World AIDS Day 2025: बचाव ही है एड्स का सबसे बेहतर इलाज, पढ़ें इन्फेक्शन से बचने के कारगर तरीके
हर साल एक दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे मनाया जाता है। एड्स एक खतरनाक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की इम्युनिटी इतनी कम हो जाती है कि मामूली जुकाम से लड़ना भी काफी मुश्किल हो जाता है। इसलिए इससे बचाव (AIDS Prevention Tips) करना ही इसका सबसे बेहतर इलाज है। आइए जानें इससे बचाव के तरीके।

AIDS से बचाव के लिए क्या करें? (Picture Courtesy: Freepik)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। एड्स (AIDS) एक गंभीर बीमारी है, जो एचआईवी (HIV) के कारण होता है। यह वायरस व्यक्ति के इम्यून सिस्टम पर हमला करता है, जिससे शरीर मामूली इन्फेक्शन और बीमारियों से लड़ने की क्षमता खो देता है। इसलिए एड्स होने पर एक छोटा-सा इन्फेक्शन भी जानलेवा हो सकता है।
इसलिए इस खतरनाक बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए हर साल एक दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे (World AIDS Day) मनाया जाता है। आइए जानें कि एड्स कैसे फैल सकता है और इससे बचाव (AIDS Prevention) के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
एड्स कैसे फैलता है?
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के बॉडी फ्लूएड, जैसे- ब्लड, सीमन, वेजाइनल डिसचार्ज और ब्रेस्ट मिल्क के जरिए फैल सकता है। मुख्य रूप से यह इन तरीकों से फैलता है-
- अनप्रोटेक्टेड सेक्स- एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ बिना कंडोम के यौन संबंध बनाने से वायरस फैलने का खतरा रहता है।
- इन्फेक्टेड सीरिंज का इस्तेमाल- संक्रमित ब्लड से इन्फेक्टेड सुईयों, सीरिंज या अन्य इंजेक्शन उपकरणों के इस्तेमाल से एचआईवी फैल सकता है। यह मुख्य रूप से नशीली दवाओं के इंजेक्शन लगाने वाले लोगों में देखा जाता है।
- ब्लड ट्रांसफ्यूजन- एचआईवी संक्रमित ब्लड चढ़ाने से भी यह वायरस फैल सकता है। हालांकि, आधुनिक समय में खून की जांच व्यवस्था मजबूत होने के कारण इसका खतरा कम हो गया है।
- मां से शिशु को- गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान संक्रमित मां से उसके शिशु में एचआईवी फैल सकता है। सही देखभाल और दवाओं से इस जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।
एड्स से बचाव के तरीके
- प्रोटेक्टेड सेक्स- हर बार फिजिकल संबंध बनाते समय कंडोम का सही तरीके से इस्तेमाल करें। कंडोम एचआईवी सहित कई सेक्शुअल डिजीज से सुरक्षा देते हैं।
- नए इंजेक्शन का इस्तेमाल- इंजेक्शन लगाने के लिए हमेशा नई, बंद पैक की हुई सुई और सीरिंज का इस्तेमाल करें। कभी भी इंजेक्शन उपकरणों को शेयर न करें।
- खून की जांच- खून चढ़वाने से पहले सुनिश्चित करें कि ब्लड की एचआईवी जांच की गई है। भारत में अब रक्तदान के पहले खून की जांच अनिवार्य है।
- गर्भावस्था में सावधानी- एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। दवाओं और सही देखभाल से मां से शिशु में संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सकता है।
- नियमित जांच- अगर आपको एचआईवी संक्रमण का कोई भी रिस्क लगता है, तो नियमित रूप से एचआईवी जांच करवाएं। तुरंत पहचान और इलाज से बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
- जागरूकता फैलाएं- एड्स के प्रसार और बचाव के बारे में लोगों को शिक्षित करें। मिथकों को दूर करने में मदद करें।

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