिकल एक्टिविटी की कमी हैं। इसके अन्य संभावित कारणों में स्मोकिंग इफेक्ट और वायु प्रदूषण शामिल हैं। इसके अलावा, ऐसे जेनेटिक और लाइफस्टाइल से जुड़े फैक्टर भी इसमें शामिल हो सकते हैं, जिन्हें हम पूरी तरह से नहीं समझते हैं।

    सर्दियां भी हैं जिम्मेदार

    हार्ट अटैक के मामले अक्सर ठंड के दिनों में ज्यादा देखने को मिलते हैं। इस बारे में की गई कई स्टडीज और रिसर्च, यहां तक कि हेल्थ एक्सपर्ट्स भी यह मानते हैं कि ठंडी हवाएं और गिरता तापमान हार्ट अटैक के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। साल 2024 में अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के प्रमुख जर्नल जेएसीसी में प्रकाशित एक स्टडी में यह पता चला कि ठंड लगने के तुरंत बाद नहीं, बल्कि 2 से 6 दिन बाद हार्ट अटैक का खतरा सबसे ज्यादा (Peak) होता है। 

    इतना ही नहीं य क्रिसमस और न्यू ईयर के आसपास भी दुनिया भर में दिल से जुड़े मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। ऐसे इसलिए क्योंकि इस दौरान अक्सर लोगों का खानपान और लाइफस्टाइल काफी ज्यादा गड़बड़ हो जाता है। शराब और अनहेल्दी खाना हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा देता है।

    heart attack prevention

    (Picture Credit- AI Generated)

    सर्दियों में क्यों बढ़ता हार्ट अटैक का खतरा?

    सर्दियों में कई वजहों से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसके कुछ प्रमुख कारण निम्न हैं- 

    • ठंड में हमारा शरीर खुद को गर्म रखने की कोशिश करता है। इस पूरे प्रोसेस में शरीर में मौजूद ब्लड वेसल्स और नसें सिकुड़ने लगती हैं। इससे दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो सकती है।
    • सर्दियों में अक्सर आलस और सुस्ती की वजह से लोगों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है। इसके अलावा इस मौसम में लोग अक्सर गाजर का हलवा, पराठे और पकौड़े जैसे फूड्स ज्यादा खाते हैं और एक्सरसाइज न के बराबर करते हैं, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, वजन बढ़ता है और नसों में बैड कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है।
    • सर्दियों में अक्सर खून का थक्का जमने की आशंका बढ़ जाता है। दरअसल, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण खून में थक्का जम सकता है। अगर यह थक्का दिल की किसी नस में फंस जाए, तो ब्लॉकेज हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक आ सकता है।
    • सर्दी के दिनों में अक्सर पसीना भी कम आता है और हम पानी भी कम मात्रा में पीने लगते हैं। ऐसे में शरीर में फ्लूइड या प्लाज्मा की मात्रा बढ़ सकती है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ाकर दिल पर एक्स्ट्रा बोझ डालती है।

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    Disclaimer: लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो, तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।