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    गोंदिया में बड़ा आत्मसमर्पण: 11 कुख्यात नक्सलियों ने हथियार डालकर किया सरेंडर, 25 लाख का इनामी अनंत भी शामिल

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 11:30 PM (IST)

    मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ (एमएमसी कॉरिडोर) में माओवादियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। शुक्रवार को 11 सक्रिय माओवादियों ने महाराष्ट्र के गोंदिया में समर्पण कर दिया।

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    11 कुख्यात नक्सलियों ने हथियार डालकर किया सरेंडर (सांकेतिक तस्वीर)

    जेएनएन, जगदलपुर। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ (एमएमसी कारिडोर) में माओवादियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। शुक्रवार को 11 सक्रिय माओवादियों ने महाराष्ट्र के गोंदिया में समर्पण कर दिया।

    इनमें संगठन का प्रवक्ता और स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य अनंत उर्फ विकास नागपुरे शामिल है, जिस पर 25 लाख रुपये का इनाम था। अन्य माओवादियों में आठ-आठ लाख के इनामी डिविजनल कमेटी (डीवीसी) सदस्य नागसु उर्फ गोलू और रानो उर्फ रम्मो भी शामिल हैं।

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    इन सभी माओवादियों पर लगभग 89 लाख रुपये का इनाम था। अनंत लंबे समय से एमएमसी जोन में सक्रिय रहा है। वह अंग्रेजी और कंप्यूटर संचालन में निपुण है और कई छद्म नामों से संगठन का संचालन करता रहा है।

    अनंत और रानो पति-पत्नी बताए जाते हैं। कुछ दिन पहले अनंत ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर 1 जनवरी 2026 को सामूहिक आत्मसमर्पण की इच्छा जताई थी, जिसमें उसने सुरक्षा बलों से अस्थायी रूप से अभियान रोकने की शर्त रखी थी।

    आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने एके-47, सेल्फ लोडिंग राइफल (एसएलआर), इंसास और भारी मात्रा में विस्फोटक भी सौंपे। उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में शीर्ष माओवादियों बसव राजू और हिड़मा के मारे जाने के बाद संगठन की स्थिति कमजोर होती जा रही है। पिछले 10 दिनों में छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 171 माओवादी हथियार छोड़ चुके हैं।

    आत्मसमर्पण कर कहा- जनता अब हथियारबंद संघर्ष को स्वीकार नहीं कर रही

    अनंत का जन्म एक माओवादी परिवार में हुआ था। उसके माता-पिता आंध्रप्रदेश के पुराने माओवादी थे। उसे सरकारी स्कूलों में पढ़ाया गया और बाद में संगठन ने उसे मुंबई भेजा। 1999 से 2002 तक उसने वहां आ‌र्ट्स में स्नातक किया।

    नागपुर में छात्र संगठनों के माध्यम से अनंत ने युवाओं को प्रभावित किया और माओवादी विचारधारा का विस्तार किया। आत्मसमर्पण करते हुए उसने कहा कि जनता अब हथियारबंद संघर्ष को स्वीकार नहीं कर रही है। हथियार केवल साधन हैं, साध्य नहीं।