'अभी भी बहुत देर नहीं हुई...', इजरायल-ईरान संघर्ष को लेकर 'भारत की चुप्पी' से सोनिया गांधी नाराज; मोदी सरकार से क्या की अपील?
सोनिया गांधी ने शनिवार को गाजा में इजरायल के विनाश और ईरान पर मोदी सरकार की चुप्पी की आलोचना की और कहा कि भारत के सैद्धांतिक रुख और मूल्यों को त्याग दिया गया है। उन्होंने कहा कि अभी भी बहुत देर नहीं हुई है। भारत को आवाज बुलंद करनी चाहिए और पश्चिम एशिया में संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए उपलब्ध हर राजनयिक मंच का उपयोग करना चाहिए।
कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने इजरायल-ईरान संघर्ष पर चिंता जाहिर की।
पीटीआई, नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को गाजा में इजरायल के विनाश और ईरान पर मोदी सरकार की चुप्पी की आलोचना की और कहा कि भारत के सैद्धांतिक रुख और मूल्यों को त्याग दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अभी भी बहुत देर नहीं हुई है। भारत को आवाज बुलंद करनी चाहिए और पश्चिम एशिया में संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए उपलब्ध हर राजनयिक मंच का उपयोग करना चाहिए। सोनिया ने पश्चिम एशिया को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी आलोचना की।
मौजूदा सरकार ने भारती की कूटनीतिक परंपराओं को त्याग दिया: सोनिया गांधी
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित लेख में आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने इजरायल और फलस्तीन के रूप में दो राष्ट्र वाले समाधान से जुड़े भारत के सैद्धांतिक रुख को त्याग दिया है। उन्होंने आरोप लगाया, 'इजरायल द्वारा गाजा में तबाही और अब बिना किसी कारण ईरान पर सैन्य हमलों के खिलाफ भारत की चुप्पी साफ करती है कि मौजूदा सरकार हमारे नैतिक और कूटनीतिक परंपराओं को त्याग दिया है। इससे जाहिर होता है कि न केवल चुप्पी साध ली गई है बल्कि अपने मूल्यों को भी छोड़ दिया गया है।'
उन्होंने कहा कि 13 जून को दुनिया ने एक बार फिर एकतरफा सैन्य कार्रवाई के खतरनाक परिणामों को देखा, जब इजरायल ने ईरान के खिलाफ हमला किया। कांग्रेस ईरान की धरती पर इन बमबारी और लक्षित हत्याओं की ¨नदा कर चुकी है। सोनिया ने कहा कि ईरान लंबे समय से भारत का मित्र रहा है और हम गहरे सभ्यतागत संबंधों से जुड़े हैं।
उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि 1994 में ईरान ने कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत की आलोचना करने वाले एक प्रस्ताव को रोकने में मदद की थी।
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