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    रुडयार्ड किपलिंग: अंग्रेजी साहित्य के पहले नोबेल विजेता व जंगल बुक के लेखक की अनोखी कहानी

    Updated: Wed, 31 Dec 2025 12:55 PM (IST)

    रुडयार्ड किपलिंग ब्रिटिश शासन के दौरान एक प्रसिद्ध लेखक एवं कवि के रूप में प्रसिद्ध थे। उनका जन्म 30 जनवरी 1865 को हुआ था। किपलिंग का अंग्रेजी साहित्य ...और पढ़ें

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    Rudyard Kipling

    एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। रुडयार्ड किपलिंग को अंग्रेजी शासन के दौरान एक प्रसिद्ध लेखक और कवि के रूप में जाना जाता है। वे एक ऐसे लेखक थे जिनके बिना अंग्रेजी साहित्य का इतिहास अधूरा है। किवदंती है कि अगर इतिहास को कहानियों के रूप म पढ़ा जाए तो उसमें रुडयार्ड किपलिंग को भुलाया नहीं जा सकता है।

    रुडयार्ड किपलिंग के जीवन से जुड़े प्रमुख तथ्य

    नाम को देख के सभी को पहला आभास होता है कि वे एक अंग्रेजी लेखक हैं। लेकिन, रुडयार्ड किपलिंग का भारत से नाता है। उनका जन्म 30 दिसंबर 1865 को मुंबई में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन मालाबार हिल में बीता| उनके पिता का नाम जॉन लॉकवुड था जो आर्ट स्कूल में प्रिंसिपल होने के साथ ही मूर्तिकार भी थे।

    झील से पड़ा था रुडयार्ड नाम

    रुडयार्ड के नाम के पीछे भी एक अनोखी कहानी है। किपलिंग के माता पिता जॉन लॉकवुड और एलिस की मुलाकात 1863 में स्टैफोर्डशायर की रुडयार्ड झील पर हुई थी। झील की सुंदरता से प्रभावित होकर उन्होंने अपने पहले बच्चे का नाम रुडयार्ड रखा। रुडयार्ड का पूरा नाम जोसेफ रुडयार्ड किपलिंग था। रुडयार्ड का निधन 18 जनवरी 1936 को हुआ था।

    कहानियों सुनाने का था बचपन से ही शौक

    रुडयार्ड किपलिंग को बचपन से ही कहानियां सुनाने का शौक था। उनके इस हुनर को परिवार का साथ भी मिला। 5 वर्ष की उम्र में ही उन्हें क्रूर बोर्डिंग हाउस में पढ़ाई के लिए भेजा गया। किपलिंग ने यूनाइटेड सर्विसेज कॉलेज में पढ़ाई की, जहां उनका झुकाव साहित्य और लेखन की ओर बढ़ा। 16 साल की उम्र में भारत लौटकर उन्होंने पत्रकारिता शुरू की। उनके पास कोई फॉर्मल डिग्री नहीं थी, लेकिन लाहौर में जर्नलिज्म से करियर को स्टार्ट किया।

    अंग्रेजी साहित्य में पहले नोबेल जीतने वाले व्यक्ति बने

    कहानियों में दिलचस्पी रखने वाले रुडयार्ड किपलिंग ने द जंगल बुक और द सेकंड जंगल जैसी प्रसिद्ध बुक लिखीं। उन्होंने भारतीय जीवन और संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें 1907 में अंग्रेजी साहित्य के पहले नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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