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    एआई का भविष्य: कंज्यूमर टेक्नोलॉजी, वेलनेस और स्मार्ट डिवाइस में दिखेगा बड़ा बदलाव

    By Brahmanand MishraEdited By: Subhash Gariya
    Updated: Thu, 15 Jan 2026 06:00 PM (IST)

    कंज्यूमर टेक्नोलॉजी में हो रहे इनोवेशन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालते हैं। यही कारण है कि टेक ट्रेंइ्स पर लोगों की नजर रहती है और नए बदलावों का ...और पढ़ें

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    एआई का भविष्य: उपभोक्ता तकनीक, वेलनेस और स्मार्ट डिवाइस में बड़ा बदलाव

    टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। बीते कुछ वर्षों से तकनीक के विकास और एआई की बढ़ती ताकत के चलते इंटरनेट के साथ यूजर्स का संबंध नया रूप ले रहा है। नई जानकारियां प्राप्त करने, तथ्यों का मूल्यांकन करने और परिवर्तन को महसूस करने, यहां तक कि कुछ भी याद रखने के तरीकों में तेजी से बदलाव आ रहा है। एल्गोरिदम की सुविधा और इंसानी आजादी के बीच एक लंबी जद्दोजहद चल रही है। चूंकि, विश्वास हो इनोवेशन की करेंसी है, इसलिए किसी भी तकनीकी नवाचार को स्थापित होने में लंबा समय लगता है।
     
    पूर्व में कई सारे तकनीकी नवाचार चर्चा में आए, लेकिन समय के साथ ओझल हो गए। बीते कुछ वर्षों से एआई सब कुछ बदल देने को तैयार है, पर विश्वास बहाली का उसका संघर्ष अभी भी जारी है। हालांकि, एआई का विकास आज उस मुकाम पर है, जहां आने वाले महीनों में मशीनी दिमाग को हम एक विश्वसनीय सहयोगी के रूप में विकसित होते देखेंगे, जो केवल सवालों का जवाब ही नहीं देगा, बल्कि कई सारे कार्यों को आसान बनाने, नया रचने और समस्याओं का समाधान निकालने में भी असरकारक साबित होगा।
     
    एआई की खूबियों के चलते आज कंज्यूमर टेक्नोलॉजी में हो रहे बदलाव लोगों में उत्सुकता जगा रहे हैं। स्मार्ट होम, फिटनेस टेक और इलेक्ट्रिक कार जैसे नवाचार हाल के महीनों में दुनियाभर चर्चा में रहे हैं। हालांकि, ये सभी तकनीकें अभी मैच्योर होने की स्टेज में हैं। साल 2026 में कंपनियां गैजेट्स को कितना उपयोगी बना पाएंगी, स्मार्टफोन की स्मार्टनेस किस हद तक बढ़ेगी और किस तरह के नए उपकरण सामने आएगे, इन सभी पर नजर रहेगी।

    कंप्यूटर से होगी इंसानों की तरह बात

    आने वाले दिनों में एक भरोसेमंद सहयोगी के रूप में यूजर एआई चैटबाट की सेवाएं ले सकेंगे। हालांकि, इस वर्ष एआई की आवाज की कृत्रिमता दूर होने और सार्वजनिक स्थानों पर कंप्यूटर से बातचीत करने के ट्रेंड की आहट मिलनी शुरू हो जाएगी। चैटजीपीटी और जेमिनी की आवाज को अधिक नेचुरल बनाने के लिए कंपनियां अनेक स्तरों पर काम कर रही हैं। इन खूबियों के चलते कन्वर्सेशन एआई से स्वाभाविक जुड़ाव बढ़ेगा। वहीं, एआई की प्रतिक्रिया से भ्रमित होने और भावनात्मक लगाव में फंस कर खुद को ही नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति भी बढ़ती दिखेगी।

    ऐसे कई सारे मामले हाल के महीनों में चर्चा में रह चुके हैं। हालांकि, लोग दशकों से सीरी, अलेक्सा और गूगल असिस्टेंट से बात करते रहे हैं, लेकिन इनका प्रयोग म्यूजिक प्ले करने और मौसम का हाल जानने जैसे बेसिक कार्यों तक ही सीमित रहा है। वहीं चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लाउड जैसे एडवांस एआई चैटबाट हेल्थकेयर, फाइनेंस, एजुकेशन, सेल्फ सर्विस, डेटा कलेक्शन, पर्सनलाइजेशन जैसे कई सारे कार्यों में उपयोगी साबित हो सकते हैं, बिल्कुल एक बुद्धिमान सहयोगी की तरह।

