इंदौर में त्रासदी या चेतावनी! 'जल ही जीवन' बना मौत का घूंट, तो क्या पूरे देश के पानी में घुलने लगा ज़हर?
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत हुई। भारत में लाखों लोग आज भी सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं। WHO और UNICEF ने चेताया है कि अस ...और पढ़ें

जब जीवन देने वाला पानी मौत का घूंट बन जाए...
गुरप्रीत चीमा, इंदौर। 'जल ही जीवन है' ये मशहूर स्लोगन तो आपने जरूर सुना ही होगा और पढ़ा भी होगा। अब जरा सोचिए, अगर जिंदगी के लिए महत्वपूर्ण 'पानी'; मौत का कारण बन जाए तो...
सिहर उठेंगे आप यह जानकर कि वास्तव में ऐसा हुआ है। देश का सबसे साफ शहर इंदौर... खानपान के लिए देश दुनिया में प्रसिद्ध शहर इंदौर... आज हर ओर चर्चा में है। इस बार वजह एकदम उलट है। इंदौर के भागीरथपुरा में 15 लोगों ने जिस जल को जीवन सुरक्षित रखने के लिए पिया, वह उनके लिए जहर बन गया और उन्हें बेवक्त मौत की नींद सुला गया।
किसी घर का मन्नतों के बाद जन्मा चिराग असमय बुझ गया तो कहीं दो वक्त की रोटी कमाने वाला। कहीं पूरे घर के लिए रोटी बनाने वाले हाथ निढाल हो गए तो कहीं युवा तमन्नाओं ने दम तोड़ दिया।
वजह-सिस्टम का गैर जिम्मेदाराना रवैया... सरकारी अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद और आम जनता को उसके हाल पर छोड़ने की कार्यशैली... भागीरथपुरा तो खून के आंसू रो रहा है, लेकिन यह केवल सात बार स्वच्छता का सिरमौर बनकर पीठ ठोंकने वाले इंदौर की त्रासद कहानी भर नहीं है, यह बानगी है देशभर में इसी तरह के दूषित जल के साथ रह रहे करोड़ों लोगों की दहलाने वाली दास्तान। डब्ल्यूएचओ हो या यूनिसेफ... भारत में पानी के दूषित होने पर सबने ध्यान दिलाया है।
पढ़िए इस स्पेशल रिपोर्ट में कि कैसे भारत में शुद्ध पेयजल तक लोगों की पहुंच मुश्किल है और कैसे पानी के कारण लोग बीमार होने और जान गंवाने पर बेबस हैं...
पृथ्वी की सतह का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है। हालांकि, 97 प्रतिशत पानी समुद्री है। 3 प्रतिशत पानी ही मीठा है जिसे फ्रेश वाटर भी कहा जाता है। अगर इस 3 प्रतिशत पानी में ही जहर घुलने लगे तो क्या होगा। इंदौर में पानी की वजह हुई मौतों ने एक बार फिर साफ पानी का मुद्दा उठा दिया है। हालांकि, ये भारत या पूरी दुनिया में पहली बार नहीं हुआ। पानी की वजह से रोजाना कई जिंदगिया खत्म हो रही हैं।
Unsafe Water: WHO और UNICEF की चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNICEF समय-समय पर अलर्ट करता रहा है कि असुरक्षित पेयजल गंभीर खतरा है और हर व्यक्ति तक शुद्ध और प्रबंधित पेयजल पहुंचना जरूरी है। साथ ही ये भी ध्यान में दिलाया कि जिन देशों में पानी की गुणवत्ता खराब है वहां, स्वास्थ्य व्यवस्था पर बोझ बढ़ेगा और विकास की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है।
- साल 1990: इस दशक से ही WHO ने पेयजल और स्वच्छता को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौतियों में शामिल कर लिया था। उस समय बताया गया कि दूषित पानी सीधे तौर पर मानव जीवन के लिए खतरा है, खासकर बच्चों और गरीब आबादी के लिए। WHO ने यह भी उजागर किया कि अगर लोगों को सुरक्षित पानी मिले, तो हैजा, टाइफॉयड और डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों से होने वाली ज्यादातर मौतों को रोका जा सकता है।
- साल 2000: साल 2000 के बाद पानी और सैनिटेशन को वैश्विक विकास एजेंडे में जगह मिली। संयुक्त राष्ट्र ने मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स (MDGs) तय किए, जिनमें शुद्ध पेयजल और स्वच्छता को अहम लक्ष्य बनाया गया। WHO ने इस दौरान बार-बार कहा कि पानी की समस्या को नजरअंदाज करने से स्वास्थ्य और विकास दोनों प्रभावित होंगे।
- साल 2015: 15 साल पहले 2000 में तैयार किए गए MDGs के बाद सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स लागू किए गए। WHO ने फिर साफ शब्दों में चेताया कि पानी हर किसी को मिले केवल यही काफी नहीं है, बल्कि सुरक्षित और प्रबंधित पेयजल मिलना भी जरूरत है। फिर SDG-6 के तहत सभी के लिए पानी को सुरक्षित करने के गोल रखे गए। इस समय WHO की रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पानी से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण, इसमें बैक्टीरिया, कैमिकल्स और भारी धातुएं अनुमेय सीमा (Permissible Limits of Heavy Metals) से ऊपर होना है। इससे कई गंभीर बीमारियां होने का भी खतरा बना हुआ है।
फोटो: AI Generated
2000-2024: चौबीस साल की रिपोर्ट ने चौंकाया
पिछले साल वर्ल्ड वाटर वीक 2025 में WHO और UNICEF ने 2000 से 2024 तक की संयुक्त रिपोर्ट जारी की। JMP के इस ग्लोबल डेटा के अनुसार, लगभग 2.1 अरब लोग अभी भी साफ और प्रबंधित पेयजल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं, UNICEF के भारत WASH प्रोग्राम के आंकड़े भी चिंताजनक थे।
रिपोर्ट में बताया गया कि देश में लाखों लोग अभी भी सुरक्षित पानी से वंचित हैं और केवल 50 प्रतिशत से भी कम आबादी के पास ही सुरक्षित जल उपलब्ध है। इसके अलावा, कई राज्यों में भूजल की स्थिति गंभीर हो गई है, जिसमें नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक और अन्य भारी धातुएं अनुमेय सीमा से कहीं अधिक पाई गई हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में पानी की सुरक्षा और गुणवत्ता एक बड़ा खतरा बनी हुई है।

