आपके घर में खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बने कीमती धातुओं की नई खान
-1768398756538.webp)
सोने की बढ़ती कीमतों के बीच ई-कचरा कीमती धातुओं का नया स्रोत बन रहा है। खराब मोबाइल और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद अब 'शहरी सोने की खान' बन गए हैं...और पढ़ें
विवेक तिवारी जागरण न्यू मीडिया में एसोसिएट एडिटर हैं। लगभग दो दशक के करियर में इन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार् ...और जानिए
ई-कचरा बना सोने की नई 'शहरी खान', कीमतें बढ़ीं।
एक टन ई-कचरे में अयस्क से अधिक सोना।
रीसाइक्लिंग से पर्यावरण को लाभ, प्रदूषण कम होता है।
नई दिल्ली, जागरण प्राइम । दुनिया भर में सोने की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिख रहा है और सोने की औसत कीमत करीब 1.32 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुकी है। कीमतों में इस उछाल के साथ ही सोने की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर भी बढ़ता जा रहा है। खदानों से सोना निकालने और उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया लंबी और खर्चीली होती है। ऐसे में सोने की सप्लाई बढ़ाने का एक अहम और तेजी से उभरता स्रोत हमारे घरों में पड़े खराब मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनते जा रहे हैं। कीमती धातुओं की बढ़ती मांग और कीमतों के चलते ई-कचरे का आर्थिक महत्व भी तेजी से बढ़ा है। कई अध्ययनों के मुताबिक, दुनिया का केवल 20 फीसदी ई-कचरा ही रिसाइकिल हो पाता है, जबकि एक टन ई-कचरे से खनन किए गए अयस्क की तुलना में 10 से 800 गुना तक अधिक सोना निकाला जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर में करीब 62 मिलियन टन ई-कचरा पैदा हुआ, जिसमें लगभग 91 अरब डॉलर मूल्य की कीमती धातुएं शामिल थीं और इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी सोने की थी।
स्क्रैप गोल्ड अब सोने की आपूर्ति का एक अहम स्रोत बन चुका है। वैश्विक मार्केट रिसर्च एवं और परामर्श फर्म वेरिफाइड मार्केट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल करीब 1,200 टन सोना पुरानी ज्वैलरी, इंडस्ट्रियल कचरे और ई-वेस्ट से निकाला जा रहा है। वैश्विक स्क्रैप गोल्ड खपत का लगभग 40 फीसदी इस्तेमाल भारत में होता है। चीन और अमेरिका भी ई-कचरे से सोने की माइनिंग के बड़े हब बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में सोने की वैश्विक मांग की आपूर्ती में सोने की खानों से माइनिंग की तुलना में ई कचरे से रीसाइक्लिंग की भूमिका तेजी से बढ़ंगी।
इलेक्टॉनिक कचरे की रीसाइकलिंग करने वाली कंपनी स्क्रैपकार्ट के संस्थापक विनीत रेलिया कहते हैं कि पिछले कुछ समय में पूरी दुनिया में कई धातुओं की कीमतों में काफी तेजी देखी गई है। इससे इन धातुओं की आपूर्ति के लिए ई कचरे की रीसाइकलिंग को भी बल मिला है। गौरतलब है कि किसी भी धातु के अयस्क से धातु को निकालने की तुलना में ई कचरे से उसे निकालना काफी सस्ता पड़ता है। उदाहरण के तौर पर अगर हम सिर्फ सोने की बात करें तो ई-कचरे में प्राकृतिक सोने के अयस्क से 10-100 गुना ज़्यादा सोना होता है। इससे ये 'शहरी सोने की खान' बन जाता है। आज के समय में दुनिया भर में सोने के कुल उत्पादन का 15 फीसदी से ज्यादा रीसाइकिल किए गए ई-कचरे से आता है। सिर्फ सोना ही नहीं कॉपर, सिल्वर और पेलेडियम जैसी धातुएं ही बड़े पैमाने पर ई कचरे से निकाली जाती हैं। धातुओं की बढ़ती कीमतों के चलते भारत में ई-कचरे की मांग काफी बढ़ गई है। आज एक टन कचरा खरीदने के लिए लगभग एक महीने पहले की तुलना में 10 से 20 फीसदी तक ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। ग्लोबल तौर पर ई-कचरे से निकाली जाने वाली कीमती धातुओं की रिकवरी का बाजार 2025 में लगभग 11 बिलियन डॉलर का था, ये हर साल लगभग 6.8 फीसदी के CAGR की दर से बढ़ रहा है। भारत हर साल 3.8 मिलियन टन ई-कचरा पैदा होता है। फिलहाल इसमें से सिर्फ 16 फीसदी ही औपचारिक रूप से रीसायकल किया जा रहा है। भारत के ई-कचरे में कुल रिकवर की जा सकने वाली धातु का मूल्य सालाना लगभग 6 बिलियन डॉलर है।
