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    मोहन भागवत की एकता की अपील का मुस्लिम विद्वानों ने किया स्वागत, गलतफहमियां दूर करने की कही ये बात

    By Agency Edited By: Jeet Kumar
    Updated: Sat, 30 Aug 2025 07:03 AM (IST)

    आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की एकता की अपील का मुस्लिम विद्वानों ने स्वागत किया और कहा कि दोनों पक्षों की ओर से गलतफहमियां दूर की जानी चाहिए। आरएसएस की सौम्य और आधुनिक छवि पेश करते हुए भागवत ने गुरुवार को कहा था कि इस्लाम का भारत में हमेशा स्थान रहेगा। उन्होंने भाजपा के साथ मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि अखंड भारत एक अपरिवर्तनीय वास्तविकता है।

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    मोहन भागवत की एकता की अपील का मुस्लिम विद्वानों ने किया स्वागत (फाइल फोटो)

     पीटीआई, नई दिल्ली। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की एकता की अपील का मुस्लिम विद्वानों ने स्वागत किया और कहा कि दोनों पक्षों की ओर से गलतफहमियां दूर की जानी चाहिए।

    आरएसएस की सौम्य और आधुनिक छवि पेश करते हुए भागवत ने गुरुवार को कहा था कि इस्लाम का भारत में हमेशा स्थान रहेगा। उन्होंने भाजपा के साथ मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि अखंड भारत एक अपरिवर्तनीय वास्तविकता है।

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    इन मुद्दों पर हुई चर्चा

    ढाई घंटे तक चले प्रश्नोत्तर सत्र में सरसंघचालक ने मनुस्मृति से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टैरिफ, जाति, शिक्षा, देशभक्ति, विभाजन, घुसपैठ, मुसलमानों पर हमले और राजनेताओं की सेवानिवृत्ति की उम्र जैसे सवालों के जवाब दिए। मुस्लिम विद्वानों ने इस्लाम और भारत के मुसलमानों पर संघ प्रमुख के विचारों की सराहना की है।

    अरशद मदनी ने कहा, दोनों पक्षों की ओर से गलतफहमियां दूर की जानी चाहिए

    जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा कि दोनों पक्षों (हिंदुओं और मुसलमानों) की ओर से गलतफहमियां दूर की जानी चाहिए और उन्हें एक साथ लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

    फिरंगी महली बोले, हमें अच्छे माहौल में देश को प्रगति के पथ पर ले जाना चाहिए

    प्रख्यात मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस्लाम और मुस्लिम समुदाय के बारे में आरएसएस प्रमुख की टिप्पणी का स्वागत करते हुए कहा कि हमें एक साथ आना चाहिए और अच्छे माहौल में देश को प्रगति के पथ पर ले जाना चाहिए।

    भागवत ने कहा- हिंदू धर्म किसी अन्य धर्म का विरोध नहीं करता

    भागवत ने कहा है कि हिंदू धर्म किसी अन्य धर्म का विरोध नहीं करता। एक तरह से उन्होंने इस्लाम का समर्थन किया है। हम इसका स्वागत करते हैं।

    महली ने भागवत के इस बयान का भी स्वागत किया कि आरएसएस काशी और मथुरा को पुन: प्राप्त करने के किसी भी आंदोलन में भाग नहीं लेगा। उन्होंने इसे एक अच्छी पहल बताया, लेकिन भारतीय परिवारों में बच्चों की संख्या पर उनके विचार से अलग राय रखी।

    उन्होंने कहा-अयोध्या मामले में जो हुआ, उससे देश को कितना नुकसान पहुंचा, यह सबके सामने है। ऐसी बातें दोहराई नहीं जानी चाहिए। मंदिर-मस्जिद मुद्दे को बार-बार उठाने से लोगों और देश को नुकसान होता है।

    विपक्षी दलों ने भागवत पर लगाया विरोधाभासी बयान देने का आरोप

    कांग्रेस ने भागवत की इस टिप्पणी के लिए उन पर निशाना साधा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि वह सेवानिवृत्त हो जाएंगे या किसी और को 75 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि एक महीने से अधिक समय में उन्होंने विरोधाभासी बयान दिए हैं।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर कही ये बात

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा-एक महीना, एक व्यक्ति, दो विरोधाभासी बयान। उन्होंने भागवत के गुरुवार और जुलाई के बयानों पर मीडिया रिपोर्टों को भी टैग किया।

    कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने भी 75 साल की उम्र में रिटायर होने के बारे में भागवत के स्पष्टीकरण पर निशाना साधते हुए पूछा कि पर्दे के पीछे ऐसा क्या हुआ कि उन्हें अपना बयान बदलना पड़ा। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्र की क्या गलती थी कि 75 साल की उम्र के बाद उन्हें मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया गया?

    ओवैसी ने लगाए ये आरोप

    एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि आरएसएस द्वारा प्रायोजित और समर्थित संगठन ही मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं। वास्तव में नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में मुसलमानों के खिलाफ नफरत को संस्थागत रूप दिया गया है।