Gorakhpur News: घरेलू कनेक्शन पर चार्ज हो रहे 15 हजार ई-रिक्शा, 1.35 लाख यूनिट बिजली चोरी
गोरखपुर में 15 हजार से ज्यादा ई-रिक्शा घरेलू बिजली से चार्ज हो रहे हैं जिससे हर महीने लगभग 4.5 लाख यूनिट बिजली की चोरी हो रही है। एक रिक्शा को चार्ज करने में औसतन नौ यूनिट बिजली लगती है जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और आम उपभोक्ता परेशान हैं। चालकों का कहना है कि उन्हें कमर्शियल कनेक्शन की जानकारी नहीं है।

जितेन्द्र पाण्डेय, जागरण गोरखपुर। शहर में बेतरतीब ढंग से चल रहे 15 हजार से अधिक ई-रिक्शा सिर्फ यातायात व्यवस्था को नहीं बिगाड़ रहे, विद्युत निगम की आंखों में धूल झोंकते हुए घरेलू कनेक्शन से चार्ज किए जा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, इससे हर महीने करीब साढ़े चार लाख यूनिट बिजली की चोरी हो रही है।
एक ई-रिक्शा को चार्ज करने में तीन से छह घंटे का समय लगता है, और औसतन नौ यूनिट बिजली खर्च होती है। हर दिन औसतन 1.35 लाख यूनिट बिजली चोरी हो रही है। यह बिजली चोरी न केवल सरकारी राजस्व को चूना लगा रही है, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी निर्बाध आपूर्ति से वंचित कर रही है। समय पर बिल चुकाने के बावजूद लोगों को रोजाना कटौती झेलनी पड़ रही है।
परिवहन विभाग के आकड़े के अनुसार जिले में 15 हजार ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन है। इसमें नौ हजार के करीब ई-रिक्शा शहर में संचालित हो रहे है। इसमें से कुछ एक बैटरी तो कुछ दो या तीन बैटरी वाले ई-रिक्शा है। शहर के रहने वाले बबलू के पास सिंगल बैटरी वाला ई-रिक्शा है, जिसे एक बार चार्ज करने में ढाई से तीन घंटे का समय लगता है।
इसी तरह से आकाश, राहुल, मोनू का कहना है कि उनके पास दो बैटरी संचालित ई-रिक्शा है, जिसे चार्ज करने में चार से पांच घंटे और तीन बैटरी वाले ई-रिक्शा को चार्ज करने में छह से साढ़े छह घंटे लगते है। इसके लिए उन्होंने अलग से कनेक्शन नहीं लिया है। पहले से जो है, उसी से ये चार्ज कर रहे है। हालांकि इसमें दो चालक किराए पर रहते है।
बिजली का बिल वह मकान मालिक को देते है, लेकिन उनके मालिक के पास कामर्शियल कनेक्शन नहीं है। हालांकि इन चालकों का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम कि ई-रिक्शा को चार्ज करने के लिए उन्हें कामर्शियल कनेक्शन लेना है और न ही कभी विद्युत निगम के लोगों ने उन्हें बताया। जबकि हर महीने बिजली का बिल वह जमा करते है।
350 से 500 रुपये लेते है भाड़ा
आरटीओ के अनुसार जिले में 10 लोगों के पास सवारी ढोने वाले 30 से 35 ई-रिक्शा है, जिसे वह संचालित करवाते है। लेकिन, वह खुद न चलाकर उसे भाढ़े पर दे रखे है। एक ई-रिक्शा मालिक ने बताया कि उनके पास दो ई-रिक्शा है। एक वह चलाते है और दूसरे को उन्होंने भाड़े पर दे रखा है।
उन्होंने बताया कि चालक हर दिन उन्हें 400 रुपये देता है। इसके अलावा चार्जिंग, सर्विसिंग समेत अन्य गड़बड़ी होने पर मरम्मत की जिम्मेदारी चालक की है।
वहीं चालक रामप्रीत ने बताया कि वह भाड़े पर ई-रिक्शा चलाता है। दिनभर चलाने के बाद मालिक को 350 रुपये से मतलब है। गाड़ी खराब होने पर उसे बनवाने की जिम्मेदारी उसकी है। रामप्रीत ने बताया कि अगर ई-रिक्शा नया है तो 500 रुपये मालिक को देना होता है, पुराना होने पर 350 रुपये देना होता है।
हर दिन चार्ज करने में खपत हो रही 49 घंटे की बिजली
विद्युत निगम के एक कर्मचारी के अनुसार एक ई-रिक्शा को चार्ज करने में करीब नौ यूनिट बिजली लगती है। ऐसे में दो हजार ई-रिक्शा को चार्ज करने में हर दिन सात घंटे की बिजली खपत हो रही है और 15 हजार ई-रिक्शा को चार्ज करने में 49 घंटे से अधिक की बिजली खपत होगी। महीने में एक हजार 470 घंटे और एक साल में पांच लाख 36 हजार 550 घंटे की बिजली खपत हो रही है। ये बिजली आम उपभोक्ताओं की है।
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जिन वाहनों का व्यावसायिक उपयोग किया जाता है, उनकों घरेलू कनेक्शन से चार्ज नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा मिलेगा तो संबंधित पर जुर्माना की कार्रवाई की जाएगी।
-अंकित कुमार, अधिशासी अभियंता टाउनहाल
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