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    Siyaram Baba: खरगोन में संत सियाराम बाबा का निधन, 10 दिनों से थे बीमार; शाम 4 बजे होगा अंतिम संस्कार

    नर्मदा तट स्थित भट्टयान बुजुर्ग में संत सियाराम बाबा का 95 साल की उम्र में निधन हो गया वो पिछले कुछ दिनों से बीमार भी चल रहे थे। बुधवार मोक्षदा एकादशी पर सुबह 6.10 मिनट पर उनका प्रभुमिलन हो गया है। आज गीता जयंती भी है। उनका अंतिम संस्कार शाम 4 बजे आश्रम के पास किया जाएगा। बाबा पिछले 10 दिन से बीमार थे।

    By Jagran News Edited By: Shubhrangi Goyal Updated: Wed, 11 Dec 2024 09:50 AM (IST)
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    खरगोन में संत सियाराम बाबा का निधन (फोटो-जागरण)

    जागरण न्यूज नेटवर्क, खरगोन। नर्मदा तट स्थित भट्टयान बुजुर्ग में संत सियाराम बाबा का 95 साल की उम्र में निधन हो गया, वो पिछले कुछ दिनों से बीमार भी चल रहे थे। बुधवार मोक्षदा एकादशी पर सुबह 6.10 मिनट पर उनका प्रभुमिलन हो गया है। आज गीता जयंती भी है। उनका अंतिम संस्कार शाम 4 बजे आश्रम के पास किया जाएगा।

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    बाबा पिछले 10 दिन से बीमार थे। इंदौर के डॉक्टरों ने इलाज किया था। मूलतः गुजरात के बाबा यहां कई सालों से नर्मदा भक्ति कर रहे थे। बाबा का जन्म 1933 में गुजरात के भावनगर में हुआ था। 17 साल की उम्र में उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का फैसला किया था।

    बाबा ने पेड़ के नीचे बैठकर की तपस्या

    बाबा ने कई सालों तक गुरु के साथ पढ़ाई की और तीर्थ भ्रमण किया। वे 1962 में भट्याण आए थे। यहां उन्होंने एक पेड़ के नीचे मौन रहकर कठोर तपस्या की। वहीं आश्रम पर मौजूद अन्य सेवादारों ने बताया कि उनकी दिनचर्या भगवान राम व मां नर्मदा की भक्ति से शुरू होकर यही खत्म होती थी।

    श्रद्धालुओं को अपने हाथ से बनाकर देते थे चाय

    बाबा प्रतिदिन रामायण पाठ का पाठ करते और आश्रम पर आने वाले श्रद्धालुओं को स्वयं के हाथों से बनी चाय प्रसादी के रूप में वितरित करते थे।

    समीपस्थ ग्राम सामेड़ा के रामेश्वर सिसोदिया ने बताया कि बाबा की वर्तमान आयु लगभग 95 वर्ष है। बाबा के लिए गांव से पांच छह घरों से भोजन का टिफिन आता था, जिसे बाबा एक पात्र में मिलाकर लेते थे। खुद की जरूरत के अनुसार भोजन निकाल कर बचा भोजन पशु-पक्षियों में वितरित कर देते थे।

    मंदिर में दान किए करोड़ों रुपए

    बाबा प्रत्येक श्रद्धालु से मात्र 10 रुपये दान स्वरूप लेते थे। बाबा ने आश्रम के प्रभावित डूब क्षेत्र हिस्से के मिले मुआवजे के दो करोड़ 58 लाख रुपये क्षेत्र के प्रसिद्ध तीर्थ स्थान नागलवाड़ी मंदिर में दान किए थे। वही लगभग 20 लाख रुपये व चांदी का छत्र जाम घाट स्थित पार्वती माता मंदिर में दान किया