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    मुख्य द्वार पर गणपति की मूर्ति लगाने से पहले जान लें ये नियम, वरना छिन सकती है सुख-शांति

    Updated: Wed, 07 Jan 2026 02:30 PM (IST)

    क्या आपने भी घर के दरवाजे पर गणेश जी की मूर्ति लगाई है? अगर हां, और आपको इससे जुड़े खास नियमों के बारे में नहीं पता है तो सतर्क हो जाएं। जानिए इसका पौ ...और पढ़ें

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    मेन डोर पर कैसे लगाएं गणेश जी की फोटो (Image Source: Freepik)

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनकी पूजा से होती है, ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो। सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए लोग अक्सर अपने घरों के मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति या चित्र लगाते हैं। लेकिन, वास्तु शास्त्र और पौराणिक कथाओं के अनुसार, मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति लगाते समय एक विशेष सावधानी बरतनी बहुत जरूरी है, वरना इसके विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं।

    भगवान गणेश मंगलकारी हैं, लेकिन उनकी स्थापना में की गई एक छोटी सी चूक सकारात्मक ऊर्जा की जगह नकारात्मकता ला सकती है। इसलिए, मुख्य द्वार पर गणेश जी की मूर्ति लगाते समय 'पीठ से पीठ' वाले नियम का पालन अवश्य करें।

    गणेश जी की पीठ और दरिद्रता का संबंध

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश के शरीर के अलग-अलग अंगों में अलग-अलग शक्तियों का वास होता है। गणेश जी के पेट में संपूर्ण ब्रह्मांड समाया हुआ है, उनके मस्तक पर ज्ञान है, लेकिन उनकी पीठ पर 'दरिद्रता' (अलक्ष्मी) का वास माना गया है।

    क्या हैं वास्तु के नियम

    वास्तु शास्त्र कहता है कि गणेश जी की पीठ कभी भी घर के अंदर की तरफ नहीं होनी चाहिए। यदि आप मुख्य द्वार के ठीक बाहर गणेश जी की मूर्ति लगाते हैं, तो उनकी पीठ घर की ओर हो जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में दरिद्रता का प्रवेश हो सकता है और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।

    Lord Ganesha

    (Image Source: AI-Generated)

    सही तरीका: 'चौखट के दोनों ओर'

    अगर आप मुख्य द्वार पर गणेश जी की प्रतिमा लगाना चाहते हैं, तो वास्तु के अनुसार एक विशेष नियम का पालन करना चाहिए:

    जुड़वां मूर्ति: अगर आपने द्वार के बाहर मूर्ति लगाई है, तो ठीक उसी स्थान पर द्वार के अंदर की तरफ भी गणेश जी की एक मूर्ति या चित्र लगाएं।

    पीठ से पीठ मिलाना: अंदर और बाहर वाली मूर्तियों की पीठ आपस में मिली होनी चाहिए। इससे भगवान की पीठ घर के अंदर नहीं दिखेगी और घर में सुख-समृद्धि का प्रवाह बना रहेगा।

    इन बातों का भी रखें ध्यान

    दृष्टि का महत्व: गणेश जी की दृष्टि हमेशा घर के भीतर रहनी चाहिए, ताकि उनका आशीर्वाद घर के सदस्यों पर बना रहे।

    सूंढ़ की दिशा: घर के मुख्य द्वार या घर के अंदर के लिए हमेशा बाईं ओर (Left) मुड़ी हुई सूंढ़ वाली गणेश प्रतिमा को शुभ माना जाता है, क्योंकि वे शांत और प्रसन्न मुद्रा में होते हैं।

    स्थान की शुद्धि: मुख्य द्वार पर जहां भी मूर्ति लगाएं, वहां सफाई का विशेष ध्यान रखें। उस जगह जूते-चप्पल ना रखें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।