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    'पांच सालों में सभी गांवों में होंगी सहकारी संस्थाएं', अमित शाह का राज्यों से आग्रह; कहा- प्राकृतिक खेती को दें बढ़ावा

    Updated: Mon, 30 Jun 2025 11:42 PM (IST)

    केंद्र सरकार ने सहकारिता के माध्यम से समृद्धि लाने के लिए अगले पाँच वर्षों में देश के सभी गांवों में सहकारी संस्थाएँ खोलने का लक्ष्य रखा है। अमित शाह ने राज्यों के सहकारिता मंत्रियों के साथ मंथन बैठक में राष्ट्रीय सहकारिता नीति जल्द बनाने की घोषणा की। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और सहकारी प्रशिक्षण संस्थानों को त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी से जोड़ने का आग्रह किया।

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    पांच वर्षों में हर गांव में होगी सहकारी संस्था: अमित शाह। (फाइल फोटो)

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सहकारिता के जरिए समृद्धि के प्रयासों के तहत केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों के दौरान देश के सभी गांवों में सहकारी संस्थाएं खोलने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता अमित शाह ने सोमवार को दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के मौके पर राज्यों के सहकारिता मंत्रियों के साथ ''मंथन बैठक'' की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय सहकारिता नीति जल्द बनाने की घोषणा की।

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    इसके तहत राज्यों की नीति उनकी जरूरत के अनुसार बनाई जाएगी। उन्होंने राज्यों के सहकारिता मंत्रियों को कृषि मंत्रियों के साथ मिलकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया, ताकि जनस्वास्थ्य और धरती दोनों का हित हो। यह भी कहा कि प्रत्येक राज्य का कम से कम एक सहकारी प्रशिक्षण संस्थान त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी से जुड़े और राज्य के सहकारी प्रशिक्षण की समग्र व्यवस्था का नेतृत्व करे।

    जानिए क्या था बैठक का उद्देश्य

    बैठक का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए चल रही योजनाओं की समीक्षा, उपलब्धियों का आकलन और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक गतिशील मंच प्रदान करना है। अमित शाह ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के फरवरी तक दो लाख नए पैक्स बनाने के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया जाए। करोड़ों लोग जीवन को बेहतर बनाने के लिए उद्यम करना चाहते हैं, मगर पूंजी नहीं है। सहकारिता से यह संभव है, क्योंकि इसमें अपार संभावनाएं हैं।

    राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस बनाना सबसे अहम

    सरकार की 60 पहलों में राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस बनाना सबसे अहम है। इसके सहारे पता चल जाएगा कि किस राज्य के किस गांव में सहकारी संस्था नहीं है। सरकार का लक्ष्य पांच वर्षों में देश के सभी गांवों में कम से कम एक सहकारी संस्था खोलने का है। सहकारी डेटाबेस के जरिए यह आसान हो सकेगा।

    जल्द ही सहकारिता नीति की घोषणा होगी

    अमित शाह ने कहा कि सहकारिता में सारी भर्तियां पहले भाई-भतीजावाद से होती थीं और इसीलिए त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी का विचार किया गया। जल्द ही सहकारिता नीति की घोषणा होगी, जो 2045 तक अमल में रहेगी। इसके तहत ही हर राज्य की सहकारिता नीति वहां की स्थिति के अनुरूप बने और इसके लक्ष्य भी निर्धारित हों। तभी आजादी की शताब्दी तक हम एक आदर्श को-ऑपरेटिव स्टेट बन सकेंगे। सहकारिता में अनुशासन, नवाचार और पारदर्शिता लाने का काम इसी मॉडल एक्ट से होगा।

    बैठक में मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित किया गया

    उन्होंने क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी एवं अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों के संचालन में अधिक पारदर्शिता लाने की जरूरत पर बल दिया। बैठक में सहकारिता मंत्रालय द्वारा की गई पहल के व्यापक मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिससे राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं, नीति सुझावों और कार्यान्वयन रणनीतियों के सार्थक आदान-प्रदान की सुविधा मिल सके।

    देशभर में बनाए जा रहे दो लाख पैक्सों की प्रगति, ग्रामीण सेवा वितरण को बढ़ाने के लिए डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों की कार्ययोजना शामिल है। दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के कार्यान्वयन पर भी विस्तृत चर्चा हुई। टिकाऊ डेयरी अर्थव्यवस्था बनाने के उद्देश्य से श्वेत क्रांति 2.0 पर विमर्श किया गया। आत्मनिर्भर भारत के तहत दालों और मक्का के लिए समर्थन मूल्य पर खरीद से संबंधित नीतिगत मामलों पर भी प्रमुखता से चर्चा हुई।