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    क्या आपका बच्चा भी छिपाने लगा है बातें? समझिए यह किस परेशानी का हो सकता है संकेत

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 08:17 AM (IST)

    जैसे ही आप कमरे में दाखिल होते हैं, क्या आपका बच्चा हड़बड़ाकर अपना फोन छिपा लेता है या फिर स्कूल से आने के बाद आपके हर सवाल का जवाब सिर्फ 'हूं', 'हां' य ...और पढ़ें

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    आपके बच्चे को भी लग गई है झूठ बोलने की आदत? (Image Source: AI-Generated) 

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको वो दिन याद हैं जब आपका बच्चा स्कूल से आते ही बड़बड़ाना शुरू कर देता था? उसकी छोटी-छोटी बातें, दोस्तों की शिकायतें और टीचर की बातें कभी खत्म ही नहीं होती थीं, लेकिन अचानक, अब घर में एक अजीब-सी खामोशी है। अगर आपका बच्चा अब आपसे नजरें चुराने लगा है या बातें गोल-मोल घुमाने लगा है, तो इसे सिर्फ 'बड़े होने का बदलाव' मानकर नजरअंदाज न करें।

    Child psychology lying and hiding

    (Image Source: AI-Generated) 

    सबसे बड़ी वजह है डर

    बच्चे अक्सर बातें इसलिए छिपाते हैं क्योंकि उन्हें आपके 'रिएक्शन' का डर होता है। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने सच बताया, तो आप गुस्सा करेंगे, डांटेंगे या उनका फोन छीन लेंगे। जब बच्चे को भरोसा नहीं होता कि आप उनकी बात समझेंगे, तो वे झूठ का सहारा लेना या चुप रहना शुरू कर देते हैं।

    स्कूल या दोस्तों के बीच कोई परेशानी?

    अगर बच्चा अचानक से गुमसुम हो गया है, तो हो सकता है कि वह स्कूल में 'बुलिंग' का शिकार हो रहा हो। कई बार बच्चे शर्मिंदगी के कारण अपने माता-पिता को यह नहीं बता पाते कि कोई उन्हें परेशान कर रहा है। वे अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं और इसका असर उनके स्वभाव और पढ़ाई पर पड़ने लगता है।

    डिजिटल दुनिया का खतरा

    आजकल बच्चों के हाथ में मोबाइल है और इंटरनेट पर क्या हो रहा है, यह हमेशा पता लगा पाना मुश्किल है। हो सकता है आपका बच्चा ऑनलाइन किसी मुसीबत में फंस गया हो, किसी अजनबी से बात कर रहा हो या उसने कोई ऐसी गलती कर दी हो जिसे बताने में उसे डर लग रहा हो। जैसे ही आप कमरे में आते हैं, अगर वह फोन छिपा लेता है या स्क्रीन बंद कर देता है, तो यह एक खतरे की घंटी है।

    माता-पिता को क्या करना चाहिए?

    जासूस बनने के बजाय दोस्त बनें। बच्चे के कमरे की तलाशी लेने या उस पर चिल्लाने से दूरियां और बढ़ेंगी। सबसे पहले उसे यह एहसास दिलाएं कि चाहे कुछ भी हो जाए, आप उसके साथ हैं।

    उससे कहें, "बेटा, अगर तुमने कोई गलती भी की है, तो हम मिलकर उसे ठीक करेंगे। मुझे तुम पर गुस्सा नहीं आएगा, बस सच बताओ।"

    बच्चे से बात करने का समय निकालें, लेकिन पूछताछ के अंदाज में नहीं। जब बच्चा यह महसूस करेगा कि उसका घर उसके लिए सबसे सेफ स्पेस है, तो वह अपने दिल के दरवाजे खुद-ब-खुद खोल देगा। याद रखें, एक छोटी-सी बात छिपाना भविष्य की किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है, इसलिए आज ही पहल करें।

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