आजमगढ़ में सरयू नदी में उफान से कई गांवों पर बढ़ा खतरा, तमसा ने भी दिखाया रौद्र रूप
आजमगढ़ के उत्तरी देवारा में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ रहा है जिससे सहबदिया परसिया गांगेपुर और उर्दिहा गांवों में कटान का खतरा बढ़ गया है। पहले भी बाढ़ से कई एकड़ जमीन नदी में समा गई थी। प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।

जागरण संवाददाता, रौनापार( आजमगढ़)। सगड़ी तहसील के उत्तर देवारा में बहने वाली सरयू नदी के जलस्तर में मंगलवार को भी वृद्धि दर्ज की गई। 24 घंटे में एक सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा है। उधर, बारिश के कारण तमसा नदी भी बढ़ने लगी है। हालांकि न्यूनतम गेज से काफी नीचे जलस्तर है।
पुरुवा हवा बहने और बारिश होने से देवारा में कटान हो रही है। सहबदिया ,परसिया, गांगेपुर, उर्दिहा गांवों में कटान हो रही है। आगे भी यही स्थिति रही तो कुछ किसान भूमि हो जाएंगे। इन गांवो में अब तक काफी जमीन सरयू नदी काट चुकी है। सरयू नदी में पूर्व में आई बाढ़ से देवारांचल के देवारा खास राजा, सहबदिया,गांगेपुर, उर्दिहा आदि गांव की सैकड़ों एकड़ भूमि नदी की धारा में विलीन हो गई थी।
नदी में बाढ़ आने से नदी के तटवर्ती गांव चक्की हाजीपुर, देवारा खास राजा,भदौरा,साहडीह,बूढनपट्टी, बांका,अभ्भनपट्टी, सोनौरा, अजगरा, अचल नगर आदि गांव के लोगों के आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।लोग कई किलोमीटर की दूरी नाव से होकर पार करते हैं। वहीं पर जलस्तर बढ़ते ही सबसे ज्यादा समस्या पशुओं के चारों की हो जाती है। बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट है। महुला गढ़वल बांध पर 10 बाढ़ चौकियां स्थापित हैं। संबंधित विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी सुनिश्चित कर दी गई है।
बाढ़ की स्थिति में प्रभावित लोगों के लिए 14 आश्रम पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। सोमवार शाम चार बजे बदरहुआ गेज पर नदी का जलस्तर 69. 51 मीटर पर था, जो मंगलवार शाम चार बजे एक सेमी वृद्धि के साथ 69. 52 मीटर पर रिकार्ड किया गया। यहां न्यूनतम गेज 70.25 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर और उच्चतम गेज 73.52 मीटर है।
सोमवार शाम चार बजे डिघिया गेज पर नदी का जलस्तर 68.71 मीटर पर था। मंगलवार शाम चार बजे जलस्तर 68.75 मीटर पर दर्ज किया गया। 24 घंटे में डिघिया के न्यूनतम गेज पर नदी का जलस्तर चार सेंटीमीटर बढ़ाव पर दर्ज किया। यहां न्यूनतम गेज 68.90 मीटर, खतरा बिंदु 70.40 मीटर और उच्चतम गेज 72.59 मीटर पर है। वहीं अब बाढ़ की सूरत बनने की वजह से तटवर्ती इलाकों में जहां चिंंता है तो वहीं दूसरी ओर खेती किसानी को लेकर भी दुश्वारियां सिर उठा रही हैं।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।