Gita Updesh: मोटिवेशन के लिए पढ़ें गीता के ये श्लोक, जीवन को मिलेगी नई राह
महाभारत युद्ध के दौरान युद्धभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उसके कर्तव्य का बोध करवाया था। श्रीमद्भगवत गीता में निहित उपदेश आज भी लोगों का मार्गदर्शन करते हैं। ऐसे में आज हम आपको अर्थ सहित गीता के कुछ ऐसे श्लोक बताने जा रहे हैं जो आपको मोटिवेशन से भर देंगे।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध की भूमि में अर्जुन को गीता के उपदेश दिए थे, जो आप भी प्रासंगिक बने हुए हैं। गीता के ये उपदेश लोगों को सही राह दिखाने, दुख से उबारने और प्रोत्साहित करने का काम करते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही श्लोक बताने जा रहे हैं।
1. ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।
सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
इस श्लोक का अर्थ है कि अगर हम किसी विषय-वस्तु के बारे में सोचते रहते हैं, तो हमें उससे लगाव हो जाता है। इससे मन में उस वस्तु को पाने की इच्छा पैदा होती है और इच्छा पूरी न होने पर क्रोध की आता है। इसलिए, मनुष्य को किसी भी चीज के ज्यादा लगाव रखने से बचना चाहिए। अगर आप इस बात का ध्यान रखेंगे, तो क्रोध और दुख से दूर रहेंगे।
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2. सत्त्वानुरूपा सर्वस्य श्रद्धा भवति भारत।
श्रद्धामयोऽयं पुरुषो यो यच्छ्रद्धः स एव सः।।
इस श्लोक में कहा गया है कि, व्यक्ति जैसा विश्वास करता है, या जैसा सोचता है, वैसा ही बन जाता है। इसलिए मनुष्य को खुद पर भरोसा रखना चाहिए और अपनी सोच को सकारात्मक रखना चाहिए। इस श्लोक से शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को मुश्किल-से-मुश्किल परिस्थिति में भी अपनी सोच सही रखनी चाहिए, इससे आपको उस परिस्थिति से निकलने में मदद मिल सकती है।
3. चिन्तया जायते दुःखं नान्यथेहेति निश्चयी।
तया हीनः सुखी शान्तः सर्वत्र गलितस्पृहः॥
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि दुख की असल वजह चिंता है। चिंता से ही दुख की उत्पत्ति होती है। जो व्यक्ति इस सीख को अपने मन में उतार लेता है वह चिंता से मुक्त होकर सुखी, शांत और सभी इच्छाओं से मुक्त रहता है ।
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4. सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि।
प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति।।
इस श्लोक में कहा गया है कि हर व्यक्ति अपनी प्रकृति के अनुसार काम करता है। इंसान की प्रकृति को बदला नहीं जा सकता। इसलिए हर व्यक्ति को अपने कौशल के अनुसार ही काम करना चाहिए, तभी वह उस कार्य में सफलता हासिल कर सकता है। वहीं अगर आप कोई काम बेमन या अपनी प्रवृति से हटकर करते हैं, तो उस कार्य में सफलता मिलने की संभावना कम हो जाती है।
5. मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत।।
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि जीवन में सुख और दुख का आना एक स्वभाविक बात है। ऐसे में व्यक्ति को दुख से परेशान होने की जगह उसे सहना सीखना चाहिए। अगर आप ऐसा करना सीख जाते हैं, तो आपको जीवन की कई परेशानियों का हल मिल जाता है।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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