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    कब और कैसे ऋषि दुर्वासा का श्राप माता अंजनी के लिए बन गया वरदान?

    ज्योतिष शास्त्र में कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति का उल्लेख है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति की कुंडली में मंगल ग्रह मजबूत होने पर सभी सुख मिलते हैं। वहीं मंगल ग्रह कमजोर होने पर ज्योतिष हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने की सलाह देते हैं। हनुमान जी का माता अंजनी थीं। उन्हें ऋषि दुर्वासा (Rishi Durvasa curse) से कपि बनने का श्राप मिला था। आइए पढ़ते हैं इससे जुड़ी कथा।

    By Kaushik Sharma Edited By: Kaushik Sharma Updated: Tue, 11 Feb 2025 02:25 PM (IST)
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    Lord Hanumnan: क्यों मिला माता अंजनी को श्राप

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Hanumnan Ji Birth Story: सनातन धर्म में मंगलवार के दिन राम जी के भक्त हनुमान जी की पूजा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विधिपूर्वक बजरंगबली की पूजा-अर्चना करने से जीवन में आ रहे दुख और संकट दूर होते हैं। साथ ही घर में सुख, समृद्धि एवं खुशियों का आगमन होता है।  

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    हनुमान जी की माता अंजनी को ऋषि दुर्वासा (Rishi Durvasa curse) से श्राप मिला था, जिसकी वजह से माता अंजनी अप्सरा से कपि (वानरी) बन गईं। क्या आप जानते हैं आखिर किस कारण माता अंजनी (Mata Anjani blessing) को कपि बनने का श्राप मिला? अगर नहीं पता, तो ऐसे में चलिए आपको बताएंगे इसकी वजह के बारे में।

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    पौराणिक कथा के अनुसार, माता अंजनी पूर्व जन्म में इंद्र देव की सभा में अप्सरा थीं। उन्हें पुंजिकस्थला के नाम से जाना जाता था। एक बार इंद्र देव ने एक सभा का आयोजन किया, जिसमें ऋषि दुर्वासा भी शामिल हुए। अप्सरा का स्वभाव नटखट और चंचल था। सभा में चर्चा के दौरान अप्सरा के नटखट स्वभाव और सभा में इधर-उधर घूमने की वजह से एक श्रषि के तप बाधा उत्पन्न हुई।

    अप्सरा का यह व्यवहार ऋषि दुर्वासा को अच्छा नहीं लगा। कई बार कहने के बाद भी अप्सरा ने बात को नहीं माना। ऐसे में ऋषि दुर्वासा को क्रोध आया और अप्सरा को श्राप दिया और कहा कि जिस प्रकार तू अप्सरा होकर सभा में बानरी बनकर बाधा उत्पन्न कर रही है। इसी तरह तू भी वानरी हो जाएगी। इसके बाद अप्सरा ने ऋषि दुर्वासा से अपनी गलती की माफी मांगी और इस श्राप से मुक्त होने का उपाय पूछा।  

    ऋषि दुर्वासा ने कहा कि अपने नटखट स्वभाव के कारण तेरा अगला जन्म वानर जाति में होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि देव-सभा होने के कारण तेरे गर्भ से एक शक्तिशाली बालक का जन्म होगा। ऋषि दुर्वासा के श्राप की वजह से अप्सरा ने अगला जन्म कपि के रूप में लिया। उनका नाम अंजनी पड़ा। फिर वानर राज केसरी नाम के वानर से इनका विवाह हुआ। इसके बाद माता अंजनी ने हनुमान जी को जन्म दिया।  

    ऐसे करें हनुमान जी को प्रसन्न

    अगर आप हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो मंगलवार के दिन स्नान करने के बाद विधिपूर्वक हनुमान जी की पूजा-अर्चना करें। इसके बाद बूंदी और फल का भोग लगाएं। साथ ही जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और सभी संकट दूर होते हैं।  

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।