Shab-E-Barat 2026: गुनाहों की माफी की रात शब-ए-बारात आज, 15 दिन बाद रखा जाएगा पहला रोजा
शब-ए-बारात (Shab-e-Barat) इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 15वीं रात को मनाई जाती है। इसके मुताबिक आज रात इबादत की रात के लिए चांद का दीदार होगा। इस ...और पढ़ें

Shab E Barat 2026: शब-ए-बारात डेट और टाइम। (Picture Credit- AI Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Shab-e-Barat 2026 Date: इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात काफी अहम होती है। इस्माली कैलेंडर के मुताबिक, शाबान का महीना इबादत और तैयारी का अहम दौर माना जाता है और इसी महीने के 15वीं रात को शब-ए-बारात मनाई जाती है, जिसे मग़फ़िरत (माफी) और तक़दीर (फैसले) की रात भी कहा जाता है। इस बार 3 फरवरी को इबादत की यह रात मनाई जाएगी।
मान्यताओं के अनुसार, इस मुबारक रात अल्लाह अपने बंदों पर रहमत फरमाते हैं और दुआएं कुबूल की जाती हैं। साल 2026 में शब-ए-बारात फरवरी की शुरुआत में पड़ने की उम्मीद है, जिससे यह भी संकेत मिलता है कि रमजान का पाक महीना अब ज्यादा दूर नहीं है।

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कब है शब-ए-बारात 2026? (Shab-E-Barat Date And Time)
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, शब-ए-बारात शाबान महीने की 14वीं और 15वीं तारीख की दरमियानी रात को मनाई जाती है। साल 2026 में शब-ए-बारात 4 या 5 फरवरी की रात होने की संभावना है। हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि चांद दिखने (रुयत-ए-हिलाल) पर निर्भर करेगी।
शब-ए-बारात की अहमियत
इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, यह वह रात है जब अल्लाह अपने बंदों के आने वाले साल का लेखा-जोखा तय करते हैं। इस रात रिज़्क़ (अल्लाह की तरफ़ से मिलने वाली हर नेमत और रोज़ी), सेहत, जिंदगी और मौत से जुड़े फैसले लिखे जाने की मान्यता है। इसे निस्फ़-ए-शाबान भी कहा जाता है। इस रात मुसलमान समुदाय पूरी रात नमाज़, क़ुरान की तिलावत और दुआ-ए-मग़फ़िरत में मशग़ूल रहते हैं। लोग कब्रिस्तान जाकर अपने मरहूम अज़ीज़ों के लिए दुआ करते हैं।
इस दिन शुरू होगा रमज़ान (Ramadan Start Date)
शब-ए-बारात का आना इस बात का ऐलान माना जाता है कि इबादतों का सबसे पाक महीना रमज़ान बेहद करीब है। आमतौर पर शब-ए-बारात के करीब 15 दिन बाद रमज़ान शुरू हो जाता है। साल 2026 में रमज़ान का आग़ाज़ 17 या 18 फरवरी से होने की संभावना है, हालांकि इसकी भी अंतिम घोषणा चांद दिखने के बाद ही की जाएगी।
शब-ए-बारात के दिन क्या करते हैं?
इस रात पूरी रात नमाज़, क़ुरान पढ़ने और दुआएं करने की जाती हैं। इस मौके पर लोग अपने घरों में हलवा और दूसरे पकवान बनाकर गरीबों में बांटते हैं। मान्यता है कि इस रात शोर-शराबे से बचकर, ख़ामोशी और ख़ुलूस के साथ अल्लाह की इबादत की जाती है। अपने गुनाहों पर तौबा कर दिल से मग़फ़िरत की दुआ मांगना इस रात की सबसे बड़ी इबादत मानी जाती है।
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