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    पितरों को प्रसन्न करने का खास मौका है मौनी अमावस्या, कृपा प्राप्ति के लिए करें ये काम

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 10:25 AM (IST)

    मौनी अमावस्या तिथि, साल की महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा का जल अमृतमय हो जाता है, इसलिए इस दिन पर गंग ...और पढ़ें

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    Mauni Amavasya 2026 (Picture Credit: Freepik)

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) के नाम से जाना जाता है। यह तिथि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसी दिन पर माघ मेले में तीसरा प्रमुख स्नान भी किया जाता है। इस दिन किए गए गंगा स्नान करने से साधक को पुण्य फलों की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही यह तिथि पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए भी विशेष महत्व रखती है।

    नहीं सताएगा पितृ दोष

    हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान से साधक के जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान के लिए जरूर जाएं। अगर आपके लिए ऐसा करना संभव नहीं है, तो आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं।

    इससे भी विशेष लाभ मिल सकता है। इसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण व दान पुण्य करें। आप इस दिन पर सफेद रंग के वस्त्रों या फिर गर्म कपड़ों का दान कर सकते हैं। जिससे आपको पितृ दोष से भी राहत मिल सकती है।

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    (AI Generated Image)

    जरूर करें ये काम

    मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद एक पात्र में जल लेकर उसमें कुश, अक्षत और काले तिल मिलाएं। इसके बाद दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त जल अर्पित करें और इस दौरान 'ॐ पितृभ्यो नमः' मंत्र का जप करें। इस मंत्र का जप कम-से-कम 11 बार करना चाहिए। साथ ही इस दिन पर ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और यदि संभव हो तो हरिद्वार, गया जैसे तीर्थ स्थलों पर जाकर दान करें। इन सभी कार्यों को करने से पितरों को शांति मिलती है।

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    (Picture Credit: Freepik) 

    मिलेगी पितरों की कृपा

    हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि पीपल के वृक्ष में पितरों का निवास होता है। ऐसे में माघ अमावस्या को शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं। इसके साथ ही दूध व गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद 7 बार पीपल की परिक्रमा करें। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।