फोटो- AI Generated
Ground Water: भारत के लिए चुनौती
केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की 2024‑2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ग्राउंडवाटर व्यापक रूप से प्रदूषित हो चुका है। रिपोर्ट में लिए गए नमूनों में नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक और यूरेनियमजैसी तत्वों की मात्रा परमिसिबल लिमिट से अधिक पाई गई है। देश के कई राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पंजाब, बिहार और तेलंगाना हॉटस्पॉट के रूप में सामने आए हैं, जहां स्थिति गंभीर है। लंबे समय तक फ्लोराइड अधिक मात्रा में रहने से दांत और हड्डियों की समस्याएं बढ़ रही हैं, जबकि आर्सेनिक के कारण कैंसर और त्वचा रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
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Ground Water: क्यों बन रहा जहरीला?
- सीवेज का रिसाव: भारत में ग्राउंट वाटर के प्रदूषित होने का सबसे बड़ा कारण सीवेज का रिसाव है। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी जमीन में जाने से यह ग्राउंट वाटर को लगातार प्रदूषित कर रहा है।
- कृषि में कीटनाशकों का इस्तेमाल: एक बड़ा कारण कृषि में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक भी हैं। इनमें मौजूद नाइट्रेट और अन्य केमिकल मिट्टी में जाकर पानी को प्रदूषित कर रहे हैं और ग्राउंट वाटर की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
- केमिकल वेस्ट और हेवी मेटल: कई फैक्ट्रियों और इंडस्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट सही तरीके से ट्रीट नहीं किया जाता और सीधे जमीन में छोड़ दिया जाता है। इसकी वजह से केमिकल वेस्ट और हेवी मेटल ग्राउंट वाटर में जाकर मिल रहे हैं।
- पुराने लैंडफिल और सेप्टिक टैंक: कूड़ा डंप साइट, पुराने लैंडफिल और सेप्टिक टैंक से रिसने वाला प्रदूषित पानी भी ग्राउंट वाटर को धीरे-धीरे जहरीला बना रहा है।
- ग्राउंड वाटर एक्सप्लॉइटेशन: भारत में कई जगह ग्राउंट वाटर का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। पानी का स्तर गिरने से आर्सेनिक, फ्लोराइड और यूरेनियम जैसे तत्व प्राकृतिक रूप से ज्यादा मात्रा में पानी में घुलने लगते हैं।

फोटो: राज सिंह (जागरण ग्राफिक्स)
पानी और सीवर सप्लाई लाइन अलग होना जरूरी
एक बड़ी समस्या यह भी है कि कई शहरों और कस्बों में पानी और सीवर की सप्लाई लाइनें एक साथ या बहुत पास बिछी हुई हैं। पाइपलाइन में लीकेज या कम प्रेशर की स्थिति में बैक्टीरिया, वायरस और केमिकल सीधे घरों तक पहुंच जाते हैं। WHO भी साफ कर चुका है कि सुरक्षित पेयजल के लिए वॉटर और सीवर लाइन का पूरी तरह अलग होना, नियमित मेंटेनेंस और समय-समय पर टेस्टिंग बेहद जरूरी है।
Safe Water Practices: कैसे रखें खुद को सुरक्षित?
वॉटर ट्रीटमेंट: पानी को डायरेक्ट पीने से बचें। उसे उबालकर पिएं या फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें। जरूरत पड़ने पर क्लोरीनेशन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
सेफ स्टोरेज: पानी को हमेशा साफ और ढके हुए बर्तन में रखें। घर में पानी को गंदगी और डायरेक्ट हाथों के संपर्क में आने से बचाएं।
साफ-सफाई और हाइजीन: जिस भी बर्तन में पानी रखा जाए, वह साफ होना चाहिए। खाना बनाने और पीने के पानी के लिए अलग कंटेनर का इस्तेमाल करें। समय-समय पर हाथ धोना भी जरूरी है।
मॉनिटरिंग और टेस्टिंग: टेक्नोलॉजी की मदद से पानी में मौजूद बैक्टीरिया, नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक और अन्य हानिकारक तत्वों की जांच की जा सकती है।
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