21 बार स्थगित हुई जमानत याचिका पर सुनवाई, इलाहाबाद हाईकोर्ट के रवैये पर SC ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जमानत मामले को 21 बार स्थगित करने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों की सुनवाई जल्द करने की आवश्यकता पर बल दिया। चीफ जस्टिस ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मामले पर विचार करने का अनुरोध किया। कुलदीप नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जमानत के एक मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा 21 बार स्थगित किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गहरी नाराजगी जताई। साथ ही हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले पर गौर करने का अनुरोध किया।
प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, जस्टिस एनवी अंजारिया और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा, 'हम बार-बार कहते रहे हैं कि नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों की सुनवाई और फैसला जल्द से जल्द होना चाहिए।' पीठ कुलदीप नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
चीफ जस्टिस ने की टिप्पणी
उसके वकील का कहना था कि हाई कोर्ट में उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई 21 बार स्थगित की गई है और मामले की सुनवाई दो महीने बाद की जाएगी। वकील ने हाल के एक मामले का जिक्र किया जिसमें शीर्ष अदालत ने एक अभियुक्त को जमानत दे दी थी क्योंकि उसकी याचिका पर सुनवाई 43 बार स्थगित हो चुकी थी।
इस प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से व्यक्तिगत रूप से इस पर विचार करने को कहा है। इस मामले में जमानत देने से इन्कार करते हुए पीठ ने कहा, 'यह कहने की जरूरत नहीं है कि कम से कम अगली सुनवाई की तिथि पर हाई कोर्ट इस मामले को लेगा और जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगा।'
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अगर अभियुक्त फिर भी असंतुष्ट रहता है, तो वह शीर्ष अदालत वापस आ सकता है। प्रधान न्यायाधीश ने हाल ही में व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों को स्थगित करने की हाई कोर्ट की प्रवृत्ति की निंदा की।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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