स्क्रैप गोल्ड रीसाइक्लिंग का वैश्विक बाजार 2023 में 13.50 बिलियन डॉलर का था। 2031 तक इसके 14.73 बिलियन डॉलर तक हो जाने का अनुमान है। मार्केट रिसर्च एवं और परामर्श फर्म वेरिफाइड मार्केट रिसर्च के मुताबिक यह सेक्टर एआई-आधारित रिफाइनिंग तकनीक के विकास, ऑटोमेशन और केमिकल-मुक्त रीसाइकलिंग की तकनीकों के विकास के चलते तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे खनन पर निर्भरता कम हो रही है। जानकारों का मानना है कि सोने की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए अगर बेहतर कानून, तकनीक और जागरूकता को बढ़ावा दिया जाए तो बड़ी मात्रा में इस्तेमाल हुआ सोना रिसाइकिल कर वापस पाया जा सकता है।
दुनिया भर में सोने की रीसाइक्लिंग बढ़ी
पिछले एक दशक में पूरी दुनिया में स्क्रैप से सोना निकाले जाने के लिए ई कचरे की रीसाइक्लिंग बढ़ी है। इसमें हर साल लगभग 4 से 5 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। सोने की रीसाइक्लिंग प्रमुख रूप से इलेक्ट्रॉनिक कचरे, आभूषणों के स्क्रैप और औद्योगिक उत्पादन के बाद बचे कचरे से हो रही है। वहीं आधुनिक तकनीक ने सोने की रीसाइक्लिंग को आसान बनाया है। आज भी खदान से एक टन निकाले गए अयस्क से सोना निकालने की तुलना में एक टन ई कचरे से ज्यादा सोना निकाला जा सकता है। आधुनिक तकनीक ने इसे और सस्ता और सरल बनाया है। कई रिपोट्स में दावा किया गया है कि आज भी ई कचरे से सिर्फ 20 फीसदी सोना ही वापस पाया जा रहा है। ऐसे में बेहतर तकनीक के इस्तेमाल से इस मात्रा को और बढ़ाया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के मुताबिक दुनिया भर में वार्षिक तौर पर कुल निकालेन जाने वाले सोने का लगभग 7 फीसदी हिस्सा ई-कचरे में मौजूद है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि लोग हर साल कितना सोना कचरे के तौर पर फेंक देते हैं।
अमेरिका सबसे ज्यादा ई कचरा पैदा करता है
अलग अलग देशों में लोगों की मांग और उपभोग की आदतों के चलते ई कचरा पैदा करने की दर भी अलग अलग है। पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा ई कचरा अमेरिका में पैदा होता है। 2022 में, अमेरिका ने इतना ई -कचरा निकला जिससे लगभग 13,किलोग्राम सोना निकाला जा सकता था। चीन और भारत भी भारी मात्रा में ई-कचरा निकलता है। इसमें काफी मात्रा में सोना मौजूद हाता है। ब्रिटेन की रॉयल मिंट ने पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से सोना निकालने का एक कार्यक्रम शुरू किया है ।
रीसाइक्लिंग की ये हैं चुनौतियां
ई कचरे की रीसाइक्लकिंग बेहद चुनौतीपूर्ण काम है। भारत जैसे देश में ई कचरे को रीसाइकिल करने का ज्यादातर काम छोटे छोटे कारखानों में होता है। यहां बेहद देसी तरीकों से केमिकल और अन्य साधनों का इस्तेमाल कर ई कचरे से धातुएं निकाली जाती हैं। श्रमिक अक्सर उपकरणों को हाथ से खोलते हैं । इस काम में बहुत समय और मेहनत लगती है। सर्किट बोर्ड के पुर्जे और बैटरी निकालना सावधानी से करना पड़ता है। प्लास्टिक को जलाना पड़ता है, कई बार केमिकल का इस्तेमाल होता है। इससे रीसाइक्लिंग करने वालों को कई तरह के नुकसान पहुंच सकता है।
पर्यावरण के लिए है फायदेमंद
इलेक्ट्रॉनिक कचरे से सोना निकालना एक तरह से पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद है। सोने को निकालने के लिए साइनाइड और पारा जैसे हानिकारक रसायनों का उपयोग होता है। ये रसायन पानी, मिट्टी और हवा में मिल कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। ई कचरे से सोना निकालने में बेहद कम प्रदूषण होता है। इससे कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है। ई-कचरे से सोना प्राप्त करने से धातुएं उपयोग में बनी रहती हैं।

प्रीडायबिटीज को नियंत्रित करने से कम हो सकता है दिल की बीमारियों का खतरा

सदी के अंत तक 39 फीसदी ग्लेशियर खत्म होने का खतरा, बढ़ेगा फ्लैश फ्लड और पेयजल का संकट

2050 तक दुनिया में शहरों में 2.5 अरब और लोग आएंगे, दबाव के चलते मिट्टी खो रही अपने प्राकृतिक गुण

चीन के दबाव में भारत का भरोसेमंद साथी: जापान-अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय गठबंधन

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।