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    60 दिन में रशियन सीखी, 43 प्रयोग और हवा पर योग.. कौन है 'क्या अंतरिक्ष में दिखे थे भगवान' का जवाब देने वाले 'स्पेस हीरो'?

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 06:46 PM (IST)

    राकेश शर्मा भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री है। उन्होंने अंतरिक्ष में सात दिन, 21 घंटे और कुल 40 मिनट के अंदर कई वैज्ञानिक प्रयोग किए थे। इसके बाद उन्हों ...और पढ़ें

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    अंतरिक्ष में योग पर किया था प्रयोग।

    एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप अंतरिक्ष में कदम रखने वाले उस भारतीय अंतरिक्ष यात्री का नाम जानते हैं, जिसने न केवल पहली बार अंतरिक्ष में कदम रखा, बल्कि अंतरिक्ष में जीरो ग्रैविटी में योगाभ्यास करके दुनिया को यह दिखा दिया कि अंतरिक्ष में प्रयोग करने के साथ ही योग करना भी मुमकिन है। जी हां हम बात कर रहे हैं, भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा की। वह अंतरिक्ष में जाने वाले 128वें इंसान थे। राकेश शर्मा का जन्म 13 जनवरी, 1949 को हुआ था और वह इस साल 77 वर्ष के हो गए हैं। ऐसे में आइये जानते हैं उनके जीवन और अंतरिक्ष यात्रा से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में।

    3 अप्रैल को लांघी थी अंतरिक्ष की दहलीज

    3 अप्रैल, 1984 भारत के लिए एक ऐसा दिन था। जब पहली बार किसी भारतीय ने अंतरिक्ष की दहलीज लांघी थी। यह महज एक दिन नहीं, बल्कि करोड़ों भारतवासी के लिए एक ऐसा लम्हा था। जब वह पहली बार किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री को स्पेस पर जाते हुए देख रहे थे। आपको बता दें, राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में कुल 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट का समय बिताया था। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष पर कई महत्वपूर्ण प्रयोग भी किए थे। साथ ही यह भी अनुभव किया कि स्पेस स्टेशन की ऑर्बिट के कारण हर 90 मिनट में सूर्योदय और सूर्यास्त होता है। 

    राकेश शर्मा की अंतरिक्ष यात्रा के मुख्य बिंदु

    • 1982: भारत-सोवियत संयुक्त मिशन की घोषणा।
    • 1982: स्टार सिटी, मॉस्को के पास प्रशिक्षण शुरू।
    • 1984: बैकोनूर कोस्मोड्रोम (कजाकिस्तान) में सोयुज टी-11 यान तैयार।
    • 5 अप्रैल, 1984: इंदिरा गांधी से बातचीत।
    • 11 अप्रैल 1984: कजाकिस्तान के जुझी तुडर मैदान में सुरक्षित लैंडिंग
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    शुरुआती जीवन

    राकेश शर्मा का जन्म 13 जनवरी, 1949 को पंजाब के पटियाला में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा हैदराबाद से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने जुलाई 1966 में नेशनल डिफेंस एकेडमी में बतौर एयर फोर्स कैडेट के रूप में प्रवेश लिया। राकेश शर्मा साल 1970 में भारतीय वायु सेना में बतौर पायलट के रूप में नियुक्त किए गए। उन्होंने साल 1971 के युद्ध में मिग-21 को उड़ाया और खतरनाक मिशनों को अंजाम दिया।

    अंतरिक्ष में जाने की ली ट्रेनिंग

    राकेश शर्मा अपने स्कूल के दिनों से ही यूरी गागरिन की अंतरिक्ष यात्रा से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। गागरिन से प्रभावित होकर उन्होंने एनडीए में शामिल होने का निश्चय किया और एनडीए में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। अंतरिक्ष यात्री बनना उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। इसके लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की और उन्हें साल 1982 में सोवियत इंटर कॉस्मॉस प्रोग्राम के तहत अंतरिक्ष यात्री के रूप में चयनित किया गया।

    अग्निपरीक्षा से कम नहीं था प्रशिक्षण

    राकेश शर्मा का असली संघर्ष तब शुरू हुआ। जब उन्हें यूरी गागरिन सेंटर में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। उन्होंने दो महीने के अंदर रूसी भाषा सीखी और अंतरिक्ष में जाने के लिए कुल 43 प्रयोग किए, जिसमें योग के प्रभाव और भारत की फोटोग्राफी भी शामिल थी।

    अंतरिक्ष में कई वैज्ञानिक प्रयोग किए

    राकेश शर्मा ने कठिन प्रशिक्षण के बाद सोयुज टी-11 यान से अंतरिक्ष के लिए अन्य यात्रियों के साथ उड़ान भरी थी। राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में जाकर कुल 43 वैज्ञानिक प्रयोग किए थे। आपको बता दें, इनमें से अधिकर प्रयोग बायो-मेडिसिन और मानव शरीर पर आधारित थे। इन प्रयोग में योग से जुड़ी एक्सरसाइज भी शामिल थी।

    स्पेश से की थी पीएम से बात

    इस मिशन के दौरान भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा से स्पेस से संबंधित कई रोचक सवाल पूछे थे। दरअसल जब राकेश शर्मा स्पेस पर वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे थे। तब टेलीवीजन में हुई बातचीत के दौरान इंदिरा गांधी ने पूछा स्पेस से भारत कैसे दिखाई देता है। तभी राकेश शर्मा ने बड़े ही गर्व के साथ कहा 'सारे जहां से अच्छा'

    लोगों ने पूछे रोचक सवाल

    राकेश शर्मा जब अंतरिक्ष से अपना मिशन सफलापूर्वक पूरा करके आएं। तब लोगों ने उनसे पूछा क्या अंतरिक्ष पर भगवान दिखाई देते हैं। हालांकि उन्होंने इससे इंकार कर दिया। लेकिन उन्होंने बताया की अंतरिक्ष से पृथ्वी देखने पर किसी भी तरह की सीमा, बॉर्डर या देश नजर नहीं आते हैं। ऊपर से पूरी धरती एक जैसी यानी एक घर की तरह दिखाई देती है।

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