Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Bullet Train: हवा से बात करेगी बुलेट ट्रेन, फिर भी नहीं होगा शोर; जानिए क्यों

    By Agency Edited By: Sachin Pandey
    Updated: Mon, 23 Dec 2024 06:21 PM (IST)

    Mumbai Ahmedabad bullet train मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने को लेकर तैयारियां जोरों-शोरों से जारी है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का निर्माण तेजी से चल रहा है। गौरतलब है कि यह बुलेट ट्रेन हवा से बात करेगी और इसकी स्पीड 320 किमी प्रति घंटे से भी ज्यादा होगी। इसके बावजूद इसका शोर आसपास के लोगों को सुनाई नहीं देगा। जानिए क्या है इसकी वजह।

    Hero Image
    बुलेट ट्रेन के शोर को कम करने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। (File Image)

    एएनआई, नई दिल्ली। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम जारी है। इस बीच प्रोजेक्ट के तहत 103 किलोमीटर लंबे वायडक्ट के दोनों ओर 2 लाख से अधिक नॉइज बैरियर लगाने के साथ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है। ये बैरियर ट्रेन की तेज रफ्तार के कारण निकलने वाली आवाज को काफी हद तक कम करने में मदद करेंगे।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    एएनआई के अनुसार बुलेट ट्रेन के रूट में प्रत्येक 1 किलोमीटर के लिए, वायडक्ट के दोनों ओर 2,000 नॉइज बैरियर लगाए गए हैं। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (एनएचएसआरसीएल) ने सोमवार को एक अपडेट में कहा कि नॉइज बैरियरों को ऑपरेशन के दौरान ट्रेन और संरचनाओं द्वारा निकलने वाली आवाज को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है।

    2 मीटर ऊंचे हैं बैरियर

    ये बैरियर ट्रेन के शोर के साथ-साथ पटरियों पर चलने वाले पहियों से निकलने वाली आवाज को रिफ्लेक्ट और डिस्ट्रीब्यूट करते हैं। प्रत्येक बैरियर की ऊंचाई 2 मीटर और चौड़ाई 1 मीटर है, जिसका वजन लगभग 830-840 किलोग्राम है। आवासीय और शहरी क्षेत्रों में 3 मीटर के ऊंचे नॉइज बैरियर लगाए गए हैं। इनमें 2 मीटर कंक्रीट बैरियर के ऊपर अतिरिक्त 1 मीटर पारदर्शी पॉलीकार्बोनेट पैनल शामिल है, ताकि यात्रियों को बिना किसी बाधा के दृश्य देखने को मिले।

    (Photo Source: nhsrcl.in)

    इन बैरियर का उत्पादन करने के लिए छह कारखाने भी बनाए गए हैं। इनमें से तीन कारखाने अहमदाबाद में हैं, जबकि सूरत, वडोदरा और आनंद में एक-एक कारखाना है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने और भी कई प्रमुख निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इसके तहत 243 किलोमीटर से अधिक वायडक्ट का निर्माण पूरा हो चुका है।

    गुजरात में ट्रैक निर्माण तेजी से जारी

    साथ ही 352 किलोमीटर पियर का काम और 362 किलोमीटर पियर फाउंडेशन का काम भी पूरा हो चुका है। 13 नदियों पर पुल बनाए गए हैं और पांच स्टील पुलों समेत दो पीएससी पुलों के माध्यम से कई रेलवे लाइनों और राजमार्गों को पार किया गया है। गुजरात में ट्रैक निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। आनंद, वडोदरा, सूरत और नवसारी जिलों में आरसी (प्रबलित कंक्रीट) ट्रैक बेड का निर्माण चल रहा है। आरसी ट्रैक बेड का 71 ट्रैक किलोमीटर निर्माण पूरा हो चुका है और वायडक्ट पर रेल की वेल्डिंग शुरू हो गई है।

    महाराष्ट्र में मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए पहला कंक्रीट बेस-स्लैब 32 मीटर की गहराई पर सफलतापूर्वक डाला गया है, जो 10 मंजिला इमारत के बराबर है। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) और शिल्पाता के बीच 21 किलोमीटर लंबी सुरंग पर काम चल रहा है, जिसमें मुख्य सुरंग निर्माण की सुविधा के लिए 394 मीटर की इंटरमीडिएट सुरंग (एडीआईटी) पूरी हो गई है।

    ये भी पढ़ें- जाना था पनवेल, निकल गई कल्याण, वंदे भारत ने अचानक बदला रूट; फिर...