एक देश-एक चुनाव पर अब शिक्षकों और श्रमिक संगठनों की भी ली जाएगी राय, कराया जाएगा सर्वेक्षण
एक देश-एक चुनाव पर संसदीय समिति अब अपनी रायशुमारी को राज्यों या संविधान विशेषज्ञों तक ही सीमित नहीं रखेगी बल्कि चुनाव से प्रभावित होने वाले सभी वर्गों को इस रायशुमारी में शामिल करेगी। समिति जल्द ही शिक्षकों व श्रमिक संगठनों उद्योग जगत आदि से बात करेगी। उनकी राय सुझावों में शामिल होगी। यह रायशुमारी बिंदुवार सर्वेक्षण के जरिये करायी जाएगी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक देश-एक चुनाव पर संसदीय समिति अब अपनी रायशुमारी को राज्यों या संविधान विशेषज्ञों तक ही सीमित नहीं रखेगी, बल्कि चुनाव से प्रभावित होने वाले सभी वर्गों को इस रायशुमारी में शामिल करेगी।
समिति अब तक कर चुकी है करीब 12 बैठकें
समिति जल्द ही शिक्षकों व श्रमिक संगठनों, उद्योग जगत आदि से बात करेगी। उनकी राय सुझावों में शामिल होगी। यह रायशुमारी बिंदुवार सर्वेक्षण के जरिये करायी जाएगी।
समिति अब तक कर चुकी है करीब 12 बैठकें
गौरतलब है कि समिति अब तक संविधान विशेषज्ञों के साथ करीब 12 बैठकें कर चुकी है। साथ ही हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ सहित छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश का दौरा कर भी चुकी है।
समिति का मानना है कि अब तक की रायशुमारी में उसे प्रस्तावित कानून को लेकर सकारात्मक सुझाव मिले हैं। समिति उद्योग जगत के साथ ही चर्चा करने की योजना पर काम कर रही है।
चुनावों से उद्योगों जगत पर भी प्रभाव
समिति का मानना है कि बार-बार के चुनावों से उद्योगों जगत पर भी प्रभाव पड़ता है, क्योंकि चुनाव के चलते उसके अधिकांश श्रमिक छुट्टी पर चले जाते है।
छुट्टी पर जाने वाले श्रमिक कई महीनों तक वापस नहीं आते
खासकर पंचायत व नगरीय चुनावों के दौरान यह स्थिति और ज्यादा गंभीर बन जाती है। छुट्टी पर जाने वाले श्रमिक कई महीनों तक वापस नहीं आते है। ऐसे में उद्योगों का काम-काज प्रभावित होता है। जबकि चुनावी कामकाज में शिक्षकों का उपयोग बड़ी संख्या में होता है। स्कूल कॉलेज बंद भी होते हैं।
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