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    Gita Updesh: अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं गीता के ये श्लोक, बेहतर भविष्य की ओर बढ़ेंगे कदम

    Updated: Mon, 28 Apr 2025 10:16 AM (IST)

    हर माता-पिता की यही इच्छा होती है कि वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार दें ताकि वह एक अच्छा इंसान बने। ऐसे में आज हम आपको गीता के कुछ ऐसे उपदेश बताने जा रहे हैं जिन्हें आपको अपनों बच्चे को जरूर पढ़ाना चाहिए। इस श्लोको में बताया गया है कि कैसे व्यक्ति उपना चरित्र और भविष्य दोनों अच्छा बना सकता है।

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    Gita Updesh: बच्चों के लिए गीता के उपदेश।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को महाभारत की युद्धभूमि में गीता के उपदेश दिए थे, जिन्हें सर्वश्रेष्ठ ज्ञान में शामिल किया जाता है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं, कि श्रीमद्भगवत गीता की प्रसिद्धि केवल भारत तक ही नहीं बल्कि, विदेशों में भी फैल चुकी है। ऐसे में आप इसके कुछ श्लोकों का अर्थ अपने बच्चों को भी समझा सकते हैं, जो उसके लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

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    गीता के बहुमूल्य श्लोक

    1. कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

    मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

    इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि तुम्हारा अधिकार केवल कर्म पर है, न कि कर्मों के फल पर, इसलिए व्यक्ति को फल की इच्छा छोड़कर कर्म करते रहना चाहिए। बच्चों में यह आदत पाई जाती है कि अगर वह कोई काम करते हैं, तो उन्हें उसके परिणाम का बेसब्री से इंतजार रहता है। ऐसे में अगर मनमुताबिक परिणाम न मिले, तो वह उदास भी हो जाते हैं। ऐसे में यह श्लोक अपने बच्चों को जरूर पढ़ाना चाहिए।

    2. ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते।

    सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥

    इस श्लोक में कहा गया है कि हम जिस विषय-वस्तु के बारे में सोचते रहते हैं, उससे हमें उससे लगाव हो जाता है। इससे उस वस्तु को पाने की इच्छा पैदा होती है और उसके पूरा न होने पर क्रोध की उत्पत्ति होती है। इसलिए, मनुष्य को किसी भी चीज के अत्यधिक लगाव से दूर रहना चाहिए।

    बच्चों में यह आदत खासतौर से देखी जाती है कि जल्दी ही किसी चीज से लगाव रखने लगते हैं और उनकी इच्छा पूरी न होने पर दुखी भी होते हैं। ऐसे में यह श्लोक उनके लिए मददगार हो सकता है।

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    (Picture Credit: Freepik)

    3. सत्त्वानुरूपा सर्वस्य श्रद्धा भवति भारत।

    श्रद्धामयोऽयं पुरुषो यो यच्छ्रद्धः स एव सः।।

    इस श्लोक में बताया गया है कि, व्यक्ति जैसा विश्वास करता है, वैसा ही बन जाता है, इसलिए मनुष्य को खुद पर विश्वास रखना चाहिए और अपनी सोच सकारात्मक रखनी चाहिए। गीता का यह ज्ञान आपके बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।