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    मेक इन इंडिया से ली प्रेरणा, जज्बे और तकनीक से बदली साइकिल इंडस्ट्री की तस्वीर; चीन को मात दे रहे लुधियाना के ‘लक्की’ इनोवेशन

    लुधियाना के उद्योगपति हरसिमरजीत सिंह लक्की ने मेक इन इंडिया अभियान के तहत साइकिल उद्योग में क्रांति ला दी है। उन्होंने तीन प्रमुख उत्पादों - बुशलेस चेन डिस्क ब्रेक और आईएसआई मार्क रिफ्लेक्टर के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की जिससे चीन पर निर्भरता कम हुई है। लक्की इंजीनियर्स द्वारा निर्मित ये उत्पाद अब वैश्विक मानकों को पूरा करते हैं।

    By Jagran News Edited By: Sushil Kumar Updated: Mon, 02 Jun 2025 06:24 PM (IST)
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    लुधियाना के ‘लक्की’ इनोवेशन का जलवा। फोटो जागरण

    मुनीश शर्मा, लुधियाना। साइकिल, जो एक समय भारत में आम जन की सवारी मानी जाती थी, अब ग्लोबल टेक्नोलाजी और क्वालिटी इनोवेशन का प्रतीक बन रही है। भारतीय साइकिल उद्योग लंबे समय तक ‘जुगाड़ू’ तकनीक पर निर्भर रहा, लेकिन अब वैश्विक मानकों पर खरा उतरने की कोशिशें जोर पकड़ रही हैं।

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    चीन जहां सालाना 13 करोड़ साइकिलों का उत्पादन कर पहले पायदान पर है, वहीं भारत दो करोड़ साइकिलों के साथ दूसरे स्थान पर है। हालांकि अब ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की प्रेरणा से देश की साइकिल इंडस्ट्री तकनीक और नवाचार के पथ पर आगे बढ़ रही है।

    साइकिल इंडस्ट्री में मेक इन इंडिया क्रांति के केंद्र में हैं लुधियाना के उद्योगपति और पूर्व एयरफोर्स पायलट हरसिमरजीत सिंह लक्की, जिन्होंने देश की साइकिल इंडस्ट्री को न केवल आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दिया, बल्कि तीन अहम उत्पादों के माध्यम से चीन के एकाधिकार को भी तोड़ दिया।

    हरसिमरजीत सिंह की कंपनी ‘लक्की इंजीनियर्स’ ने हाल ही में तीन ऐसे प्रमुख साइकिल उत्पादों में आत्मनिर्भरता हासिल की है, जिन पर पहले चीन का वर्चस्व था। ये हैं- बुशलेस चेन, डिस्क ब्रेक और आइएसआइ मार्क रिफ्लेक्टर।

    इन तीनों उत्पादों के निर्माण से भारत को चीन और ताइवान से आयात की निर्भरता से मुक्ति मिल रही है। साथ ही निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि यदि सोच राष्ट्र निर्माण और दिशा तकनीक की हो तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि विश्व बाजार में भी परचम फहरा सकता है।

    भारत की पहली बुशलेस चेन निर्माता कंपनी

    लक्की इंजीनियर्स ने भारत की पहली बुशलेस चेन बनाई है। पहले यह तकनीक पूरी तरह चीन और ताइवान से आयातित होती थी।

    आज कंपनी हर माह करीब दो लाख चेन का उत्पादन कर रही है, जिनकी 10-15 प्रतिशत कम लागत और बेहतर गुणवत्ता के कारण अमेरिका तक में इनकी मांग है। लक्की बताते हैं कि भारत में केवल उनके पास ही यह बुशलेस चेन बनाई जा रही है।

    डिस्क ब्रेक को मिली यूरोपियन मान्यता

    फैंसी और हाई परफार्मेंस साइकिलों में डिस्क ब्रेक की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। लक्की इंजीनियर्स में अब हर माह एक लाख डिस्क ब्रेक का निर्माण हो रहा है। भारत में बनने वाली डिस्क ब्रेक में उनकी कंपनी की करीब 30-35 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

    इन डिस्क ब्रेक को यूरोपियन स्टैंडर्ड से मान्यता भी मिल चुकी है। ऐसे में विदेशी आयात पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ अब भारत की मजबूत पकड़ इस क्षेत्र में बन रही है।

    केंद्रीय मंत्री की चुनौती बनी प्रेरणा, बनाने लगे रिफ्लेक्टर

    कुछ समय पहले जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक बैठक में सवाल उठाया कि ‘क्या भारत में रिफ्लेक्टर नहीं बन सकते?’ तब कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद लक्की ने खुद आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाई और विश्वस्तरीय तकनीक से लैस रिफ्लेक्टर प्लांट लगाया। अब उनकी कंपनी हर महीने तीन लाख आइएसआइ मार्क रिफ्लेक्टर बना रही है।

    वायुसेना से इंडस्ट्री तक ‘स्वदेशी उड़ान’

    हरसिमरजीत सिंह लक्की ने आठ वर्षों तक भारतीय वायुसेना में पायलट अफसर के रूप में देश की सेवा की। डिफेंस बैकग्राउंड से आने के बाद जब उन्होंने वर्ष 1996 में साइकिल इंडस्ट्री में कदम रखा, तब भारतीय बाजार चीन के सस्ते उत्पादों से भरा था।

    उन्होंने पहले फ्री व्हील और क्रोस्टप ब्रेकअप, फिर चेन और अन्य पार्ट्स का निर्माण शुरू किया और गुणवत्ता के बल पर साउथ अफ्रीका जैसे देशों में भी नाम कमाया। लक्की मानते हैं कि लगातार सीखते रहना ही सफलता की कुंजी है। वे अक्सर देश-विदेश के औद्योगिक दौरों पर जाते हैं और नई तकनीकों को आत्मसात करते हैं।

    उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के प्रोडक्शन प्रोसेस को समझा और उसे भारतीय जरूरतों के अनुरूप ढाला। यही उनकी कामयाबी का राज है।