Year Ender 2024: किसान आंदोलन, सुखबीर को सजा तो CM मान की सेहत ने दी दगा, पंजाब के लिए कैसा रहा ये साल?
Punjab Year Ender 2024 पंजाब के लिए साल 2024 काफी उतार-चढ़ावों से भरा रहा। किसानों का आंदोलन पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल को सजा तो इस साल सीएम भगवंत मान की सेहत भी खराब रही। वहीं पंजाब की सियासत में कई बड़े उलटफेर देखने को मिले। इस साल पंजाब में चुनावी सरगर्मियां भी जोरों पर रहीं। आइए सभी घटनाक्रमों को सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। Punjab Year Ender 2024: वर्ष 2024 पंजाब के लिए ‘दो’ कदम आगे ‘चार’ कदम पीछे चलने जैसा रहा। पूरे साल सियासी उठापटक की नई कहानियां लिखता पंजाब लगातार आंदोलनों से भी ‘दो’-’चार’ होता रहा। धर्म, राजनीति, प्रशासन और सामाजिक ताने-बाने पर गहरे प्रभाव छोड़ने वाली घटनाओं ने प्रदेश को सुर्खियों में बनाए रखा। पूरा साल चुनावी गतिविधियों से भी गुलजार रहा।
सभी दल सरगर्म रहे, सक्रिय दिखे। शिअद चुनाव में भले ही पिछड़ गया हो, लेकिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से उपजे विवादों को लेकर सुर्खियों में रहा। बात अकाल तख्त पर शीर्ष नेतृत्व की पेशी और धार्मिक सजा से लेकर सुखबीर पर गोली चलने तक पहुंची। किसान सबसे अधिक चर्चा में रहे।
एमएसपी की गारंटी को लेकर शुरू हुआ संघर्ष मरणव्रत तक अब भी जारी है। पुलिस की कार्यशैली कठघरे में रही, जबकि बड़े अफसरों की नियुक्तियों से लेकर कुछ मंत्रियों को हटाने तक सरकार के कई फैसले आश्चर्यजनक रहे। इस बीच, सड़क सुरक्षा फोर्स जैसे कुछ निर्णय उम्मीदें जगाने वाले भी रहे
विवादों के 'बादल'
गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के ‘बादल’ भी कितने ‘घने’ हैं। सुखबीर के ऊपर से ये बादल छंटने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। श्री अकाल तख्त साहिब के सामने माफी भी मांग ली, वहां से लगी धार्मिक सजा भी भुगत ली, फिर भी कोई न कोई विवाद इस ‘बादल’ को और घना कर देता है।
श्री अकाल तख्त साहिब से मिली धार्मिक सजा से उनके पक्ष में बना माहौल एक अन्य जत्थेदार से टकराव में जाता रहा। सुखबीर ने साल खत्म होते-होते जो किया, वही काम यदि वह पहले कर लेते तो शायद बात कुछ और होती।
श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष सभी फैसलों के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करने, बेअदबी और डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख को माफी दिलवाने वाले आरोप पर गुनाह कबूल करने और पार्टी की अध्यक्षता छोड़ने का विलंब से लिया गया फैसला फिलहाल उनके पक्ष में नहीं दिख रहा।
पार्टी के नेतृत्व को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। अब उनकी पार्टी का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह अंदाजा लगाना कठिन है। इन सबके बीच धार्मिक सजा भुगतने के दौरान आतंकी नारायण सिंह चौड़ा की गोली से सुरक्षाकर्मी ने सुखबीर को तो बचा लिया, लेकिन इस गोली के श्री हरिमंदिर साहिब के द्वार पर लगने से जो कलंक लगा वह जल्दी मिटने वाला नहीं है।
मुख्यमंत्री के पैरों में फिरकी
मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए यह वर्ष काफी व्यस्तता से भरा रहा। कभी वह चुनावी चक्रव्यूह रचते दिखे तो कभी विपक्ष के बनाए चक्रव्यूह से खुद को बाहर निकालते नजर जाए।
कभी पंजाब में ही तो कभी दूसरे राज्यों में पार्टी के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए भी दौड़ते-भागते नजर आए। इस बीच उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं आईं।
