Radha Ashtami 2025: इस गांव को भी माना जाता है राधा रानी का जन्मस्थान, जानें इससे जुड़ी प्रमुख बातें
राधा रानी (Radha Rani) का जन्म यमुनापार के रावल गांव में हुआ था जहां उनका बाल रूप विराजमान है। राजा वृषभानु को वे कमल के फूलों के बीच मिलीं। यहां हर साल राधा अष्टमी का भव्य जन्मोत्सव मनाया जाता है। बाल रूप में राधा रानी का पहला चमत्कार तब हुआ जब उन्होंने बाल कृष्ण को देखकर पहली बार अपनी आंखें खोलीं।

दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। भगवान श्री कृष्ण की प्राण प्यारी राधा रानी का जन्म बरसाना में नहीं बल्कि यमुनापार के रावल गांव में हुआ था। यही वह पावन स्थल है जहां राधा रानी अपने बाल रूप में विराजमान हैं और जहां उनका हर साल भव्य राधा अष्टमी जन्मोत्सव मनाया जाता है। श्रद्धालु उन्हें स्नेह और भक्ति से लाड़ली जी के नाम से पुकारते हैं। कहा जाता है कि राजा वृषभानु यमुना में स्नान करने गए थे। इसी दौरान उन्होंने कमल के फूलों के बीच बालस्वरूप राधा रानी को देखा।
उनकी दिव्यता और सौंदर्य देखकर राजा अत्यंत आनंदित हुए और उसी समय से रावल गांव में राधा रानी का बाल रूप स्थापित हो गया। यहां आज भी भक्त उनकी दिव्यता, प्रेम और भक्ति का अनुभव करने आते हैं और अपने हृदय को आध्यात्मिक सुख से भरते हैं।
राधा अष्टमी का महत्व
राधा अष्टमी के दिन बरसाना में कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। सुबह से ही भक्तजन राधा रानी के मंदिर में दर्शन के लिए कतारों में लग जाते हैं। इस दिन मंदिर में राधा रानी की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसमें उन्हें सुंदर वस्त्र, आभूषण और ताजगी भरे फूलों से सजाया जाता है।
इसके बाद, भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की मूर्तियों को पालने में झुलाया जाता है। भक्तजन इस दिन राधा रानी के जन्मोत्सव को मनाने के लिए रासलीला, भजन और कीर्तन का आयोजन करते हैं। कई लोग दान-पुण्य करते हैं और जरूरतमंदों को भोजन कराते हैं।
राधा अष्टमी के अवसर पर विशेष पकवान भी बनाए जाते हैं, जैसे खीर, पूरी और लड्डू। इन्हें पहले राधा रानी को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है।
बाल रूप का अद्भुत चमत्कार
राधा रानी भगवान श्री कृष्ण से साढ़े 11 महीने बड़ी थीं, लेकिन जन्म के बाद उनकी आंखें नहीं खुलीं। राजा वृषभानु और रानी कीर्ति ने कई बड़े वैद्य और चिकित्सकों से उनका इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जब गोकुल में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया, तब राजा वृषभानु रानी कीर्ति के साथ बाल कृष्ण को देखने गए। राधा रानी घुटनों के बल चलकर भगवान श्री कृष्ण के पालने तक पहुंचीं और जैसे ही उन्होंने श्री कृष्ण को देखा, उनकी आंखें पहली बार खुलीं।
यही घटना उनके जीवन का पहला दिव्य चमत्कार माना जाता है। इस घटना से ही उनके प्रेम और भक्ति का सन्देश प्रारंभ होता है।
यह भी पढ़ें- Radha Ashtami 2025: भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में राधा जी की रही है अनमोल भूमिका
यह भी पढ़ें: Radha Ashtami 2025: राधा रानी की आठ प्रिय सखियां और उनकी अद्भुत लीलाएं
लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।