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    'डैडी' की विरासत को झटका, अरुण गवली की दोनों बेटियों की BMC चुनाव में करारी हार

    Updated: Fri, 16 Jan 2026 04:24 PM (IST)

    मुंबई की राजनीति में गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली के परिवार को बीएमसी चुनाव 2026 में बड़ा झटका लगा है। उनकी दोनों बेटियां, गीता गवली और योगिता गवली, ...और पढ़ें

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    डैडी की विरासत को झटका अरुण गवली की दोनों बेटियों की BMC चुनाव में करारी हार (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुंबई की राजनीति में कभी मजबूत पकड़ रखे वाले गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली के परिवार को बीएमसी चुनाव 2026 में बड़ा झटका लगा है। उनकी दोनों बेटियां गीता गवली और योगिता गवली नगर निगम चुनाव हार गई हैं। यह कार गवली परिवार के घटने राजनीतिक प्रभाव का संकेत मानी जा रही है।

    अरुण गवली की पार्टी अखिल भारतीय सेना की उम्मीदवार गीता गवली को बायकुला के वार्ड 212 में समाजवादी पार्टी की अमरीन शहजान अब्रगानी ने हराया। वहीं, उनकी दूसरी बेटी योगिता गवली को वार्ड 207 में बीजेपी के उम्मीदवार रोहिदास लोखंडे से हार का सामना करना पड़ा। दोनों बहनों की हार को गवली परिवार के लिए डबल झटका माना जा रहा है, क्योंकि एक समय बायकुला इलाके में उनका खासा प्रभाव रहा है।

    'डॉन नहीं, डैडी की बेटियां'

    चुनाव से पहले गवली बहनों ने कहा था कि लोग उन्हें 'डॉन की बेटियां' नहीं, बल्कि 'डैडी की बेटियां' मानते हैं। उनका कहना था कि बायकुला की गदड़ी चॉल में लोग अरुण गवली को आज भी उम्मीद और भरोसे के साथ देखते हैं। समर्थक अरुण गवली को प्यार से 'डैडी' कहकर बुलाते हैं और मानते हैं कि उन्होंने लोगों की कई समस्याओं का समाधान किया है।

    अरुण गवली 1970 के दशक में मुंबई के अडंरवर्ल्ड में उभरे थे। वह और उनके भाई किशोर 'बायकुलाकंपनी' नाम के गिरोह का हिस्सा थे, जो बायकुला, परेल और साट रास्ता इलाके में सक्रिय था। 1988 में गवली ने गिरोह की कमान संभाली और 80-90 के दशक में दाऊद इब्राहिम के गिरोह से उनकी जबरदस्त दुश्मनी रही।

    चिंचपोकली से विधायक रहा अरुण गवली

    1980 के दशक में अरुण गवली को शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे का राजनीतिक संरक्षण मिला, लेकिन 1990 के दशक के मध्य में दोनों के बीच मतभेद हो गए। इसके बाद गवली ने अपनी पार्टी बनाई और 2004 से 2009 तक चिंचपोकली से विधायक रहे। 2008 में एक शिवेना पार्षद की हत्या के मामले में उन्हें जेल भेजा गया था। करीब 17 साल जेल में बंद रहने के बाद पिछले साल सितंबर में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया।

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