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    'क्या जेल में रहकर PM, CM या मंत्री सरकार चलाएंगे', 130वें संविधान संशोधन बिल पर हंगामे के बीच अमित शाह की दो टूक

    Updated: Wed, 20 Aug 2025 07:08 PM (IST)

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक समेत तीन बिल पेश किए जिसका विपक्षी सांसदों ने विरोध किया। विधेयक में प्रावधान है कि प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री या मंत्री पर आरोप लगने और 30 दिन न्यायिक हिरासत में रहने पर उन्हें पद छोड़ना होगा। अमित शाह ने कहा कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में नैतिकता लाना है।

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    अमित शाह ने बुधवार को संविधान संशोधन विधेयक समेत तीन बिल पेश किए।(फोटो सोर्स: पीटीआई)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को 130वें संविधान संशोधन विधेयक समेत तीन बिल पेश किए। विधेयक पेश किए जाने के बीच विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया।

    प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या फिर किसी मंत्री पर 5 साल से अधिक सजा के प्रावधान वाले केस में आरोप लगता है और अगर वह तीस दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं तो उन्हें पद छोड़ना होगा। इस विधेयक को गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया।

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    विधेयक पेश करने के बाद अमित शाह ने एक्स पर लिखा, देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और जनता के आक्रोश को देख कर आज मैंने संसद में लोकसभा अध्यक्ष जी की सहमति से संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया, जिससे महत्त्वपूर्ण संवैधानिक पद, जैसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री जेल में रहते हुए सरकार न चला पाएं।

    इस बिल का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में गिरते जा रहे नैतिकता के स्तर को ऊपर उठाना और राजनीति में शुचिता लाना है । इन तीनों बिल से जो कानून अस्तित्व में आएगा, वह यह है कि:

    (1) कोई भी व्यक्ति गिरफ्तार होकर जेल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री , केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री के रूप में शासन नहीं चला सकता है।

    (2) संविधान जब बना, तब हमारे संविधान निर्माताओं ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि भविष्य में ऐसे राजनीतिक व्यक्ति भी आएंगे, जो अरेस्ट होने से पहले नैतिक मूल्यों पर इस्तीफा नहीं देंगे। विगत कुछ वर्षों में देश में ऐसी आश्चर्यजनक स्थिति उत्पन्न हुई कि मुख्यमंत्री या मंत्री बिना इस्तीफा दिए जेल से अनैतिक रूप से सरकार चलाते रहे।

    (3) इस बिल में आरोपित राजनेता को गिरफ्तारी के 30 दिन के अंदर अदालत से जमानत लेने का प्रावधान भी दिया गया है। अगर वे 30 दिन में जमानत प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो 31वें दिन या तो केंद्र में प्रधानमंत्री और राज्यों में मुख्यमंत्री उन्हें पदों से हटाएंगे, अन्यथा वे स्वयं ही कानूनी रूप से कार्य करने के लिए अयोग्य हो जाएंगे। कानूनी प्रक्रिया के बाद ऐसे नेता को यदि जमानत मिलेगी, तब वे अपने पद पर पुनः आसीन हो सकते हैं।

    अब देश की जनता को यह तय करना पड़ेगा कि क्या जेल में रहकर किसी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा सरकार चलाना उचित है?

    सांसदों ने विधेयक की कॉपी फाड़कर अमित शाह की ओर फेंका

    विपक्षी सांसदों ने इस विधेयक का जमकर विरोध किया। कांग्रेस, सपा और टीएमसी से इसे संविधान के खिलाफ कदम बताया है। असदुद्दीन ओवैसी ने भी इसका विरोध किया।

    विधेयक के खिलाफ आक्रोश जताते हुए विपक्षी सांसदों ने अमित शाह की तरफ बिल की कॉपी फाड़ कर फेंक दी। वहीं, कागज के टुकड़े अमित शाह की ओर उछाले। अमित शाह ने ये भी कहा कि सरकार इस बिल को जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव रखती है।

     'मेरे ऊपर भी आरोप लगे थे...'

    विधेयक पेश करने के बाद अमित शाह ने खुद अपना उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति में शुचिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है और हम अपनी जिम्मेदारी से न भागे।

    अमित शाह ने कहा, "गुजरात में मैं मंत्री तो मेरे ऊपर आरोप लगे। मैंने पद से इस्तीफा दिया और कोर्ट के आदेशों का पालन किया। इसके बाद मैंने दोबारा जिम्मेदारी तब संभाली, जब आरोपों से बरी हो गया और संविधान के तहत मुझे पद हासिल करने का अधिकार मिला।

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