साल के दूसरे महीने में ही किसान सभी फसलों पर एमएसपी की गारंटी की मांग को लेकर शंभू और खनौरी बॉर्डर पर धरने पर बैठ गए। मामले को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री पूरी तरह सक्रिय दिखे। वह केंद्र सरकार के समक्ष किसानों के वकील के रूप में उतरे, हालांकि, मामला हल नहीं हुआ और किसानों का संघर्ष साल खत्म होते-होते और तीव्र हो गया।
इसी वर्ष लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पूरे जोश में दिखे और 13-0 से यह चुनावी जंग जीतने का खम ठोका, हालांकि स्कोर 3-10 के रूप में विपक्ष के पक्ष में आया। जालंधर विधानसभा का उपचुनाव जरूर मुख्यमंत्री के लिए राहत लेकर आया।
हालांकि चार विधानसभा सीटों में से एक बरनाला में विपक्ष ने जीत दर्ज की। इस उठापटक के बीच मुख्यमंत्री को दो बार स्वास्थ्य लाभ के लिए अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ा। कह सकते हैं कि मुख्यमंत्री के पांवों में जैसे फिरकी लगी रही।
मजीठिया की काट कहां से लाएं
बिक्रम सिंह मजीठिया वह नाम है जिसने सरकार के नाक में दम करके रखा। प्रतिदिन पोस्ट करके सरकार पर निशाना साधते हैं। सरकार ने उन पर सख्ती की, जेल भी भिजवाया, लेकिन वह भला कहां दबने वाले हैं। सबसे पहले वह एक ऐसा पेन ड्राइव लेकर सामने आए जिसमें कहा गया कि उसमें तत्कालीन स्थानीय निकाय मंत्री बलकार सिंह की आपत्तिजनक वीडियो है।
बलकार सिंह की कैबिनेट से छुट्टी हो गई। सुखबीर पर जब आतंकी चौड़ा ने हमला किया तो इसे विफल बनाने का श्रेय प्रदेश सरकार और पंजाब पुलिस ने लेने का प्रयास किया, पर मजीठिया इस मामले में ऐसे-ऐसे वीडियो और तथ्य लेकर सामने आए कि पंजाब पुलिस को जवाब देते नहीं बना।
धरने पंजाब में नई बात नहीं
फरवरी में लोकसभा चुनाव से पहले सभी 23 फसलों पर एमएसपी की गारंटी को लेकर शुरू हुआ धरना अब मरणव्रत तक पहुंच गया है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल एक महीने से अधिक समय से आमरण अनशन पर बैठे हैं। भले ही 32 किसान संगठनों का उन्हें समर्थन न हो, पर इस बार यह ‘वाल’ (दीवार) टूटती नजर नहीं आ रही। डल्ले‘वाल’ इरादे से डोल नहीं रहे। सुप्रीम कोर्ट भी प्रयास कर रहा है कि वह अनशन तोड़ दें, पर यह ‘वाल’ है कि टूटती ही नहीं।
जाखड़ ने बदली पार्टी, पर नतीजा वही
सुनील जाखड़ ने कांग्रेस इसलिए छोड़ी क्योंकि जब वह मुख्यमंत्री बनने की कतार में पहले नंबर पर थे तब उन्हें पीछे केवल इसलिए धकेल दिया गया क्योंकि वह पगड़ी नहीं पहनते। इससे वह इतने व्यथित हुए थे कि उन्होंने राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी थी। हालांकि बाद में उन्होंने भाजपा के साथ वापसी की।
भाजपा ने भी उन्हें कद के अनुरूप पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी। जाखड़ ने भी पूरी वफादारी निभाई, लेकिन यहां भी वफा रास नहीं आई। केंद्र में पंजाब से जब एक मंत्री बनाने की बात आई तो चुनाव हारे रवनीत बिट्टू को केंद्रीय राज्य मंत्री बना दिया गया।
पंजाब की सियासत से गायब सिद्धू
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह आज इस दुनिया में नहीं हैं। अपने दस साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल में अगर उनके खिलाफ सबसे ज्यादा कड़वे शब्द किसी ने कहे तो वह नवजोत सिद्धू थे। कभी उनके कार्यकाल को ‘मुन्नी से ज्यादा बदनाम’ बताया तो कभी ‘मौनी बाबा’ कहा गया।
आज जब डॉ. मनमोहन सिंह अलविदा कह गए हैं तो सिद्धू उनके अंतिम संस्कार पर सबसे ज्यादा कसीदे काढ़ते नजर आए। पंजाब की सियासत से गायब सिद्धू वक्त के साथ अपने शब्दों को भी घुमा लेते हैं। है न कमाल...। हालांकि, अपने शब्दों की बाजीगरी पिछले दिनों वह क्रिकेट कमेंट्री में दिखाते दिखे।
रातोंरात बदल गए ठाठ...
