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    BMC चुनाव: उद्धव की अग्निपरीक्षा, ठाकरे भाइयों का गठजोड़; शिवसेना (UBT) के लिए मुंबई में साख बचाने की जंग

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 06:11 PM (IST)

    बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के लिए बड़ी परीक्षा हैं, खासकर पार्टी टूटने के बाद। राज ठाकरे की मनसे से गठबंधन के बावजूद ...और पढ़ें

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    BMC चुनाव उद्धव की अग्निपरीक्षा ठाकरे भाइयों का गठजोड़ शिवसेना UBT के लिए मुंबई में साख बचाने की जंग (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा माने जा रहे हैं। जून 2022 में पार्टी टूटने के बाद यह उद्धव ठाकरे की तीसरी बड़ी चुनावी लड़ाई है। कभी 25 साल तक BMC पर शासन करने वाली अविभाजित शिवसेना अब एक बार फिर मुंबई की सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है।

    BMC देश के सबसे अमी नगर निगम है और इसका बजट कई छोटे राज्यों से भी ज्यादा है। आखिरी बार इसके चुनाव फरवरी 2017 में हुए थे। ऐसे में इस बार का चुनाव सिर्फ स्थानीय राजनीति नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है।

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    BMC जिसे आधिकारिक तौर पर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई (MCGM) कहा जाता है, उसकी स्थापना 1873 में हुई थी। आजादी के बाद 1948 में यहां पहली बार वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव हुए। समय के साथ इसके वार्डों की संख्या बढ़ती गई1963 में 140, 1982 में 170 और 1991 में 221 वार्ड बने। देश की आर्थिक राजधानी होने के कारण BMC के चुनाव अक्सर विधानसभा चुनावों से भी ज्यादा अहम माने जाते हैं।

    राज ठाकरे के साथ गठबंधन, लेकिन राह आसान नहीं

    मराठी वोट को एकजुट करने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) से गठबंधन किया है। राज ठाकरे ने 2005 में शिवसेना छोड़ी थी और 2006 में MNS बनाई थी। हालांकि यह गठबंधन भावनात्मक तौर पर मजबूत दिखता है, लेकिन जमीन पर इसकी चुनावी ताकत को लेकर सवाल बने हुए हैं। Sena (UBT) को कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    शिवसेना को अक्सर 'BMC पर काबिज पार्टी' कहा गया, लेकिन सच्चाई यह है कि उसने कभी अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं किया। 1985 में पहली बार जीत मिली थी, तब 170 में से 74 सीटें आईं। 1997 में पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा और 221 में से 103 सीटें आईं। इसके बाद सीटें लगातार घटीं और 2017 में सिर्फ 84 पर आ गईं।

    BJP का उभार और शिवसेनाकी गिरती ताकत

    पहले शिवसेना की सहयोगी रही BJP अब महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। BMC में BJP की सीटें 2017 में बढ़कर 82 हो गई थीं, जो शिवसेना से सिर्फ दो कम थीं। अब BJP पहली बार BMC पर कब्जा करने की तैयारी में है।

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    2022 की पार्टी टूट से उद्धव ठाकरे को बड़ा नुकसान हुआ। न सिर्फ सरकार गई, बल्कि पार्टी का संगठन और पारंपरिक वोट बैंक भी बंट गया। 2019 में संयुक्त शिवसेना को 16% वोट मिले थे। 2024 में दोनों गुट मिलकर 20% से ज्यादा वोट लाए जिसमें शिंदे गुट को 12% और उद्धव गुट को 10% वोट मिले।

    मराठी वोट की हकीकत

    राज ठाकरे की MNS को अक्सर तेज बयानबाजी के लिए जाना जाता है, लेकिन चुनावी सफलता सीमित रही है। 2009 में 13 विधायक और 2012 में BMC में 27 सीटेंइसके बाद पार्टी कोई बड़ा असर नहीं दिखा सकी।

    मुंबई में मराठी आबादी भी उतनी नहीं है जितनी आमतौर पर मानी जाती है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, शहर की सिर्फ 35% आबादी की मातृभाषा मराठी है, जबकि 25% हिंदी बोलने वाले हैं। ऐसे में सिर्फ“मराठी अस्मिता के सहारे चुनाव जीतना आसान नहीं।

    मुस्लिम वोट और नया सवाल

    पहले मुस्लिम मतदाता शिवसेना से दूरी बनाए रखते थे, लेकिन 2019 में महाविकास आघाड़ी (MVA) बनने के बाद यह बदला। BJP को रोकने और उद्धव ठाकरे की नरम छवि के कारण मुस्लिम वोट शिवसेना (UBT) की ओर गया।

    CSDS के मुताबिक, 2024 के विधानसभा चुनाव में MVA को 55% मुस्लिम वोट मिले, जबकि BJP गठबंधन को 22%। अब सवाल यह है कि MNS जैसे दूसरे हिंदुत्ववादी दल के साथ गठबंधन के बाद क्या मुस्लिम वोट शिवसेना (UBT) के साथ बना रहेगा। 2011 के अनुसार, मुंबई में मुस्लिम आबादी 21% है।

    असली परीक्षा

    मुंबई की हर मानसून में जलभराव की समस्या आज भी बनी हुई है। भारी खर्च और कई परियोजनाओं के बावजूद हालात नहीं बदले। 25 साल तक BMC पर शिवसेना का शासन रहा, इसलिए यह मुद्दा सीधे उसकी प्रशासनिक साख से जुड़ा है और शिवसेना (UBT) के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

    राजनीति में कहा जाता है कि 1+1 कभी-कभी 11 बन जाता है। ठाकरे परिवार का फिर साथ आना मराठी पहचान और भावनाओं को छू सकता है। शिवसेना (UBT) के 20 विधायकों में से 10 मुंबई से हैं। छह सीटों पर पार्टी ने शिंदे गुट को हराया भी है, जिससे संकेत मिलता है कि शहर में उसका आधार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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    आगे की राह

    'वचननामा- शब्द ठाकरेनचा' नाम के साझा घोषणापत्र में गठबंधन ने वादा किया है कि मुंबई की जमीन सिर्फ मुंबईकरों के लिए इस्तेमाल होगी। इसके अलावा BMC की अलग हाउसिंग अथॉरिटी, 100 यूनिट मुफ्त बिजली, घरेलू सहायिकाओं और कोली महिलाओं को 1500 रुपयेसहायता, महिलाओं के लिए शौचालय और 700 वर्ग फुट तक के घरों पर प्रॉपर्टी टैक्स माफी जैसे वादे किए गए हैं।

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