    बदलती वेलनेस की दुनिया

    जीवनशैली की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए लोगों का वेलनेस टेक की तरह जेसी से झुकाव बढ़ रहा है। वेलनेस भविष्य की उम्मीद नहीं बल्कि आज की जरूरत है। लोग आहार फिटनेस, नींद के विज्ञान और भावनात्मक नियंत्रण मामलों में ऐसे तरीकों की तलाश में हैं जो अस्पष्ट वादों के बजाय तुरंत राहत दें। पर्सनलाइज्ड हेल्थ कोच, न्यूट्रिशनिस्ट जैसे ट्रेंड अब लोकप्रिय हो रहे हैं।

    मेडिकली गाइडेड थेरेपी जैसे उपाय अब मेनस्ट्रीम कल्चर में जागरूकता का हिस्सा बन रहे हैं। वियरेबल टेक में एआई की खूबियों के जुड़ने से हाइपर पर्सनलाइजेशन, ग्रो-एक्टिव और प्रिवेंटिव केयर, हेल्थ डेटा विश्लेषण लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। वियरेबल और स्मार्ट डिवाइस एक तरह के एआई कोच के रूप में आपका सहयोग करने के लिए तैयार हो रही है।

    कैसा होगा वियरेबल टेक

    करीब दशक भर पहले पारदर्शी डिस्प्ले और कैमरा आदि खूबियों वाले हेडसेट 'गूगल ग्लास' ने सुर्खियां बटोरी थीं। कारण जो भी रहे हों, लेकिन यह आम यूजर्स को आकर्षित करने में पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ। स्मार्ट ग्लास का ट्रेंड एक बार फिर चर्चा में है। फोटो लेने, म्यूजिक सुनने जैसी सुविधाओं वाला मेटा रे-बैन ग्लास युवाओं को आकर्षित कर रहा है।

    इसका डिजिटल डिस्प्ले डेटा और एप्स को दिखाने में सक्षम है। यही कारण है कि एक बार फिर से गूगल और कई अन्य कंपनियां स्मार्ट ग्लासेज को पेश करने की तैयारी में हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि कंपनियां स्मार्टफोन के इतर अलग-अलग डिवाइसेज में एआई की खूबियों को आजमा रही हैं, ताकि पर्सनल कंप्यूटिंग को एक नए रूप में पेश किया जा सके। इस के अलावा स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड्स, स्मार्टक्लोदिंग, हियरिंग एड्स में भी इस वर्ष खास तरह का नवाचार होता दिखेगा। इसके आगे की राह ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (बीसीआई) भी तैयार होती दिख रही है।

    बदल रहा है वेब ब्राउजिंग का तरीका

    सर्च इंजन पर कुछ भी जानने का प्रयास करें, तो अब एआई जेनरेटेड रिप्लाई अवश्य मिलेगी। इसे डिसेबल करने का कोई ऑप्शन नहीं है। नए ब्राउजर कंटेंट की समरी बनाने, जटिल प्रश्नों का हल निकालने, टास्क को मैनेज करने और हाइपर रिलेवेंट सुझाव देने में सक्षम हैं। इंस्टाग्राम व वाट्सएप में भी मेटा का बिल्ट इन एआई चैटबाट ऐसी ही प्रतिक्रियाएं दे रहा है।

    माइक्रोसॉफ्ट अपने प्रोडक्ट में एआई को आजमा रहा है। यहां कोपायलट यूजर्स के सवालों पर प्रतिक्रिया देता है। वेब का एआई-फिकेशन इस वर्ष बढ़ेगा। गूगल जीमेल में एआइ की सुविधा जोड़ रहा है, तो वहीं वर्ड, एक्सेल आदि में कोपायलट की सुविधाएं मिलने लगी हैं।

    स्मार्टफोन की बढ़ती स्मार्टनेस

    नए खासकर फ्लैगशिप स्मार्टफोन में अब ऑन डिवाइस एआई का डीप इंटीग्रेशन चर्चा में बना रहेगा। इस वर्ष एपल की तरफ से पहला फोल्डेबल फोन पेश किया जा सकता है, तो वहीं सैमसंग, गूगल समेत अनेक कंपनियां फोल्डेबल सेगमेंट में नई खूबियों के साथ बाजार में उतरेंगी। हालांकि, फोल्डेबल फोन बहुत महंगा है और इसके इयूरेबल होने की आशंकाएं अभी बरकरार रहने वाली हैं। नए स्मार्टफोन में प्रोएक्टिव असिस्टेंट, पावरफुल फोटोग्राफी फीचर्स, नेक्स्ट जेनरेशन कनेक्टिविटी और मल्टीस्क्रीन सुविधाएं यूजर्स को आने वाले दिनों में अधिक आकर्षित करेंगी।

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