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    अब नहीं चलेगी स्कूलों की मनमानी, निजी प्रकाशकों की पुस्तक खरीदने का बनाया दवाब तो होगी कार्रवाई; BSA ने जारी किए आदेश

    By Sumit Kumar Dwivedi Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Thu, 15 Jan 2026 11:58 AM (IST)

    आगरा में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने निजी स्कूलों को 2026-27 सत्र से सरकारी निर्धारित किताबें अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। यह फैसला अभिभावकों पर ...और पढ़ें

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    सांकेतिक तस्वीर।

    जासं, आगरा। अभिभावकों और छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी प्राइवेट स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि अब शैक्षिक सत्र 2026-27 से सरकारी निर्धारित किताबें ही अनिवार्य होंगी।

    पिछले कई वर्षों से यह समस्या बनी हुई थी कि कई अशासकीय प्राइवेट प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल, चाहे वे सीबीएसई,आइसीएसई, यूपी बोर्ड या किसी अन्य बोर्ड से जुड़े हों, अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे थे। ये स्कूल एनसीईआरटी या एससीईआरटी या बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा तय की गई सरकारी पाठ्य-पुस्तकों की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोप रहे थे।

    ऐसा करके स्कूल प्रबंधन के साथ प्रकाशक कमीशन कमाते थे। बच्चों की पढ़ाई के नाम पर परिवारों की जेब पर अतिरिक्त खर्च आता था, जबकि सरकारी किताबें सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और मान्यता प्राप्त होती हैं।

    शासन के पहले से जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि स्कूलों को एनसीईआरटी या एससीईआरटी किताबों को प्राथमिकता देनी चाहिए और निजी प्रकाशकों की किताबें केवल तभी इस्तेमाल की जा सकती हैं, जब वे विवादास्पद या आपत्तिजनक सामग्री से मुक्त हों। लेकिन कई स्कूल इन नियमों की अनदेखी कर रहे थे।

    अब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जितेंद्र कुमार गोंड ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए नए निर्देश जारी किए हैं। कहा, सभी प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को चेतावनी दी गई है कि अगले सत्र में सरकारी निर्धारित किताबों का ही इस्तेमाल होगा। किसी भी निजी प्रकाशक की महंगी किताब लगाने की अनुमति नहीं है।

    स्कूलों को 15 दिनों के अंदर अगले सत्र की पाठ्य-पुस्तकों की सूची प्रमाणित करके खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से बेसिक शिक्षा कार्यालय में जमा करनी होगी। यदि कोई स्कूल इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसकी मान्यता शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा और विभागीय तथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    प्रधानाचार्य और प्रबंधक खुद इसके लिए जिम्मेदार होंगे। यह फैसला अभिभावकों के लिए बहुत बड़ी जीत है। अब बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, साथ ही परिवारों पर महंगी किताबों का बोझ भी कम होगा। कमीशनखोरी और मनमानी का सिलसिला अब रुकेगा। शिक्षा का असली उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास है, न कि कुछ लोगों की कमाई।

    यदि बने प्राइवेट किताबें खरीदने का दबाव तो करें शिकायत

    बीएसए ने बताया यदि बच्चे का स्कूल महंगी प्राइवेट किताबें खरीदने के लिए बाध्य करता है, तो आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं या सीधे जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय में जानकारी दे सकते हैं। यह बदलाव हजारों परिवारों के लिए राहत के लिए है। यदि स्कूल दबाव बनाते हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।