बेअदबी के मामले को लेकर मुखर रहे कुंवर विजय प्रताप सिंह की अब अपनी ही पार्टी के साथ इसी मामले पर जंग जारी है। आइजी का पद छोड़कर जब राजनीति में आए तो उन्हें लगा कि यहां अफसरों की धौंस नहीं है, पर उन्हें क्या पता था कि यहां तो सिर खुजलाने के लिए भी हाईकमान से पूछना पड़ता है।
करें तो क्या करें? इंटरनेट मीडिया पर ही दिल का गुबार निकाल लिया। बोल दिया, ‘मैंने सुनीता केजरीवाल से कहा है कि पिछली बार 92 विधायक जीते थे, आज चुनाव हो जाएं तो एक भी नहीं जीतेगा।’ तो क्या कुंवर को यह लगने लगा है कि वह भी चुनाव जीत नहीं सकते?
पंजाब में थानों पर धमाके
पंजाब के आठ थानों और चौकियों पर आतंकियों ने ग्रेनेड फेंके। चार दिसंबर तो भुलाए नहीं भूलने वाला। सुबह श्री दरबार साहिब के गेट के पास सेवा निभा रहे सुखबीर पर गोली चली और रात को मजीठा थाने में धमाका। पुलिस ने इसे भी बम धमाका नहीं माना, लेकिन डीएसपी ने जो तथ्य दिए वह हैरान कर देने वाले थे।
डीएसपी और एसएचओ ने कहा, बम नहीं फटा है, मुलाजिम मोटरसाइकिल में हवा भर रहा था, टायर फट गया है। डीएसपी ने यह भी कह दिया-मुलाजिम रात को ही फटे टायर के साथ मोटरसाइकिल लेकर भी चला गया।
आप का कमाल है
आप का भी कमाल है। शिअद से लगातार दूसरी बार जीते डॉ. सुखविंदर सुक्खी पार्टी को छोड़कर आप में चले गए। दलबदल कानून के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं। यानी उन्हें उपचुनाव का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि सरकार मेहरबान है। यही गलती आप के विधायक शीतल अंगुराल ने की थी। वह भाजपा में गए और बाद में अपना इस्तीफा मंजूर न करने के लिए स्पीकर से भी कहा...पर ऐसा हो न सका।
माननीयों की पत्नियां हारीं
राजनीति में परिवारवाद का नाता काफी पुराना है। हाल ही में चार विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए। कांग्रेस के प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की पत्नी अमृता वड़िंग गिद्दड़बाहा से और गुरदासपुर के सांसद व पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा की पत्नी जतिंदर कौर डेरा बाबा नानक से कांग्रेस उम्मीदवार बनीं।
राजा और रंधावा दोनों ही इन विधानसभा क्षेत्रों से लगातार जीत की हैट्रिक लगा चुके थे। कद्दावर नेताओं की पत्नियां अपना पहला चुनाव लड़ रही थीं तो सबकी नजरें यहीं टिकी थीं, लेकिन रंधावा और राजा अपनी पत्नियों की नईया मझधार से निकालने में कामयाब नहीं हो पाए।
वित्त आयुक्त बने कृष्ण कुमार
वैसे तो पंजाब में आइएएस काडर के 231 अधिकारी हैं, लेकिन कृष्ण कुमार का तो नाम ही काफी है। जिस महकमे में जाते हैं अधीनस्थ थर्राने लगते हैं। पिछली सरकार के दौरान जब उन्हें स्कूल का शिक्षा सचिव लगाने की बात आई तो अध्यापकों के प्रदेश भर से फोन आने लगे और पूछने लगे-क्या यह सच है।
कई और विभागों में काम करने के बाद उन्हें वित्त आयुक्त लगा दिया गया है। पहले महीने ही राज्य का टैक्स कलेक्शन 63% बढ़ गया। अब इसमें कितनी भूमिका कृष्ण कुमार की है, यह विभाग ही जाने, लेकिन एक बार तो लगने लगा कि उनके महकमे में आने से टैक्स चोरियां रुक गई हैं। उनका परिस्थितियों के आगे न झुकने वाला अंदाज चर्चा में रहता है।
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