बजरंगबली के 'हनुमान' बनने के पीछे छिपा है बड़ा रहस्य, आप जानते हैं उनका असली नाम?
क्या हनुमान जी का असली नाम 'हनुमान' ही था? जानिए मारुति नंदन के हनुमान बनने की पूरी कहानी। साथ ही, वह रहस्यमयी घटना के बारे में जब देवराज इंद्र के वज् ...और पढ़ें

क्या आपको पता है अंजनिपुत्र का असली नाम? (Image Source: AI-Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हनुमान जी, जिन्हें हम प्यार से बजरंगबली, पवनपुत्र या संकट मोचन कहते हैं, उनके पराक्रम की गाथाएं हर घर में सुनी जाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या 'हनुमान' उनका असली नाम था? या फिर बचपन में उन्हें किस नाम से पुकारा जाता था?
रामचरितमानस के सुंदरकांड और वाल्मीकि रामायण के पन्नों में हनुमान जी के व्यक्तित्व के कई अनसुने पहलू छिपे हैं। आइए जानते हैं मारुति नंदन के 'हनुमान' बनने की दिलचस्प कहानी।
बचपन का वो प्यारा नाम: मारुति
हनुमान जी के जन्म के समय उनका नाम 'हनुमान' नहीं था। पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, उनके पिता केसरी और माता अंजनी ने उनका नाम 'मारुति' रखा था। मारुति का अर्थ होता है 'मारुत' (वायु) का पुत्र। बचपन में मारुति बहुत चंचल और नटखट थे। उनके पास जन्म से ही असीमित शक्तियां थीं, जिनका उपयोग वे खेल-खेल में करते रहते थे।
सूर्य को निगलने की वो घटना
एक दिन की बात है, नन्हे मारुति को जोरों की भूख लगी थी। उन्होंने आसमान में चमकते हुए लाल सूर्य को देखा और उन्हें लगा कि यह कोई मीठा फल है। वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में वर्णित कथा के अनुसार, मारुति ने एक ही छलांग में सूर्य देव की ओर प्रस्थान किया। यह देखकर देवराज इंद्र घबरा गए। उन्हें लगा कि यह बालक सूर्य को निगल जाएगा, जिससे ब्रह्मांड में अंधेरा छा जाएगा।

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अपनी घबराहट में इंद्र ने मारुति पर अपने अस्त्र 'वज्र' से प्रहार कर दिया। वह वज्र सीधे बालक मारुति की ठोड़ी (Jaw) पर लगा, जिससे वे अचेत होकर गिर पड़े।
कैसे पड़ा 'हनुमान' नाम?
संस्कृत में ठोड़ी को 'हनु' कहा जाता है और वज्र के प्रहार से उनकी ठोड़ी टूट (मान) गई थी। विद्वानों और धर्मशास्त्रियों के अनुसार, इसी चोट के कारण उनका नाम 'मारुति' से बदलकर 'हनुमान' पड़ा। इस घटना के बाद जब वायुदेव क्रोधित हुए और उन्होंने सृष्टि की वायु रोक दी, तब सभी देवताओं ने बालक हनुमान को अपनी-अपनी विशेष शक्तियां प्रदान कीं, जिससे वे अजेय बन गए।
सुंदरकांड और 'सुंदर' नाम का रहस्य
सिर्फ हनुमान ही नहीं, उनका एक और नाम 'सुंदर' भी था। रामचरितमानस के प्रसंगों के आधार पर, माता अंजनी उन्हें प्यार से 'सुंदर' कहकर पुकारती थीं। यही कारण है कि रामायण के उस अध्याय का नाम 'सुंदरकांड' रखा गया जिसमें हनुमान जी की वीरता और लंका दहन का वर्णन है। यह एकमात्र ऐसा कांड है जिसका नाम किसी पात्र या स्थान के बजाय हनुमान जी के एक विशेष नाम (सुंदर) पर आधारित है।
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