Raksha Bandhan: परिवार से साठ साल बाद मिलीं मुन्नी देवी, भाई जगदीश को पहली बार बांधी राखी, बोले- अब मत बिछड़ जाना
Bijnor News बिजनौर में 60 साल पहले मेले में खोई मुन्नी देवी को उनके पोते ने परिवार से मिलाया। फर्रुखाबाद में रह रहीं मुन्नी देवी को अपने बचपन की यादें ताजा थीं। पोते प्रशांत ने दादी की इच्छा पूरी करते हुए उनके पैतृक गांव बिजनौर के कंभौर में भाई जगदीश सिंह से मिलवाया। इस रक्षा बंधन पर मुन्नी देवी ने साठ साल बाद पहली बार भाई को राखी बांधी।

यह है मुन्नी देवी की कहानी
गांव कंभौर निवासी मुन्नी देवी साठ साल पूर्व बिजनौर के विदुरकुटी पर लगे गंगा स्नान मेले में स्वजन से बिछड़ गईं थीं। उन्हें फर्रूखाबाद जिले के रहने वाले ललई सिंह व उनकी पत्नी को सौंप दिया था। ललई सिंह ने ही मुन्नी देवी का लालन पोषण और विवाह किया। मेले में घूमने गई मुन्नी देवी घर से दूर हो गईं और संपर्क के लिए कोई साधन नहीं था। मुन्नी देवी घर से दूर रहीं, लेकिन परिवार को मन में बसाए रखा। उन्हें सभी स्वजन के नाम याद रहे। कुछ दिन पहले उन्होंने पोते प्रशांत को अपने खोने की कहानी सुनाई।
प्रशांत ने कंभौर आकर भाई जगदीश सिंह को बताई सारी बात
प्रशांत बिजनौर आए और कंभौर गांव जाकर मुन्नी देवी के भाई जगदीश सिंह को सारी बात बताई। इसके बाद मुन्नी देवी को छह दशक बाद अपने गांव आईं। अब उनसे मिलने के लिए दूर दराज के रिश्तेदार आ रहे हैं। मुन्नी देवी ने कभी साठ साल पहले अपने भाईयों को राखी बांधी थी।
घर आईं तो रक्षाबंधन का ही अवसर था। स्वजन ने मुन्नी देवी से भाई जगदीश सिंह को राखी बंधवाने के लिए दस बजे का समय निर्धारित कर दिया था। मुन्नी देवी ने जब अपने भाई जगदीश सिंह को छह दशक बाद राखी बांधी उस समय घर के सभी सदस्य एकजुट थे। उनके लिए यह एक यादगार और रोमांचक लम्हा था। जगदीश सिंह ने नेग का लिफाफा मुन्नी देवी को देते हुए कहा कि इतने साल बाद लौटी हो। अब बिछड़ना नहीं है। इस बात पर सभी भावुक हो गए।
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11 भाई-बहनों में अब हैं केवल तीन
मुन्नी देवी 11 भाई बहन थे। आठ भाई और तीन बहन। इनमें से सात भाई और एक बहन की मृत्यु हो चुकी है। मुन्नी देवी, जगदीश सिंह और छोटी बहन शर्मा देवी ही अब अपनी पीढ़ी में बचे हैं। बहन शर्मा देवी भी मौजूद थी और उन्होंने भी भाई जगदीश सिंह को राखी बांधी।
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