DDU News: टॉपरों में चमकी कॉलेजों की मेधा, एक तिहाई रही भागीदारी
गोरखपुर विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षा समारोह में कालेजों के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। 76 स्वर्ण पदक विजेताओं में से एक तिहाई कालेजों के हैं जिनमें गोरखपुर देवरिया और कुशीनगर के कालेज शामिल हैं। अखिल भाग्य महाविद्यालय सेंट जोसेफ और बीआरडी पीजी कालेज ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। स्व-वित्तपोषित कालेजों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया जिससे साबित होता है कि प्रतिभा किसी विशेष परिसर की मोहताज नहीं होती।

डाॅ. राकेश राय, जागरण, गोरखपुर। जहां एक ओर प्रवेश के अभाव में तेजी से कालेजों में ताला लगने की बात सामने आ रही है, वहीं कई काॅलेज दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय को टाॅपर दे रहे हैं। इस बार विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षा समारोह में जिन विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिले हैं, उनमें एक तिहाई भागीदारी काॅलेजों के विद्यार्थियों की रही है। 76 टाॅपरों को स्वर्ण पदक दिए गए हैं, उनमेंं 24 टाॅपर काॅलेज रहे हैं। इनमें गोरखपुर के अलावा देवरिया व कुशीनगर के काॅलेज भी शामिल हैं।
सर्वाधिक चार पदक गोरखपुर के रानापार क्षेत्र के अखिल भाग्य महाविद्यालय के विद्यार्थियाें को मिला है। बीए हिंदी, बीएससी बायो, एमए हिंदी और एमए हिंदी का टाॅपर इसी महाविद्यालय ने दिया है। दूसरे नंबर पर गोरखपुर के सेंट जोसेफ और देवरिया के बीआरडी पीजी काॅलेज शामिल है।
इन काॅलेजों ने तीन-तीन टाॅपर दिए हैं। टाॅपरों की सूची में गोरखपुर के सीआरडी पीजी काॅलेज और नेशनल पीजी काॅलेजों के विद्यार्थी भी चमके हैं। इन दोनों कालेजों के दो-दो विद्यार्थी दो अलग-अलग पाठ्यक्रम के टाॅपर बने हैं। जिलावार काॅलेजों के टाॅपरों की बात करें तो गोरखपुर के काॅलेजों ने 16 टाॅपर दिए हैं। दूसरे नंबर पर देवरिया है। इसके पांच टाॅपर विश्वविद्यालय के टाॅपरों की सूची में चमके हैं। दो टाॅपरों के साथ कुशीनगर के काॅलेज तीसरे स्थान पर हैं।
स्व-वित्तपोषित काॅलेजों ने लहराया परचम
ध्यान देने की बात यह है कि टाॅपरों में सर्वाधिक संख्या स्व-वित्तपोषित महाविद्यालयों की है। काॅलेजों के 24 टाॅपरों से 15 टाॅपर स्व-वित्तपोषित कालेजों के ही हैं। केवल नौ काॅलेज ही ऐसे हैं, जो वित्तपोषित हैं। इनमें एक बीआरडी मेडिकल काॅलेज और वीर बहादुर सिंह राजकीय महाविद्यालय कैंपियरगंज भी शामिल है।
स्व-वित्तपोषित काॅलेजों ने यह साबित कर दिया है कि उनके परिसर में भी मेधा पनपती है। इन काॅलेजों ने 15 टाॅपर दिए हैं, जो अन्य काॅलेजों के उदाहरण हैं। मैं ऐसे सभी स्व-वित्तपोषित काॅलेज के प्रबंधकों, प्राचार्यों व शिक्षकों को बधाई देता हूं, जिन्होंने विश्वविद्यालय को टाॅपर देकर अन्य काॅलेजों के लिए उदाहरण बनने का कार्य किया है।
-डाॅ. सुधीर कुमार राय, महामंत्री
स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय प्रबंधक महासभा
जिन काॅलेजोंं ने विश्वविद्यालय को टापर दिए हैं। वह बधाई के पात्र है। यह उन काॅलेज प्रबंधन के लिए उदाहरण भी है, जो अपने काॅलेजों का संचालन बंद करने के बारे में सोच रहे हैं या फिर बंद कर चुके हैं। काॅलेजों से टाॅपर निकलने से यह सिद्ध हो गया है कि प्रतिभा परिसर की नहीं प्रतिबद्धता की मोहताज होती है।
-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, दीदउ गोरखपुर विश्वविद्यालय
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।