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    I-PAC छापेमारी मामले में ममता सरकार को झटका, ED अधिकारियों पर दर्ज FIR पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 03:28 PM (IST)

    I-PAC छापेमारी मामले में हाईकोर्ट के बाद ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने ईडी अधिकारियों पर दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी है। ...और पढ़ें

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। I-PAC छापेमारी मामले में ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि अगली सुनवाई तक ईडी अधिकारियों पर दर्ज एफआईआर स्थगित रहेगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि बिना किसी दबाव के जांच का निर्देश दें। कोर्ट ने 8 जनवरी को तलाशी लिए गए परिसर की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में राज्य द्वारा कथित हस्तक्षेप से संबंधित गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में मांगा जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी , पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और ईडी की याचिका पर नोटिस जारी किया। जिसमें उन पर राजनीतिक परामर्श लेने वाली कंपनी I-PAC के परिसर और इसके संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर ईडी की छापेमारी के दौरान दखल दिया गया है।

    जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने ममता बनर्जी, डीजीपी से सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर भी जवाब देने को कहा। अदालत ने कहा कि ईडी द्वारा दायर याचिकाओं में गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

    ...तो देश में अराजकता फैल जाएगी

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया कोर्ट की राय है कि इस याचिका में ईडी या अन्य केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच और राज्य एजेंसियों के हस्तक्षेप से संबंधित एक गंभीर मुद्दा उठाया गया है। हमारे अनुसार, देश में कानून के शासन का पालन सुनिश्चित करने और प्रत्येक अंग को स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अनुमति देने के लिए, इस मुद्दे की जांच करना आवश्यक है ताकि अपराधियों को किसी विशेष राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की छत्रछाया में संरक्षण न मिल सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि वह ईडी द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच नहीं करता है तो देश में अराजकता फैल जाएगी। इसलिए इस मामले में कई बड़े सवाल उठे हैं और इसमें कई मुद्दे शामिल हैं। जिन्हें अगर अनसुलझा छोड़ दिया जाए तो स्थिति और बिगड़ जाएगी। पीठ ने कहा कि इससे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग संगठनों के शासन के कारण किसी न किसी राज्य में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।

    सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखने का निर्देश

    सीबीआई जांच की मांग के अलावा, ईडी ने I-PAC से जुड़े परिसरों से मुख्यमंत्री बनर्जी द्वारा कथित तौर पर लिए गए सबूतों को वापस करने का निर्देश देने की भी मांग की है। ईडी ने इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की थी , जिसे केंद्रीय एजेंसी के अनुरोध पर बुधवार को स्थगित कर दिया गया था।

    इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी और अन्य लोगों को ईडी की याचिकाओं के जवाब में दो सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा।

    सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले, ईडी ने नौ जनवरी को कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बनर्जी के खिलाफ सीबीआइ जांच की मांग की थी। लेकिन हाईकोर्ट में हंगामा होने की वजह से सुनवाई नहीं हो पाई थी।

    सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने क्या दलील दी?

    ईडी की ओर से पैरवी कर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा, यह घटना बहुत चौंकाने वाला पैटर्न दिखाती है। इससे ऐसे कामों को ही बढ़ावा मिलेगा, केंद्रीय बल हतोत्साहित होंगे। राज्य सरकारों को लगेगा कि वे घुस सकते हैं, चोरी कर सकते हैं, फिर धरने पर बैठ सकते हैं। एक मिसाल कायम की जानी चाहिए; वहां मौजूद अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए। ऐसे सबूत थे जिनसे यह निष्कर्ष निकला कि I-PAC ऑफिस में आपत्तिजनक सामग्री पड़ी थी। हमारी याचिका की सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में वकील और अन्य लोग कलकत्ता HC में घुस गए; ऐसा तब होता है जब लोकतंत्र की जगह भीड़तंत्र ले लेता है।"

    हाईकोर्ट को जंतर-मंतर बना दिया गया?

    ईडी की तरफ से बहस करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 9 जनवरी को कोलकात्ता हाईकोर्ट को भी भीड़तंत्र का शिकार बनाया गया। हाईकोर्ट में वैसे वकीलों की भीड़ इकट्ठा की गई जिनका केस से कोई संबंध नहीं था। जिसके कारण न्यायाधीश को सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।

    जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने पूछा कि क्या उच्च न्यायालय को जंतर-मंतर में परिवर्तित कर दिया गया था। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि एक व्हाट्सएप संदेश में वकीलों को एक निश्चित समय पर अदालत आने के लिए कहा गया था, जिसके कारण अराजकता फैली।

    सिब्बल की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस भेजने की कही बात

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पैरवी कर रहे कपिल सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी उपकरण ले जाने का आरोप झूठ है। यह उनके अपने पंचनामा से प्रमाणित है। यह केवल पूर्वाग्रह पैदा करने के लिए है। पंचनामा के माध्यम से न्यायालय को जानकारी देते हैं।

    इसपर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा, "आपका दावा विरोधाभासी है। यदि उनका (ईडी) का इरादा जब्त करने का होता तो वे जब्त कर लेते लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। जस्टिस मिश्रा ने कहा, "हमें जांच करनी होगी। आप हमें नोटिस जारी करने से नहीं रोक सकते हैं।"

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