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    'गिरफ्तारी के समय मेरे पास 750 रुपये थे, उन्हें वापस कर दो', मालेगांव मामले में बरी हुए समीर कुलकर्णी ने अदालत से कहा

    Updated: Fri, 01 Aug 2025 02:00 AM (IST)

     मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपित कुलकर्णी ने सुनवाई के दौरान अदालत से कहा कि गिरफ्तारी के दौरान मुझसे 900 रुपये जब्त किए गए थे लेकिन कागजों पर सिर्फ 750 रुपये दिखाए गए थे। ठीक है 150 रुपये छोड़ दो लेकिन कम से कम मेरे 750 रुपये तो लौटा दो। न्यायाधीश ने गुरुवार को अपना आदेश सुनाते हुए मुकदमे का सामना कर रहे सभी सात लोगों को बरी कर दिया।

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    मालेगांव मामले में बरी हुए समीर कुलकर्णी ने अदालत से कर दी अजीब मांग (फाइल फोटो)

     डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में आए फैसले के बीच एक पल ऐसा भी आया जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। अदालत द्वारा बरी किए गए लोगों में शामिल समीर कुलकर्णी ने कोर्ट से कहा कि उन्हें उनसे जब्त किए गए 750 रुपये चाहिए।

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    कुलकर्णी बोले पुलिस ने जब्त किए थे 900 रुपये

    कुलकर्णी ने अदालत से कहा कि गिरफ्तारी के दौरान मुझसे 900 रुपये जब्त किए गए थे, लेकिन कागजों पर सिर्फ 750 रुपये दिखाए गए थे। ठीक है, 150 रुपये छोड़ दो, लेकिन कम से कम मेरे 750 रुपये तो लौटा दो।

    जज ने कही ये बात

    न्यायाधीश ने उनके अनुरोध पर ध्यान दिया और कहा कि हम पहले ही यह आदेश दे चुके हैं कि मामले में अगले आदेश तक "केस की संपत्ति" से कुछ भी वापस नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि कुलकर्णी भले ही रिहा हो जाएं, लेकिन उन्हें अपने 750 रुपये के लिए अभी और इंतजार करना होगा।

    न्यायाधीश ने गुरुवार को अपना आदेश सुनाते हुए मुकदमे का सामना कर रहे सभी सात लोगों को बरी कर दिया। गौरतलब है कि कुलकर्णी ने अपना केस खुद लड़ा।

    आरोपित वकील नहीं करते तो 15 साल पहले खत्म हो गया होता मालेगांव मामला : कुलकर्णी

    मालेगांव बम धमाका मामले में गुरुवार को बरी किए गए समीर कुलकर्णी ने कहा कि यदि इस मामले में सह-आरोपितों ने वकील नहीं रखा होता, तो यह मुकदमा 15 साल पहले समाप्त हो गया होता।

    उन्होंने बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष दोनों पर मुकदमे को लंबा खींचने या लटकाने का आरोप भी लगाया। गौरतलब है कि मालेगांव बम विस्फोट मामले में विशेष एनआइए अदालत ने समीर कुलकर्णी समेत सात संदिग्धों को बरी कर दिया।

    कुलकर्णी ने अपना केस खुद लड़ा

    कुलकर्णी ने कहा, मैं अदालत का धन्यवाद करता हूं। मैंने कोई वकील नहीं रखा क्योंकि मुझे न्यायिक प्रणाली पर विश्वास था। मैंने मामले को तेजी से निपटाने के लिए बांबे हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। सभी आरोपित निर्दोष हैं। यदि उन्होंने वकील नहीं रखा होता, तो यह मामला 15 साल पहले खत्म हो गया होता। गौरतलब है कि कुलकर्णी ने अपना केस खुद लड़ा।