'डल्लेवाल को कुछ हुआ तो ईंट से ईंट बजा देंगे...', किसान आंदोलन को SKM का समर्थन, अब एकता का प्रस्ताव लेकर जाएंगे नेता
संयुक्त किसान मोर्चा भारत अब खनौरी और शंभू बॉर्डर पर संघर्ष कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक के पास एकता प्रस्ताव लेकर जाएगा। इसके लिए एसकेएम भारत की तरफ से छह सदस्य कमेटी बनाई गई है जो शुक्रवार को खनौरी बॉर्डर पर एसकेएम गैर-राजनीतिक के नेताओं के पास जाएंगे। इस समय उनके साथ सौ किसानों का एक जत्था भी जाएगा।

दिलबाग दानिश, मोगा। Punjab News: संयुक्त किसान मोर्चा भारत अब खनौरी और शंभू बॉर्डर पर संघर्ष कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक के पास एकता प्रस्ताव लेकर जाएगा। इसके लिए एसकेएम भारत की तरफ से छह सदस्य कमेटी बनाई हुई है जो शुक्रवार को खनौरी बॉर्डर पर एसकेएम गैर-राजनीतिक के नेताओं के पास जाएंगे।
इस समय उनके साथ सौ किसानों का एक जत्था भी जाएगा। इसका एलान आज यहां हुई किसान महापंचायत के दौरान स्टेज से छह सदस्य कमेटी की तरफ से किया गया है।
कमेटी के सदस्य बलवीर सिंह राजेवाल, रमिंदर पटियाला, जोगिंदर उगराहां, राकेश टिकैत, दर्शन पाल और कृष्णा प्रसाद की तरफ से संयुक्त तौर पर यह प्रस्ताव सामने रखा।
8 प्रस्ताव लेकर जाएंगे नेता
प्रस्ताव पढ़ते समय जोगिंदर उगराहां ने कहा कि हम 8 प्रस्तावों का उक्त एकता प्रस्ताव पत्र लेकर शुक्रवार को एसकेएम गैर-राजनीतिक नेताओं के पास जाएंगे।
महापंचायत के दौरान एसकेएम भारत की स्टेज से लगभग हर किसान नेता ने खनौरी में आमरण अनशन पर चल रहे जगजीत सिंह डल्लेवाल के पक्ष में बातें कहीं और सरकार को चेतावनी दी कि अगर उन्हें कुछ हुआ तो पंजाब के किसान ईंट से ईंट बजा देंगे। जबकि पहले अंबाला में हुई किसान पंचायत में ऐसा कुछ भी नहीं था और राकेश टिकैत का खनौरी और शंभु बॉर्डर पर चल रहे संघर्ष पर बयान विरोध में था।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेलाल (फोटो जागरण)
स्टेज से प्रस्ताव पढ़कर सुनाते समय जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि एसकेएम एक विशाल संगठन है, जिसने हमेशा सोच समझकर किसानों के हित में फैसले लिए हैं। सभी संगठनों की तरफ से इस प्रस्ताव को पारित करने के लिए एक बैठक कर फैसला लिया गया था।
एकजुटता से किया जाएगा संघर्ष
इसके अलावा सांझे तौर पर संघर्ष करते हुए केंद्र सरकार द्वारा विश्व संस्थ की नीतियों तहत बनाए गए राष्ट्रीय कृषि मंडीकरण नीति प्रस्ताव को रद्द करवाने की मांग को पहले नंबर पर रखा जाना चाहिए।
इसके अलावा एसकेएम-गैर-राजनीतिक, एसकेएम भारत और किसान मजदूर संघर्ष माेर्चा अपने अपने संघर्ष अपने तरीके से लड़ने के लिए आजाद रहेंगे मगर यह यकीनी बनाएंगे कि किसी के भी प्रोग्राम के समानातर समागम ना रखे जाएं, बल्कि प्रयास होना चाहिए कि सभी संघर्ष एकजुटता से लड़े जाएं।
इससे पहले एसकेएम की तरफ से वॉट्सऐप पर एसकेएम गैर-राजनीतिक को एकजुटता का प्रस्ताव भेजा गया था मगर इसे मंजूर नहीं किया गया था।
अब पहली बार है कि एसकेएम भारत के नेता खुद जाकर एसकेएम गैर-राजनीतिक के नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद 15 जनवरी को पटियाला के गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब में दोनों ही फोर्मों की एक संयुक्त मीटिंग का प्रस्ताव भी एसकेएम गैरराजनीतिक के समक्ष रखा जाएगा।
नए प्रस्ताव के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करने का एलान
महापंचायत में राष्ट्रीय कृषि विपणन नीति के मसौदे को ऐतिहासिक संघर्ष से खारिज किये गए तीन कानूनों का नया और खतरनाक रूप बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार एक बार फिर साम्राज्यवाद के तहत संवैधानिक संघवाद की भावना के खिलाफ चली गयी है।
विश्व व्यापार संगठन और उसके कॉर्पोरेट मित्रों की नीतियों ने देश के किसानों पर हमला बोल दिया है, जिसे मूकदर्शक बनकर नहीं देखा जा सकता।
उन्होंने राज्य सरकारों से संघवाद की रक्षा के लिए इस मसौदे को खारिज करने के लिए विधानसभाओं में प्रस्ताव पारित करने की मांग की।
संयुक्त किसान मोर्चा के प्रवक्ताओं ने विपक्षी दलों की प्रांतीय सरकारों से इस मामले में पहल करने का आग्रह करते हुए इस मसौदे को खारिज करने के संबंध में पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये बयान का स्वागत किया।
उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार तुरंत विधानसभा का सत्र बुलाए और इस मसौदे को खारिज करने का प्रस्ताव पारित करने का अपना वादा पूरा करे। नेताओं ने किसानों से आह्वान किया कि इस प्रारूप को रद्द कराने के लिए किसान आंदोलन की व्यापक एकता बनाकर केंद्र सरकार के खिलाफ मजबूत संघर्ष के लिए तैयार रहें।
अब आंदोलन को पूरे देश में ले जाने की जरूरत: राकेश टिकैत
इस दौरान किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली में सभी संगठनों ने एकजुट होकर संघर्ष किया था और फिर से उसी तरह के संघर्ष की जरूरत आन पड़ी है।
मैंने पहले भी कहा था कि पंजाब में किए जाने वाले आह्वान से पंजाब के लोग ही परेशान होंगे। जिसे गलत तरीके से पेश किया गया था।
पहले भी किसान महापंचायत करके किसानों को लामबद किया गया था और फिर से इसी तरह की किसान महा पंचायत पूरे देश में की जाएंगीं और एक बड़ा संघर्ष खड़ा किया जाएगा। इसकी शुरुयात आज से हो गई है। अब जरूरत आन खड़ी हुई है कि सभी को एकजुट होना चाहिए।
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