अमित शाह की सुरक्षा के लिए दौड़ पड़े मार्शल... लोकसभा में ऐसा क्या हुआ जो मच गया हंगामा?
लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जिनमें प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री या किसी मंत्री पर गंभीर आरोप लगते हैं और वे न्यायिक हिरासत में रहते हैं तो उन्हें पद छोड़ना होगा। बिल पेश करते समय विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया और कागज़ के टुकड़े फेंके। अमित शाह ने कहा कि सरकार बिल को जेपीसी को भेजने के लिए तैयार है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को तीन अहम विधेयक पेश किए। विधेयक के तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या फिर किसी मंत्री पर 5 साल से अधिक सजा के प्रावधान वाले केस में आरोप लगता है और अगर वह तीस दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं तो उन्हें पद छोड़ना होगा।
सांसदों ने कागज के टुकड़े अमित शाह की ओर फेंके
अमित शाह जब सदन में इस बिल को पेश कर रहे थे तो उस दौरान विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। इतना ही नहीं विपक्षी नेताओं ने अमित शाह की तरफ बिल की कॉपी फाड़ कर फेंक दी। वहीं, कागज के टुकड़े अमित शाह की ओर उछाले। अमित शाह ने ये भी कहा कि सरकार इस बिल को जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव रखती है।
VIDEO | Parliament Monsoon Session: Opposition MPs tear copies of three bills introduced by Union Home Minister Amit Shah and throw paper bits towards him in Lok Sabha. Speaker Om Birla adjourns the House amid uproar. #ParliamentMonsoonSession #MonsoonSession
— Press Trust of India (@PTI_News) August 20, 2025
(Source: Third… pic.twitter.com/aAY12oBIFV
इसके बावजूद विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। इतना ही नहीं विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री का माइक मोड़ने की कोशिश भी की। सदन के अंदर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। लोकसभा की वेल में नारेबाजी की शुरुआत टीएमसी सांसदों ने की। बिल पेश होते ही कल्याण बनर्जी ने नारेबाजी शुरू कर दी।
'मैंने गिरफ्तारी से पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया था'
विपक्ष के विरोध के बीच अमित शाह ने खुद अपना उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति में शुचिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है और हम अपनी जिम्मेदारी से न भागे।
अमित शाह ने कहा, "गुजरात में मैं मंत्री तो मेरे ऊपर आरोप लगे। मैंने पद से इस्तीफा दिया और कोर्ट के आदेशों का पालन किया। इसके बाद मैंने दोबारा जिम्मेदारी तब संभाली, जब आरोपों से बरी हो गया और संविधान के तहत मुझे पद हासिल करने का अधिकार मिला।
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