कांग्रेस ने शुरू किया 45 दिवसीय 'मनरेगा बचाओ संग्राम', 25 फरवरी तक जारी रहेगा आंदोलन
कांग्रेस ने मनरेगा को निरस्त करने के विरोध में 45 दिवसीय 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान शुरू किया है, जो 25 फरवरी तक चलेगा। यह अभियान 'वीबी-जी राम जी' क ...और पढ़ें

शनिवार को सभी जिला मुख्यालयों में प्रेस वार्ता आयोजित की गई
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संप्रग शासनकाल के ग्रामीण रोजगार कानून मनरेगा को 'निरस्त' करने के विरोध में कांग्रेस ने शनिवार को 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान 'मनरेगा बचाओ संग्राम' शुरू किया और हर जिले में प्रेसवार्ता आयोजित की। यह आंदोलन 25 फरवरी तक जारी रहेगा। विपक्षी दल 'वीबी-जी राम जी' कानून को वापस लेने, मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में अधिकार-आधारित कानून के रूप में बहाल करने तथा काम के अधिकार, और पंचायतों के अधिकार को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
शनिवार को सभी जिला मुख्यालयों में प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें बताया गया कि संसद के शीतकालीन सत्र में किस तरह मनरेगा को निरस्त कर उसके स्थान पर वीबी-जी राम जी अधिनियम पारित किया गया। रविवार 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों में एक दिन का उपवास और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, कांग्रेस इस संघर्ष को तब तक जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जब तक कि हम काम, आजीविका और जवाबदेही के उस अधिकार की बहाली हासिल नहीं कर लेते, जिसे नरेन्द्र मोदी सरकार ने मनरेगा को ध्वस्त करके छीन लिया है।12 से 29 जनवरी तक सभी ग्राम पंचायतों में चौपाल और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसके बाद काम के अधिकार की मांग को लेकर 30 जनवरी को वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा।
सात से 15 फरवरी तक विधानसभाओं का घेराव किया जाएगा, जबकि राष्ट्रव्यापी आंदोलन के समापन से पहले 16 से 25 फरवरी के बीच चार बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी। कांग्रेस ने 'वीबी-जी राम जी' कानून को पूरी तरह से वापस लिए जाने और मनरेगा को बहाल करने की मांग की है। विपक्षी दल ने कहा है कि जहां निरस्त किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन दिल्ली केंद्रित था, वहीं मनरेगा बचाओ संग्राम पंचायत, ब्लाक, जिला और राज्य केंद्रित होगा।
गौरतलब है कि विकसित भारत- गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) या 'वीबी-जी राम जी' को पिछले महीने संसद से पारित किया गया था। 21 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस विधेयक पर अपनी स्वीकृति दी, जिससे यह एक कानून बन गया है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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