Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    ट्रंप की डिप्लोमेसी फुस्स! पुतिन से मीटिंग भी नहीं करा पाई यूक्रेन से सीजफायर, शांति छोड़िए और बिगड़ गए हालात

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 02:44 PM (IST)

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने का दावा करने वाले डोनाल्ड ट्रंप की डिप्लोमेसी सवालों में है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनकी कूटनीति को विफल कर दिया है। अलास्का में ट्रंप-पुतिन की मीटिंग को युद्धविराम की दिशा में नया मोड़ बताया गया था पर युद्ध और तेज हो गया।

    Hero Image
    अलास्का में ट्रंप और पुतिन ने की थी मुलाकात। (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने की लफ्फाजी मारने वाले डोनाल्ड ट्रंप की डिप्लोमेसी पर अब सवाल उठने लगे हैं क्योंकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनकी कूटनीति की कुटाई कर दी है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    अलास्का के आंगन में ट्रंप-पुतिन की मीटिंग को रूस-यूक्रेन के बीच युद्धविराम की दिशा में एक नया मोड़ बताया जा रहा था। हालांकि इसका नतीजा अगर देखा जाए तो सीजफायर तो नहीं हुआ बल्कि युद्ध चरम स्तर पर पहुंच गया है।

    ट्रंप के खोखले दावे

    अलस्का में पुतिन से मिलने से पहले ट्रंप ने दावा किया था कि उनका टारगेट सीजफायर कराना है और अगर रूस उनकी बात नहीं मानेगा तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप का ये दावा भी खोखला साबित होता दिख रहा है क्योंकि इस मीटिंग को हुए 15 दिन बीत गए लेकिन रूस-यूक्रेन के बीच युद्धविराम की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया हुआ नहीं दिख रहा है। 15 अगस्त, 2025 को हुई इस मुलाकात के बाद पुतिन ने ट्रंप को नजरंदाज करते हुए यूक्रेन पर हमले और तेज कर दिए।

    15 को मुलाकात 16 अगस्त को यूक्रेन पर हमला

    ट्रंप-पुतिन की मुलाकात के एक दिन बाद ही यूक्रेन ने आरोप लगाया कि रूस ने ड्रोन और मिसाइल से हमला किया। यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई रूसी ड्रोन्स को रोक दिया। इसके बाद रूस ने 20-21 अगस्त को फिर से यूक्रेन पर हमला किया। ये 2025 का तीसरा सबसे बड़ा हमला था, जिसमें रूस ने 500 से ऊपर ड्रोन और 40 मिसाइलें दागीं।

    बात यहीं खत्म नहीं होती। बीते दिन यानि कि गुरुवार (28 अगस्त, 2025) को रूस ने कीव पर हमला किया, इसमें 629 ड्रोन्स और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इस वाले हमले में तो यूरोपीय यूनियन की बिल्डिंग को भी नुकसान पहुंचा था। जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो यूक्रेन ने भी जवाबी हमले किए।

    ट्रंप के बस की बात नहीं बड़े युद्ध रोकना?

    कहने का मतलब है कि अलास्का मीटिंग का इतना ढिंढोरा पीटा गया और इसके बाद भी हालात में एक इंच का भी बदलाव नहीं देखने को मिला। हालांकि ट्रंप ने इस बैठक के बाद कहा था कि फिलहाल सीजफायर को लेकर किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं लेकिन उन्होंने यह भी कहा था कि कई बिंदुओं पर बात बनी है और इसे प्रोडक्टिव करार दिया था।

    यह भी पढ़ें- Trump Tariffs War: 'चीन को क्यों नहीं दी ऐसी सजा' रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी डेमोक्रेट्स ने ट्रंप को सुनाई खरी-खरी