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    Odisha News: ओडिशा में गहराया खाद संकट,नवीन पटनायक ने जे.पी. नड्डा को लिखा पत्र

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 11:48 AM (IST)

    ओडिशा में खाद आपूर्ति को लेकर किसान परेशान हैं। विपक्ष ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। नवीन पटनायक ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में खाद की कालाबाजारी और मिलावट हो रही है जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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    ओडिशा में गहराया खाद संकट सड़कों पर उतरे किसान

    जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा में खाद आपूर्ति को लेकर किसान परेशान हैं। पूरे राज्य में कालाबाजारी, मिलावट और अव्यवस्था के चलते किसानों को सरकारी दर पर यूरिया नहीं मिल पा रही है। किसान खरीफ मौसम में खेत छोड़कर खाद के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं।

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    कुछ इसी तरह का आरोप लगाते हुए एवं इस गंभीर हालात पर चिंता जताते हुए विपक्षी दल के नेता नवीन पटनायक ने केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर तत्काल कदम उठाने की मांग की है।उन्होंने कहा कि किसानों की बदहाली रुकने के लिए केंद्र को तुरंत आवश्यक यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।

    कृषि – ओडिशा की रीढ़

    नवीन पटनायक ने कहा कि कृषि ही ओडिशा की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और 70 प्रतिशत से अधिक लोग इससे अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। वर्ष 2000 तक चावल के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर रहने वाला ओडिशा आज देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को चावल उपलब्ध कराने वाला प्रमुख राज्य बन चुका है।यह सफलता वैज्ञानिक तकनीक और खाद-बीज के बेहतर वितरण से मिली है।

    सरकारी दावों पर सवाल

    राज्य सरकार का दावा है कि 7.94 लाख टन खाद का भंडार मौजूद है, लेकिन किसानों तक खाद पहुंच ही नहीं रही। यूरिया सरकारी दर से महंगे दामों पर बिक रही है।आरोप है कि मार्कफेड किसानों को देने के बजाय निजी डीलरों को रियायती दर पर खाद बेच रही है।

    तालचेर खाद कारखाना बना सिरदर्द

    नवीन पटनायक ने तालचेर खाद कारखाने का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा कि 2018 में जिसका शिलान्यास हुआ था और जिसे 36 महीने में चालू होना था, वह सात साल बाद भी शुरू नहीं हो पाया।यह किसानों के साथ बड़ी धोखाधड़ी है।

    समय पर कदम जरूरी

    पटनायक ने चेतावनी दी कि अगर खरीफ मौसम की शुरुआत में ही खाद की किल्लत और आपूर्ति में हो रही गड़बड़ियों को नहीं रोका गया, तो न सिर्फ कृषि उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि लाखों किसानों की आजीविका पर भी संकट आ जाएगा।