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    क्यों 'गट' को कहा जाता है शरीर का 'दूसरा दिमाग'? डॉक्टर ने समझाया कैसे हाजमा तय करता है आपका मूड

    Updated: Tue, 13 Jan 2026 02:47 PM (IST)

    क्या आपको कभी परीक्षा से पहले पेट में अजीब-सी हलचल या 'बटरफ्लाइज' महसूस हुई हैं या शायद घबराहट के समय अचानक पेट में दर्द हुआ हो? अगर हां, तो यह महज सं ...और पढ़ें

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    क्यों 'गट' के पास होता है मेंटल हेल्थ का असली रिमोट कंट्रोल? (Image Source: Freepik) 

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम अक्सर सुनते हैं कि "जैसा अन्न, वैसा मन", लेकिन विज्ञान इसे गट-ब्रेन एक्सिस (Gut-Brain Axis) के नाम से जानता है। यह हमारे दिमाग और पाचन तंत्र के बीच चलने वाली एक 'टू-वे' संचार प्रणाली है। इसका मतलब है कि न केवल हमारा दिमाग पेट को संकेत भेजता है, बल्कि हमारा पेट भी दिमाग को वापस संकेत भेजता है।

    डॉ. पीयूष गुप्ता सीनियर कंसल्टेंट (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी - मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग) का कहना है कि ये दोनों आपस में वेगस नर्व, हार्मोन, इम्यून सिस्टम के संकेतों और आंतों में मौजूद बैक्टीरिया के जरिए जुड़े होते हैं।

    The Gut Brain Axis

    (Image Source: Freepik) 

    गट हेल्थ को कहा जाता है 'दूसरा दिमाग'

    क्या आप जानते हैं कि हमारे 'गट' को दूसरा दिमाग क्यों कहा जाता है? ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारी आंतों में 10 करोड़ से ज्यादा नर्व सेल्स होते हैं, जो रीढ़ की हड्डी से भी ज्यादा हैं।

    एक हेल्दी गट ही एक स्वस्थ दिमाग का आधार है। हमारे शरीर का लगभग 90% सेरोटोनिन (जिसे 'फील-गुड' हार्मोन कहा जाता है) हमारे पेट में ही बनता है। इसके अलावा, पेट डोपामाइन और गाबा जैसे रसायनों को नियंत्रित करने में भी मदद करता है, जो हमें मोटिवेट और शांत रखने के लिए जिम्मेदार हैं।

    बैक्टीरिया जो तय करते हैं हमारा मूड

    हमारी आंतों के अंदर खरबों बैक्टीरिया रहते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहा जाता है।

    • गुड बैक्टीरिया: ये भोजन को पचाने, सूजन को कम करने, विटामिन बनाने और दिमाग को सकारात्मक संकेत भेजने का काम करते हैं।
    • असंतुलन के खतरे: अगर पेट में बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाए, तो इसका सीधा संबंध एंग्जायटी (घबराहट), डिप्रेशन, तनाव, 'ब्रेन फॉग' और नींद की समस्याओं से जुड़ सकता है।

    How digestion affects your mood

    (Image Source: Freepik) 

    तनाव और पेट का चक्र

    डॉक्टर का कहना है कि तनाव सिर्फ हमारे दिमाग को ही नहीं, बल्कि सीधे हमारे पेट को भी प्रभावित करता है। आपने अक्सर महसूस किया होगा:

    • परीक्षा से पहले पेट में अजीब हलचल
    • चिंता होने पर पेट दर्द
    • तनाव के दौरान भूख न लगना
    • कब्ज या डायरिया जैसी समस्याएं

    पुराना या लगातार रहने वाला तनाव पेट के बैक्टीरिया को बदल सकता है, सूजन बढ़ा सकता है और आंतों को कमजोर बना सकता है। जब पेट अस्वस्थ होता है, तो वह दिमाग को संकट के संकेत भेजता है, जिससे घबराहट और उदासी और बढ़ जाती है। यह तनाव और पेट की सेहत के बीच एक बुरा चक्र बना देता है।

    सेहत सुधारने के आसान उपाय

    अच्छी खबर यह है कि हम अपनी रोजमर्रा की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके अपनी गट और मेंटल हेल्थ, दोनों को बेहतर बना सकते हैं:

    • सही डाइट: फाइबर से भरपूर चीजें खाएं जैसे सब्जियां, फल और साबुत अनाज। अपनी डाइट में फर्मेंटेड फूड्स जैसे दही, केफिर और किमची शामिल करें। प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा चीनी से बचें।
    • लाइफस्टाइल में बदलाव: तनाव को कम करने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज और मेडिटेशन करें। पर्याप्त नींद लें और शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
    • माइंडफुल ईटिंग: खाना धीरे-धीरे खाएं और बहुत ज्यादा तनाव होने पर भोजन करने से बचें।

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