वैष्णो देवी की यात्रा तब तक अधूरी, जब तक न देख लें शिवखोड़ी का ये रहस्यमयी द्वार
अगर आप मानसिक शांति और महादेव के प्रति असीम श्रद्धा रखते हैं, तो जम्मू यात्रा में शिवखोड़ी को शामिल करना न भूलें। यह केवल एक गुफा नहीं, बल्कि प्रकृति ...और पढ़ें

आपने किए शिवखोड़ी के दर्शन? (Image Source: AI-Generated)
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर जब हम जम्मू-कश्मीर की धार्मिक यात्रा की योजना बनाते हैं, तो सबसे पहले माता वैष्णो देवी का नाम जुबां पर आता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि माता के दरबार से मात्र कुछ ही दूरी पर महादेव का एक ऐसा धाम है, जिसे देखे बिना आपकी यह आध्यात्मिक यात्रा अधूरी मानी जाती है? हम बात कर रहे हैं- शिवखोड़ी की, जिसे 'देवताओं की गुफा' भी कहा जाता है।
शिवखोड़ी: जहां शिव आज भी बसते हैं
जम्मू के रियासी जिले में स्थित यह गुफा किसी चमत्कार से कम नहीं है। 'खोड़ी' का अर्थ होता है गुफा और यह गुफा करीब 200 मीटर लंबी है। कहा जाता है कि इस गुफा का आकार भगवान शिव के डमरू जैसा है। गुफा के अंदर जाने का रास्ता संकरा है, लेकिन जैसे-जैसे आप अंदर बढ़ते हैं, एक विशाल कक्ष खुलता है जहाँ साक्षात महादेव विराजमान हैं।

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भस्मासुर से जुड़ा पौराणिक रहस्य
स्थानीय मान्यताओं और कथाओं के अनुसार, जब राक्षस भस्मासुर ने भगवान शिव को ही भस्म करने की कोशिश की थी, तब महादेव ने स्वयं को बचाने के लिए इस गुफा का निर्माण किया था। यहां महादेव और भस्मासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ था। अंत में, भगवान विष्णु ने 'मोहिनी' का रूप धरकर भस्मासुर का अंत किया। गुफा के अंदर बनी आकृतियाँ आज भी उस काल की गवाह लगती हैं।
गुफा के अंदर के चमत्कार
शिवखोड़ी की सबसे खास बात यहां का प्राकृतिक शिवलिंग है। यह कोई इंसान द्वारा बनाया गया शिवलिंग नहीं है, बल्कि गुफा की छत से चूने का पानी टपक-टपक कर इस पर गिरता है, जो प्राकृतिक अभिषेक जैसा दिखता है। इसके अलावा गुफा की दीवारों पर आप शेषनाग, गणेश जी और कार्तिकेय जैसी आकृतियां भी देख सकते हैं, जिन्हें देखकर ऐसा लगता है कि मानो सारा देवलोक यहीं सिमट आया हो।
स्वर्ग का रास्ता?
इस गुफा के बारे में एक और गहरा रहस्य यह है कि इसके अंदर कई संकरे रास्ते हैं। कहा जाता है कि इनमें से एक रास्ता सीधे अमरनाथ गुफा की ओर निकलता है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से अब इन रास्तों को बंद कर दिया गया है।
कैसे पहुंचें और कब जाएं?
शिवखोड़ी, कटरा से लगभग 70-80 किलोमीटर दूर है। माता वैष्णो देवी के दर्शन के बाद आप टैक्सी या बस से यहां पहुंच सकते हैं। वैसे तो यहां साल भर श्रद्धालु आते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि पर यहां का नजारा अलौकिक होता है।
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