रसाेईं से मसाला, आटा और खाद्य तेल हो गया खत्म, अचार संग रोटी खा रहे बाढ़ पीड़ित
बलिया में बाढ़ पीड़ितों का जीवन संकट में है। 300 से अधिक ग्राम पंचायतों में लोग पानी से घिरे घरों में रहने को मजबूर हैं भोजन और पानी की भारी किल्लत है। गंगा के जलस्तर में कमी आने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं जिससे लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

जागरण संवाददाता मझौवा (बलिया)। बाढ़ पीड़ित हल्दी गांव के हरेंद्र यादव, भरसौता के दिनेश कुमार, दीननंदपुर के नित्यानंद पांडेय, हंस नगर के तारकेश्वर राय, मझौवा के विजय यादव, रामगढ़ के पंकज सोनी हल्दी के दुकानदार मनोज गुप्ता की दर्द सुनकर कलेजा कांप जा रहा है।
पिछले दस दिनों से उनका घर पानी से घिरा है। कुछ लोगों के घरों में पानी घुस गया है। रसोईं में गैस सिलेंडर तो है लेकिन अन्य खाद्य सामग्री जैसे हर्दी, मसला, खाद्य तेल के साथ ही साथ आटा भी खत्म हो चुका है। दिन रहते ही महिलाएं रोटी बना ले रही हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में कभी सब्जी बन जा रही है नहीं तो अचार, नमक से ही रोटी खाकर सो जा रहे हैं। कारण यह है कि दिन में बाहर सामान लाने के लिए नाव भी नहीं मिल रहे हैं। उनका कहना है कि दिन तो किसी तरह कट जा रही है लेकिन रात नही गुजर पा रही है। अंधेरा के बीच रुक-रुककर हो रही बारिश पूरी नींद उड़ा दे रही है। यह एक ही गांव नहीं बल्कि बाढ़ प्रभावित 300 से अधिक ग्राम पंचायतों की है।
गांव के लोगों का कहना है कि गंगा की जलस्तर में घटाव शुरू होने के बाद भी बलिया बैरिया राष्ट्रीय राजमार्ग के रेपुरा, राजपुर एकौना, सुजानीपुर, हरिहरपुर, नेम छपरा, उदवंत छपरा, हंस नगर, हल्दी, भरसौता, हृदय चक, नंदपुर, बन्धुचक,बाबुवेल, बघौच, पोखरा, प्रबोधपुर, रुद्रपुर, जग छपरा, गरया, डांगरबाद, धर्मपुरा, शुक्लछपरा, मझौवा, रामगढ़ की बाढ़ से धिरी बस्ती की 50 हजार आबादी बाढ़ की त्रासदी झेलने को बाध्य है।
गंगा का जलस्तर कम होने से थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन भोजन, प्रकाश की व्यवस्था, पेयजल, चिकित्सा की समस्या अभी भी मुख्य रूप से पीड़ितों के समक्ष खड़ी है। सरकार की ओर से कोई सहायता नहीं मिलने से पीड़ितों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ का पानी अभी तक उनके घरों में बस्ती के पास जमा है। सीलन, दुर्गंध युक्त वातावरण में रहना दुश्वार हो गया है।
गंगा की बाढ़ से नष्ट हुई किसानों की फसल
बलिया- बैरिया बांध के दक्षिण बसे 20 गांव के किसानों ने गंगा की बाढ़ से फसल नष्ट हो गई है। किसान राणा प्रताप सिंह, जयकुमार ओझा, दीनदयाल वर्मा, बुधन ठाकुर आदि का कहना है कि 5000 एकड़ में बोई गई परवल की फसल गंगा की बाढ़ नष्ट हो गई। दूसरी बार आई बाढ़ में शेष बची फसलों को अपने आगोश में ले लिया। जिसका कारण हम लोगों की आर्थिक स्थिति दयनीय स्थिति में पहुंच गई है। ऋषि देव सिंह, सूरज सिंह, शत्रुघ्न सिंह, रविंद्र ओझा आदि किसानों का कहना है कि खरीफ में बोई गई मक्का, बाजरा फसल बाढ़ की भेंट चढ़ गई।
पशुपालकों ने भूसा वितरण की उठाई आवाज
क्षेत्र के गंगा की बाढ़ से घरों में पानी प्रवेश कर जाने के कारण एनएच- 31, हल्दी रेपुरा की सड़कों पर पशुओं के साथ शरणागत पशु पालकों ने शासन और प्रशासन से भूसा उपलब्ध कराने की मांग की आवाज उठाई है। पशुपालक हल्दी नेम धारी यादव, रेपुरा, अनिल यादव, बहादुरपुर बलिराम यादव, जग छपरा श्री भगवान यादव, धर्मपुरा, अजय सिंह, गंगापुर मंटू गोंड आदि का नाम शामिल हैं।
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