Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Pradosh Vrat के दिन करें शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ, महादेव की कृपा से शुरू होंगे अच्छे दिन

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 09:00 PM (IST)

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2026) के दिन महादेव के संग मां पार्वती की पूजा करने से साधक के जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    Lord Shiv: कैसे करें भगवान शिव को प्रसन्न? (Image Source: AI-Generated)

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, 16 जनवरी (Pradosh Vrat 2026 Date) को प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना संध्याकाल में करने का विधान है और विशेष चीजों के द्वारा शिवलिंग का अभिषक करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, त्रयोदशी तिथि पर महादेव का अभिषेक करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और महादेव सभी मुरादें पूरी करते हैं।

    अगर आप प्रदोष व्रत के दिन महादेव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पूजा के दौरान सच्चे मन से शिव मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्तोत्र का पाठ करने से सुख-समृद्धि और धन-धान्य में वृद्धि होती है। लंबी आयु आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही साधक के अच्छे दिनों की शुरुआत होती है।

    lord shiv  (1)

    ॥ शिव मृत्युंजय स्तोत्र ॥

    रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनं

    शिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम्।

    क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवंदितं

    चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥

    पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं

    भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्।

    भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं

    चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥

    मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरं

    पंकजासनपद्मलोचनपूजितांगघ्रिसरोरुहम्।

    देवसिद्धतरंगिणी करसिक्तशीतजटाधरं

    चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥

    कुण्डलीकृतकुण्डलीश्वरकुण्डलं वृषवाहनं

    नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम्।

    अंधकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकं

    चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥

    यक्षराजसखं भगाक्षिहरं भुजंगविभूषणं

    शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम्।

    क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं

    चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥

    भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणं

    दक्षयज्ञविनाशिनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम्।

    भुक्तिमुक्तिफलप्रदं निखिलाघसंघनिबर्हणं

    चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥

    भक्तवत्सलमर्चतां निधिमक्षयं हरिदम्बरं

    सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनूपमम्।

    भूमिवारिनभोहुताशनसोमपालितस्वाकृतिं

    चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥

    विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परं

    संहरन्तमथ प्रपंचमशेषलोकनिवासिनम्।

    क्रीडयन्तमहर्निशं गणनाथयूथसमाव्रतं

    चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥

    रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठमुमापतिम्।

    नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥

    कालकण्ठं कलामूर्तिं कालाग्निं कालनाशनम्।

    नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥

    नीलकण्ठं विरुपाक्षं निर्मलं निरूपद्रवम्।

    नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥

    वामदेवं महादेवं लोकनाथं जगद्गुरुम्।

    नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥

    देवदेवं जगन्नाथं देवेशमृषभध्वजम्।

    नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥

    अनन्तमव्ययं शान्तमक्षमालाधरं हरम्।

    नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥

    आनन्दं परमं नित्यं कैवल्यपदकारणम्।

    नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥

    स्वर्गापवर्गदातारं सृष्टिस्थित्यन्तकारिणम्।

    नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति॥

    ॥ इति श्रीपद्मपुराणान्तर्गत उत्तरखण्डे श्रीमृत्युञ्जयस्तोत्रं सम्पूर्णम्। ॥

    शिव मंत्र (Shiv Mantra)

    1. सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।

    उज्जयिन्यां महाकालं ओम्कारम् अमलेश्वरम्॥

    परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।

    सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥

    वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।

    हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥

    एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।।

    2. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

    यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत के दिन करें पार्वती चालीसा का पाठ, जीवन के सभी दुखों का होगा अंत

    यह भी पढ़ें- Pradosh Vrat 2026: अगर हाथ में नहीं टिकता पैसा, तो प्रदोष व्रत के दिन जरूर करें इस स्तोत्र का पाठ

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्नमाध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।