Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    सेहत, पैसा, रिश्ते... हर जगह है FOFO का साया, चेक करें- कहीं आप भी तो नहीं इसके शिकार?

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 01:26 PM (IST)

    क्या आपने कभी सोचा है कि जब आपके सामने कोई जरूरी जानकारी आने वाली होती है, तो अचानक आपके मन में घबराहट क्यों होने लगती है? जैसे, मान लीजिए आपने कुछ हेल्थ टेस्ट करवाए हैं और अब आपको रिपोर्ट देखने में डर लग रहा है। यही FOFO है- यानी Fear of Finding Out (जानने का डर)। आइए, इस आर्टिकल में विस्तार से समझते हैं कि यह मेंटल कंडीशन आपके लिए कैसे परेशानी का सबब बन सकती है।

    Hero Image

    FOFO: डर का वो जाल जो आपको सच जानने से रोकता है (Image Source: Freepik)

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम में से कई लोग ऐसी सच्चाई को जानने से डरते या बचते हैं, जो शायद हमारी जिंदगी के लिए जरूरी भी हो सकती है। जी हां, इस डर को मनोविज्ञान में FOFO यानी Fear Of Finding Out कहा जाता है। यानी ऐसी स्थिति जब इंसान किसी हकीकत का सामना करने के बजाय उससे बचना ज्यादा आसान समझता है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    चाहे वह हेल्थ चेकअप हो, किसी रिश्ते की सच्चाई, करियर की स्थिति या अपनी फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स- हम अक्सर “पता न चले तो बेहतर” वाली सोच में फंस जाते हैं। आइए, आपको समझाते हैं कि यह सोच हमारे लिए कैसे खतरनाक साबित हो सकती है।

    What is FOFO

    FOFO क्या है?

    FOFO का मतलब है- सच्चाई का पता चलने का डर। यह वह मानसिक स्थिति है जहां व्यक्ति किसी जानकारी को जानने से इसलिए बचता है, क्योंकि उसे डर होता है कि सच्चाई उसे परेशान कर देगी, उसकी जिंदगी बदल देगी या उसके फैसलों को चुनौती देगी। यह डर कई बार इतना गहरा हो जाता है कि इंसान जरूरी कदम उठाने में भी पीछे हट जाता है।

    हम FOFO के जाल में क्यों फंस जाते हैं?

    FOFO के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

    नेगेटिव रिजल्ट्स का डर

    कई लोग सोचते हैं- “अगर रिपोर्ट खराब निकली तो?”
    इस डर में वे चेकअप ही नहीं कराते।

    भावनात्मक परेशानी का डर

    कुछ सच इतने भारी होते हैं कि हम उन्हें झेलने के लिए खुद को तैयार नहीं समझते।

    बदलाव का डर

    अगर सच्चाई सामने आ गई, तो शायद हमें कुछ बदलना पड़े- और यही बदलाव लोगों को डराता है।

    अनिश्चितता में आराम महसूस करना

    कई लोग “पता न चले तो ठीक” वाली भावना में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।

    FOFO के उदाहरण, जिन्हें हम रोज महसूस करते हैं

    • हेल्थ टेस्ट टाल देना
    • बैंक बैलेंस न देखना
    • रिश्तों में समस्याओं को नजरअंदाज करना
    • कॉलेज/जॉब रिजल्ट चेक करने से बचना
    • ऑफिस में फीडबैक लेने से डरना

    ये छोटी-छोटी बातें लग सकती हैं, लेकिन यही FOFO का सबसे आम रूप हैं।

    Fear of Finding Out

    क्या FOFO खतरनाक हो सकता है?

    FOFO शुरुआत में मामूली लगता है, लेकिन लंबे समय में यह व्यक्ति की जिंदगी को प्रभावित कर सकता है।

    • हेल्थ चेकअप टालना सेहत बिगाड़ सकता है।
    • फाइनेंशियल समस्याओं को नजरअंदाज करना कर्ज बढ़ा सकता है।
    • रिश्तों की सच्चाई से बचना दूरियां बढ़ा सकता है।
    • करियर में खुद को जज न करना ग्रोथ रोक सकता है।

    FOFO का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह आपको सच जानने और उससे सीखने के मौके से दूर कर देता है।

    FOFO से कैसे निकलें बाहर?

    अच्छी बात यह है कि FOFO को समझकर उससे बाहर निकला जा सकता है।

    पहले डर को पहचानें

    सवाल पूछें- “मैं इससे क्यों बच रहा हूं?”

    सच्चाई को मौके की तरह देखें

    हर जानकारी आपकी जिंदगी बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

    छोटे कदमों से शुरुआत करें

    जैसे- एक छोटा मेडिकल टेस्ट, एक फाइनेंशियल चेक या किसी अपने से ईमानदार बातचीत।

    भरोसेमंद लोगों से बात करें

    कई बार डर बांटने से आधा हल हो जाता है।

    जरूरत हो तो पेशेवर मदद लें

    काउंसलर या थैरेपिस्ट आपको गाइडेंस दे सकते हैं।

    सच्चाई से बचना आसान है, लेकिन यह सिर्फ चंद पलों की राहत देता है। असली राहत तभी मिलती है जब आप हिम्मत करके असलियत का सामना करते हैं। याद रखें, सच जान लेने से आप कमजोर नहीं होते, बल्कि सच से बचने की कोशिश आपको कमजोर बना देती है।

    यह भी पढ़ें- क्या है Girlhood Fomo, 30 की उम्र के बाद महिलाओं में देता है अकेलेपन की आहट, ऐसे निकलें इससे बाहर

    यह भी पढ़ें- क्या है Cinderella Complex Syndrome, जब सपनों के राजकुमार का इंतजार बन जाता है जिंदगी की सबसे बड़ी बेड़ी