90's के बच्चों का पहला सोशल मीडिया: क्या आपको याद है अपना Orkut?
90 के दशक में एक समय पर भारत में Orkut का वैसा ही जलवा हुआ करता था। जैसा आज फेसबुक का है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि अब Orkut कहां गया। क्या हुआ इस च ...और पढ़ें

हम यहां Orkut की कहानी बता रहे हैं।
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। अगर आपने 90 के दशक में जन्म लिया है और बचपन में इंटरनेट का इस्तेमाल किया है। तो शायद आप Orkut के बारे में जरूर जानते होंगे। लेकिन, क्या आपने सोचा कि अब ये आखिर कहां है, क्या ये अभी भी कहीं चल रहा है या इसे बंद कर दिया गया। आइए जानते हैं Orkut की कहानी।
Orkut की कहानी सोशल मीडिया ही हिस्ट्री में एक स्पेशल चैप्टर्स में से एक है। खासकर भारत में, जहां इस प्लेटफॉर्म ने कल्चरल तौर पर एक ऐसा मुकाम हासिल किया जो कहीं और कम ही देखने को मिलता है।
2004 में हुआ था लॉन्च
जनवरी 2004 में गूगल इंजीनियर ओरकुट बुयुक्कोकटेन (Orkut Büyükkökten) द्वारा लॉन्च किया गया, ऑरकुट को एक सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट के रूप में डिजाइन किया गया था जो रियल आइडेंटिटी, पर्सनल प्रोफाइल और ऑनलाइन कम्युनिटीज पर जोर देती थी। ऐसे समय में जब डिजिटल सोशल इंटरेक्शन अभी शुरुआती दौर में था, ऑरकुट ने फ्रेंड लिस्ट, टेस्टिमोनियल, प्रोफाइल 'स्क्रैप' और इंटरेस्ट-बेस्ड कम्युनिटीज जैसे फीचर्स पेश किए। शुरू में इसे यूनाइटेड स्टेट्स के लिए टारगेट किया गया था, लेकिन ये वहां ज्यादा सफल नहीं हो पाया। इसके बजाय, इसे दो देशों में अप्रत्याशित और जबरदस्त सफलता मिली। ये देश थे ब्राजील और भारत।
स्क्रैपबुक जैसे थे फीचर
भारत में, ऑरकुट बिल्कुल सही समय पर आया। जब 2000 के दशक के मिड में इंटरनेट कैफे, सस्ते ब्रॉडबैंड और ऑनलाइन एक्सपेरिमेंट करने के लिए युवा और शहरी आबादी का तेजी से विस्तार हुआ। इंडियन यूजर्स के लिए, ऑरकुट आमतौर पर उनका पहला सोशल मीडिया एक्सपीरिएंस था। ऑरकुट प्रोफाइल बनाना कॉलेज स्टूडेंट्स और युवा प्रोफेशनल्स के लिए एक जरूरी हिस्सा बन गया था। स्क्रैपबुक पब्लिक कन्वर्सेशन का काम करते थे, टेस्टिमोनियल सोशल वैलिडेशन का काम करते थे और कम्युनिटीज इंजीनियरिंग कॉलेजों से लेकर बॉलीवुड फ़नडम और रीजनल ह्यूमर ग्रुप तक फैली हुई थीं। ऑरकुट सिर्फ एक प्लेटफ़ॉर्म नहीं था। ये कैंपस लाइफ और अरबन यूथ कल्चर का एक डिजिटल एक्सटेंशन था।

भारत बना बड़ा बाजार
2006-2008 तक, भारत ऑरकुट के सबसे बड़े बाजारों में से एक बन गया था। इस प्लेटफॉर्म ने शुरुआती इंडियन ऑनलाइन बिहेवियर को शेप देने में एक बड़ी भूमिका निभाई, जिसमें डिजिटल फ्रेंडशिप, ऑनलाइन फ्लर्टिंग और यहां तक कि राजनीतिक या सामाजिक बहस भी शामिल थी। हालांकि, इसकी लोकप्रियता अपने साथ चुनौतियां भी लाई। फेक प्रोफाइल, प्राइवेसी की चिंताएं और कम्युनिटीज का मिसयूज। इससे कभी-कभी इससे रियल लाइफ में भी तनाव पैदा होने लगे। वैसे गूगल ने मॉडरेशन में सुधार करने और इंटरफेस को फिर से डिज़ाइन करने की कोशिश की। लेकिन, ये इनोवेशन धीमे थे।
फेसबुक का आना बना टर्निंग प्वाइंट
सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट टर्निंग पॉइंट फेसबुक के ग्लोबल राइज के साथ आया, जिसने एक क्लीनर डिजाइन, मजबूत प्राइवेसी कंट्रोल, थर्ड-पार्टी एप्स और एक तेजी से डेवलप होने वाला प्रोडक्ट रोडमैप पेश किया। इंडियन यूजर्स, जो मोबाइल-फर्स्ट होते जा रहे थे और ग्लोबली कनेक्टेड थे, बड़े पैमाने पर माइग्रेट करने लगे।
वहीं, Orkut स्मार्टफोन एरा को अडाप्ट करने के लिए स्ट्रगल करता रहा और अपने यंग यूजर्स को बनाए रखने में विफल रहा। सितंबर 2014 में, गूगल ने आधिकारिक तौर पर Orkut को बंद कर दिया। भारत के लिए इसका बंद होना एक युग के अंत होने जैसा था। वैसे ऑरकुट की प्रासंगिकता अब बची नहीं, लेकिन इसकी विरासत आज भी कायम है।
इसने लाखों इंडियंस को सोशल नेटवर्किंग से इंट्रोड्यूस कराया, शुरुआती डिजिटल कम्युनिटीज को शेप दिया और भारत में बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया अपनाने की फाउंडेशन रखी। पीछे मुड़कर देखें तो, भारत में Orkut सिर्फ एक वेबसाइट नहीं थी। बल्कि, सोशल मीडिया की पहली क्लास थी।

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