क्या खत्म हो जाएगा मनोज जरांगे पाटिल का आंदोलन? मुंबई पहुंचे अमित शाह ने फडणवीस और शिंदे से की बात
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर मनोज जरांगे पाटिल का आंदोलन जारी है जिससे सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है। जरांगे पाटिल मराठों को कुनबी के रूप में शामिल कर ओबीसी कोटे में आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं जिसका ओबीसी समुदाय विरोध कर रहा है। सरकार स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रही है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मनोज जरांगे पाटिल के नेतृत्व वाले मराठा प्रदर्शनकारियों और महाराष्ट्र सरकार के बीच गतिरोध दूसरे दिन भी जारी रहा। आज पहले दौर की वार्ता भी विफल रही। जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मराठा बनाम ओबीसी आरक्षण मुद्दे से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए नए विकल्प तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए जरांगे पाटिल ने कहा कि मैंने एक दिन पहले ही भूख हड़ताल शुरू की है, अगर जरूरत पड़ी तो मैं पानी भी छोड़ दूंगा।
जरांगे पाटिल की क्या है मांग?
जरांगे पाटिल मराठों को कुनबी के रूप में घोषित कर उन्हें ओबीसी के कोटे के अंतर्गत ही आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। कुनबी ओबीसी के तहत एक उप-जाति है। ऐसा करने से ओबीसी समाज को मिल रहा 27 प्रतिशत कोटा कमजोर होगा। इसीलिए महाराष्ट्र सरकार ने पिछले विधानसभा चुनाव से पहले आर्थिक रूप से पिछड़े मराठा समाज को शिक्षा एवं नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था की है। ऐसे समय में जब महायुति को भारी बहुमत प्राप्त है, भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन को मराठों और ओबीसी दोनों को खुश रखना होगा।
सरकार ने बातचीत के लिए रिटायर्ड जस्टिस संदीप शिंदे को किया नियुक्त
मुंबई में जरांगे पाटिल का आंदोलन शुरू होने के बाद पहले कदम के रूप में सरकार ने न्यायमूर्ति संदीप शिंदे (सेवानिवृत्त) को उनके साथ बातचीत करने के लिए नियुक्त किया। शिंदे मराठों को आरक्षण देने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित समिति के प्रमुख हैं। लेकिन इस मुलाकात के बाद जरांगे ने कहा कि मराठों को आरक्षण देने की घोषणा करने वाला आदेश जारी करना न्यायमूर्ति शिंदे का काम नहीं है। न्यायमूर्ति शिंदे के वार्ता के लिए रवाना होने से पहले, जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल की अध्यक्षता वाली 12 सदस्यीय कैबिनेट उप-समिति ने भी स्थिति पर चर्चा करने और समाधान निकालने के लिए बैठक की। हालांकि इस उपसमिति के पास भी बहुत कम विकल्प हैं।
जरांगे का क्या कहना है?
सरकार को जिन प्रमुख मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, उनमें से एक मराठा-ओबीसी संघर्ष से निपटना भी शामिल है। जरांगे पाटिल ने कहा कि न्यायमूर्ति शिंदे के नेतृत्व में बनी समिति पिछले 13 महीनों से इस मुद्दे से संबंधित राजपत्रों का अध्ययन कर रही थी। अब समय आ गया है कि पैनल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे ताकि मराठों को कुनबी का दर्जा दिलाने का मार्ग प्रशस्त हो सके।
जरांगे ने कहा मराठवाड़ा में मराठों को कुनबी घोषित कर उन्हें आरक्षण दिया जाना चाहिए। इसके लिए हैदराबाद और सातारा राजपत्रों को कानून बनाया जाना चाहिए।
जस्टिस शिंदे ने क्या कहा?
जवाब में न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा कि उन्हें ऐसी रिपोर्ट देने का अधिकार नहीं है। यह पिछड़ा वर्ग आयोग का काम है। पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र व्यक्तियों को दिया जाता है, पूरे समुदाय को नहीं। बाद में न्यायमूर्ति शिंदे ने कैबिनेट उप-समिति को भी जरांगे के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी।
ओबीसी समाज का भी विरोध प्रदर्शन शुरू
अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत कोटे के तहत आरक्षण पाने की मराठा समुदाय की मांग के विरोध में ओबीसी समुदाय ने शनिवार को नागपुर के संविधान चौक पर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने मराठों की मांग का विरोध करते हुए कहा है कि इससे मौजूदा ओबीसी कोटा कमजोर हो जाएगा। संघ के अध्यक्ष बबनराव तायवाड़े ने कहा कि हम लोगों तक जाएंगे और उन्हें बताएंगे कि वास्तविकता क्या है।
तायवाड़े ने कहा कि सरकार ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि मराठा समुदाय को ओबीसी का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए और न ही उन्हें कुनबी प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में उनके समाज की ओर से विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
अमित शाह की फडणवीस एवं एकनाथ शिंदे से चर्चा
इस बीच मुंबई में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन और ओबीसी प्रतिरोध के जवाबी आंदोलन की पृष्ठभूमि में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से अनौपचारिक मुलाकात की और दोनों विरोध प्रदर्शनों से उत्पन्न महाराष्ट्र की स्थिति पर चर्चा की।
महाराष्ट्र सरकार राज्य में जातिगत संघर्ष से बचना चाहती है और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो जाए।
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